June 5, 2026 4:28 am

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ऑफ द रिकॉर्ड “सिंघम” की छवि या पीआर का जादू?, चंडीगढ़ में एक IAS अधिकारी की लगातार हो रही वाहवाही पर उठ रहे सवाल

जनता पूछ रही है—जमीनी काम ज्यादा या प्रचार?”

चंडीगढ़ ब्यूरो

चंडीगढ़। प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक आईएएस अधिकारी की खूब चर्चा है। पिछले कुछ समय से लगातार जारी हो रहे प्रशंसात्मक प्रेस नोटों ने उन्हें शहर का नया “सिंघम” बना दिया है। लेकिन शहर में एक दूसरी चर्चा भी चल रही है—क्या यह छवि जमीनी कामकाज से बन रही है या फिर पीआर की ताकत से?
सरकारी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया और मीडिया सर्किल तक, अधिकारी की छवि को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ समय से उनके नाम पर लगातार प्रशंसात्मक प्रेस नोट जारी हो रहे हैं, जिनमें उन्हें शहर का “सिंघम” बताने की कोशिश की जा रही है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि अधिकारी की छवि चमकाने के लिए एक निजी पीआर तंत्र सक्रिय है। कुछ लोगों का दावा है कि विभाग के अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारी अपने वरिष्ठ के सामने नंबर बढ़ाने की होड़ में इस प्रकार की प्रचार गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि कहीं से नहीं हुई है, लेकिन शहर में इस विषय पर खूब चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं।

शहर के कई नागरिकों का कहना है कि किसी भी अधिकारी की वास्तविक पहचान उसके फील्ड वर्क और जनसंपर्क से बनती है। लोगों का सवाल है कि यदि कोई अधिकारी सेक्टरों, कॉलोनियों, बाजारों और सार्वजनिक संस्थानों में जाकर नागरिकों की समस्याएं सुने और उनका समाधान करवाए, तब उसकी लोकप्रियता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। केवल प्रेस विज्ञप्तियों और प्रचार सामग्री के आधार पर जनता की राय बदलना आसान नहीं होता।

उधर शहर के लोग यह भी उदाहरण दे रहे हैं कि पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक लगातार मंडियों, स्कूलों, अस्पतालों और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों का दौरा कर रहे हैं। वे स्वयं मौके पर जाकर समस्याएं सुन रहे हैं और अधिकारियों को जवाबदेह बना रहे हैं। ऐसे में लोगों का मानना है कि जिन अधिकारियों के जिम्मे विभिन्न विभागों का संचालन है, उन्हें भी फील्ड में अधिक सक्रिय दिखाई देना चाहिए।

चर्चाओं का दूसरा पहलू विभागीय कार्यों से जुड़ा हुआ है। शहर में यह धारणा भी बन रही है कि संबंधित विभाग में कई परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा से पीछे चल रही हैं। कुछ विकास कार्यों और टेंडरों के पूरा होने में देरी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि जमीनी स्तर पर कार्यों की गति तेज हो और लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान हो, तो किसी अतिरिक्त प्रचार अभियान की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि आज के दौर में जनसंपर्क महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन जनविश्वास उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। जनता प्रेस नोट से ज्यादा अपने मोहल्ले की सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवर, स्कूल और अस्पताल की स्थिति देखकर राय बनाती है। इसलिए किसी भी अधिकारी के लिए सबसे बड़ा पीआर उसकी कार्यशैली और परिणाम होते हैं।
फिलहाल चंडीगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में यही चर्चा है कि “सिंघम” की छवि कागजों और प्रेस नोटों से बनेगी या फिर जनता के बीच जाकर समस्याओं का समाधान करने से। इसका जवाब आने वाले समय में शहर की जनता ही तय करेगी।

प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि किसी अधिकारी को “सिंघम” की उपाधि मीडिया मैनेजमेंट से नहीं, बल्कि जनता देती है। जब लोग खुद उसके काम की चर्चा करने लगें, समस्याओं के समाधान के उदाहरण देने लगें और उसके दौरे की प्रतीक्षा करें, तभी ऐसी छवि बनती है।
फिलहाल चंडीगढ़ में चर्चा यही है कि यह “सिंघम” वाली छवि जनता के अनुभव से बन रही है या फिर प्रेस नोटों के जरिए गढ़ी जा रही है। आने वाले दिनों में इसका फैसला भी जनता ही करेगी।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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