April 7, 2026 11:42 pm

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पंचकूला से बड़ी खबर: आरोही मॉडल स्कूलों के शिक्षकों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट की मुहर

चंडीगढ़/पंचकूला। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने हरियाणा सरकार को बड़ा झटका देते हुए एकल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने आरोही मॉडल स्कूलों के अनुबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने के निर्देशों के खिलाफ दायर राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है।

गौरतलब है कि एकल पीठ ने पिछले वर्ष नवंबर में आदेश दिया था कि जिन कर्मचारियों ने पांच वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है, उन्हें उनके पदों पर नियमित नियुक्ति दी जाए।

याचिकाकर्ताओं की दलील: बायलॉज में है स्पष्ट प्रावधान

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि सोसाइटी के सेवा बायलॉज-2011 के अनुसार कोई भी अनुबंधित कर्मचारी पांच वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद नियमित नियुक्ति का हकदार है।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि सोसाइटी की जनरल बॉडी ने 12 फरवरी 2019 और 21 जुलाई 2023 की बैठकों में कर्मचारियों के नियमितीकरण का निर्णय ले लिया था। इस दौरान कर्मचारियों की संख्या, वित्तीय प्रभाव और पात्रता का पूरा आकलन किया गया था।

रिकॉर्ड के अनुसार कुल 300 कर्मचारी नियमितीकरण की श्रेणी में आते हैं, जिनमें:

15 प्रिंसिपल

256 पीजीटी

20 लाइब्रेरियन

4 क्लर्क

5 अकाउंट्स क्लर्क शामिल हैं।

कोर्ट में यह भी प्रस्तुत किया गया कि नियमितीकरण से सरकारी खर्च बढ़ने के बजाय घटेगा।

सरकार की आपत्तियां कोर्ट ने कीं खारिज

सरकार ने तर्क दिया था कि नियमित नियुक्ति के लिए वित्त विभाग की स्वीकृति आवश्यक है और नियुक्ति पत्रों में नियमितीकरण का कोई दावा नहीं किया जा सकता।

हालांकि, डिविजन बेंच ने इन आपत्तियों को अस्वीकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो कि वित्त विभाग ने बायलॉज को कभी नकारा हो।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया, चयन और सेवा बायलॉज सभी विधिसम्मत थे। ऐसे में सोसाइटी अपने ही निर्णय से पीछे नहीं हट सकती।

नियमितीकरण से होगा वित्तीय लाभ

सुनवाई के दौरान सामने आया कि वर्तमान में अनियमित कर्मचारियों पर वार्षिक व्यय 26.76 करोड़ रुपये है। नियमितीकरण के बाद यह घटकर 25.71 करोड़ रुपये रह जाएगा।

इस प्रकार सोसाइटी को प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ रुपये की बचत होगी। कोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना।

ब्याज समेत वेतन-भत्तों के भुगतान के आदेश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब सोसाइटी स्वयं पांच वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय ले चुकी है, तो प्रशासनिक देरी नियमों के विपरीत है।

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं के सेवा रिकॉर्ड पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं है, इसलिए उन्हें नियमित नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

डिविजन बेंच ने आदेश दिया कि सभी पात्र कर्मचारियों को पांच वर्ष की सेवा पूरी करने की तिथि से नियमित माना जाए और बकाया वेतन-भत्तों का भुगतान सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित किया जाए।

इस फैसले को राज्य के अनुबंधित शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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