जानवर, आदमी, फरिश्ता और खुदा,
आदमी की होती हैं सैंकडों किस्में
कई दिन से चिंता हो रही थी कि होगा तो क्या होगा? ऐसा लगा कि दिल धक धक तो कर रहा है,लेकिन धड़कना छोड़ गया है। किसी अनहोनी की आशंका से दिल बैठा जा रहा था। यही आशंका सताए जा रही थी कि कहीं कुछ अनर्थ तो नहीं हो जाएगा? कहीं ऐसा तो नहीं हो जाएगा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रधान सचिव अरूण कुमार गुप्ता 30 सितंबर को आईएएस की नौकरी से रिटायर हो कर सीधे अपने घर चले जाएं। ऐसा लगता है कि.. अब ऐसा नहीं हो पाएगा। मेरी और हम जैसों कि फरियाद हरियाणा और केंद्र सरकार तक पहुंच गई है। ऐसा लगता है कि अरूण गुप्ता को एक बरस की एक्सटेंशन मिल जाएगी। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक अरूण गुप्ता की एक बरस सेवाएं लिए जाने का प्रस्ताव हरियाण सरकार ने केंद्र सरकार को भेज दिया है। जब केंद्र और हरियाणा में एक ही बात है,एक ही सरकार है तो ऐसा लगता है कि अब अरूण कुमार भविष्य में भी अपनी लालिमा यूं ही बिखेरते रहेंगे। अंधेरे को तिरोहित करते रहेंगे। अरूण कुमार एक काबिल अधिकारी तो हैं ही साथ ही वो पद और प्रतिष्ठा के अहंकार से भी कोसों दूर हैं। टू प्लस टू फोर कहने-करने वालों में से हैं। होने का काम किसी का भी हो,वो उसे तुरंत ही कर देते हैं। अगर काम में कोई अड़चन हो तो सबंधित व्यक्ति को तुरंत बतला देते हैं कि ये काम क्यों नहीं हो सकता। वो लोगों को झूठी तसल्ली देने के लिए गोली, कैप्सूल, ग्लूकोज, इंजैक्शन, शक्त्तिवर्धक दवाएं,चूर्ण चटनी नहीं चटाते। अरूण गुप्ता इस तरह के व्यंजनों और कार्यक्रमों से सदैव दूर रहते आए हैं। टू द प्वाइंट बात करते हैं। निरपेक्ष भाव से लगे रहते हैं। बदले में किसी से रत्ती भर अपेक्षा भी नहीं रखते हैं। ऐसे लोग जिस स्थान पर होते हैं, वहां उनके उपस्थित पाए जाने उस स्थान की गरिमा बढती है और लोगों को इंसाफ मिलने की संभावना बनी रहती है। बाकि ये तो है कि आने वाले एक बरस में हरियाणा सरकार में प्रशासनिक व्यवस्था में काफी बदलाव हो जाएगा। अरूण गुप्ता के कायम रहने से वित्त विभाग में किसी अन्य अधिकारी के आने की आशंका भी कम हो गई है। ये जरूर है कि कई सीनियर अधिकारियों की आने वाले समय में दनादन रिटायरमेंट के कारण कई प्रमुख विभागों में नए प्रशासनिक सचिवों के आने की संभावना है। जैसे कि गृह और वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। केंद्र सरकार में पशुपालन विभाग के सचिव व हरियाणा कैडर के आईएएस अभिलक्ष लिखी भी उनके साथ ही रिटायर होंगे। उसके ठीक दो महीने बाद 31 जनवरी को राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा रिटायर हो रही हैं। इसके अलावा बीसी कल्याण निगम की एमडी अनिता यादव 30 सितंबर, फरीदाबाद मंडल के कमिशनर संजय जून 31 अक्टूबर, हिसार मंडल की कमीशनर गीता भारती 30 नवंबर, आरसीएस सुभिता ढाका व विशेष वित्त सचिव मनोज कुमार 31 मार्च, अंबाला मंडल कमीशनर संजीव वर्मा व डीएचई जितेंद्र दहिया 30 अप्रैल और विधानसभा के सचिव वीरेंद्र दहिया 31 मई को रिटायर होने जा रहे हैं। ये देखना रोचक होगा कि रिटायर होने वाले इन खलीफाओं में से किस किस को सरकार रिटायरमेंट के बाद सरकारी दायित्व देकर निहाल करती है या नहीं? जिन अफसरों ने नौकरी में रहते हुए दोस्त नहीं बनाए होते और सिर्फ पैसे ही कमाए होते हैं, उनको बाद में अपने ये अच्छे दिन बहुत याद आते हैं। फिर वो तन्हाईयों में बैठे बैठे ये सोचते रहते हैं कि..
