11 कम प्रदर्शन वाले केंद्रों में विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए स्त्री रोग, बाल रोग और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की तिकड़ी तैनात होगी
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 6 अक्टूबर। हरियाणा सरकार ने राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा के मिशन निदेशक डॉ. आर.एस. ढिल्लों ने बताया कि राज्य में भारत सरकार के निर्धारित 69 एफआरयू के मानक के मुकाबले वर्तमान में 101 प्रथम रेफरल इकाइयां संचालित हो रही हैं।
इनमें से अधिकांश एफआरयू में 24 घंटे सातों दिन बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां दिन-रात सामान्य प्रसव के साथ-साथ सिजेरियन ऑपरेशन (सी-सेक्शन) की सुविधा भी उपलब्ध है। हालांकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण 11 एफआरयू में सेवाएं अपेक्षा के अनुरूप संचालित नहीं हो पा रही थीं।
हर बुधवार वर्चुअल वॉक-इन इंटरव्यू
डॉ. ढिल्लों ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एनएचएम मुख्यालय द्वारा बिना प्रशासनिक देरी के हर बुधवार वॉक-इन वर्चुअल इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 84 विशेषज्ञ डॉक्टरों को अनंतिम रूप से चयनित किया जा चुका है। इसके साथ ही 24×7 रक्त जांच सुविधाएं भी शुरू कर दी गई हैं।
11 एफआरयू में विशेषज्ञों की विशेष तिकड़ी
कम प्रदर्शन करने वाले एफआरयू में बेहतर चिकित्सीय हस्तक्षेप और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की विशेष ‘ट्रायड’ यानी तिकड़ी तैनात करने का निर्णय लिया है। इसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट शामिल होंगे।
जिन केंद्रों पर विशेषज्ञों की यह तिकड़ी पूरी उपलब्ध नहीं है, वहां हर बुधवार और शनिवार को विशेषज्ञ डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी।
इन केंद्रों में शामिल हैं—
अंबाला: सीएचसी चौरमस्तपुर
भिवानी: एसडीएच लोहारू
फतेहाबाद: सीएचसी भट्टू कलां और सीएचसी भूना
गुरुग्राम: एसडीएच पटौदी
झज्जर: एसडीएच मातनहेल और सीएचसी छारू
जींद: सीएचसी आलेवा
नूंह: सीएचसी पिनगवां
रेवाड़ी: सीएचसी बावल और सीएचसी नाहर
हाई रिस्क गर्भावस्था की होगी जांच
डॉआर.एस. ढिल्लों ने बताया कि जिला नागरिक अस्पतालों अथवा अन्य पूरी तरह क्रियाशील एफआरयू से विशेषज्ञ डॉक्टरों की रोस्टर के अनुसार बुधवार और शनिवार को इन 11 केंद्रों पर तैनाती सुनिश्चित की गई है।
प्रतिनियुक्ति के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर समर्पित ओपीडी क्लिनिक संचालित करेंगे। इसके अलावा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की जांच, नियोजित सिजेरियन ऑपरेशन की तैयारी एवं समय-निर्धारण तथा आपातकालीन प्रसूति मामलों का उपचार किया जाएगा।
गर्भवती महिलाओं को नजदीक मिलेगी जीवनरक्षक सुविधा
मिशन निदेशक ने विश्वास जताया कि इस पहल से राज्य के सभी एफआरयू को पूरी तरह कार्यात्मक बनाने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ेगा और गर्भवती महिलाओं को आपात स्थिति में दूर स्थित अस्पतालों में जाने की आवश्यकता कम होगी।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से महिलाओं को उनके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर समय पर सुरक्षित और जीवनरक्षक प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराना संभव होगा।












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