ऐ दिल, वो आशिकी के फसाने किधर गए
वो उम्र क्या हुई, वो जमाने किधर गए
वीरान हैं मंजर, बाग बहारों का क्या हुआ
वो बुलबुल कहां हैं, वो तराने किधर गए
वो तारे,वो सितारे,वो नजारे किधर गए
रेगिस्तान में चलती उन ठंडी हवाओं को क्या हुआ
उन सेवादारों का, उन हसीनाओं का क्या हुआ
लैलाएं हैं खामोश दीवाने किधर गए
वो जुदाई में दीदार होने की उम्मीद क्या हुई
वो रंज में खुशी के बहाने किधर गए
दिन रात मयकदे में गुजरती थी जिंदगी
वो बेखुदी के जमाने किधर गए
मोदी का जन्मदिन
देश-विदशों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव से मनाए जाने के समाचार प्राप्त हुए हैं। उनके समर्थकों ने उनकी लंबी आयु की कामना करते हुए आशीर्वाद के दीए जलाएं हैं। हरियाणा सरकार ने भी इस मौके पर प्रदेश भर में कार्यक्रम किए। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने ऐसे कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस क्रम मे राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने अंबाला में सघन सफाई अभियान छेड़ा। इस काम में उनके साथ उनके समर्थक भी बड़ी संख्या में हाथ बंटा रहे थे। दूसरा नेक काम किया फरीदाबाद के सांसद और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने। उन्होंने अपनी लोकसभा क्षेत्र के 15 से 50 बरस की आयु के सैकड़ों दिव्यांगजनों को स्कूटी वितरित की। इस स्कूटी का डिजाइन केंद्रीय सरकार के उपक्रम एलिमको से दिव्यांगजनों की जरूरत के मुताबिक करवाया गया था। गुर्जर ने अपने उद्योगपति मित्रों से सीएसआर फंड जुटाया। उन से पैसा सीधे एलिमको के खाते में ट्रांसफर करवाया। एक समारोह में इन सबको बुला कर दिव्यांगजनों को स्कूटी भेंट की और करवाई। गुर्जर ने कहा कि जिस जिस ने इस नेक काम में आहुति डाली है उसके खाते में अब इन दिव्यांगजनों की दुआएं भी ट्रांसफर हो गई है। गुर्जर अपने सियासी विरोधियों को भी साथ चलने का हुनर रखते हैं। उनके सियासी विरोधी उनके पास कामों के लिए आते रहते हैं। गुर्जर उनको यही कहते हैं कि भले ही चुनाव में उनका विरोध किया गया हो,लेकिन अब वो समूचे फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं। जो लोग मदद की उम्मीद में गुर्जर के दरवाजे पर आते हैं वो उनकी उम्मीद पर खरा उतरने की भरसक कोशिश करते हैं। भले ही इन लोगों ने चुनाव में गुर्जर की मुखालफत की हो लेकिन वो अपने मन में उनके प्रति वैर-नफरत का भाव नहीं रखते। दिल खोल कर उनकी मदद करेंगे। गुर्जर के अपनेपन के इस अंदाज पर कहा जा सकता है कि…
मुझे परखना हो तो मेरे पास चले आना
यहां वहां की खबरें तुम्हें गुमराह कर सकती हैं
वन विभाग
हरियाणा के वन विभाग में कुछ अलग ही कहाणी चल रही है। ऐसा लगता है कि यहां कायदे, कानून, नियमों पर पंसद ना पंसद और मनमर्जी हावी हो गई है। हरियाणा में भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के 58 पद स्वीकृत हैं। एक समय तो यहां ऐसा गदरफंड भी उत्पन्न हो गया था कि पीपीसीएफ की दो पदों के मुकाबले यहां पदोन्नति पाकर कुल सात अधिकारी इस रैंक में आ गए थे। बिना बात की भीड़ हो गई थी। ये भी धड़ल्ले से हो रहा हैकि जूनियर अधिकारियों को सीनियर पदों पर लगा दिया गया और सीनियर अफसरों को खुडडेलाइन लगा दिया गया है। इस व्यवस्था को दुरूस्त किए जाने की जरूरत है।
नाम के दीनदयाल
हरियाणा सरकार ने गरीबों को सस्ते आवास देने के नाम पर-आड़ में दीनदयाल जन आवास योजना लांच की थी। इसके तहत सरकार से लाईसैंस लेकर 180 गज तक के प्लाट बेचे जाते हैं। रोचक तथ्य ये है कि इस योजना में जो प्लाट बेचे जा रहे हैं कि उनके रेट 50 हजार रूपए से लेकर एक लाख रूपए तक हैं। एक गरीब आदमी की तो छोड़िए, सरकार में क्लास टू अधिकारी के लिए भी अपनी ईमानदारी कमाई में इनमें प्लाट लेना लगभग असंभव है। इस हालात का फायदा उठा कर कुछ प्रोपर्टी डीलर,नेताओं और अफसरों का गठजोड़ अवैध कालोनियों को काटने में जुट जाता है। चंूकि इन कालोनियों में प्लाट का रेट दीनदयाल आवास योजना के मुकाबले काफी कम होता है,इसलिए बहुत से लोग इन के चुंगल में फंस जाते हैं। अपना मकान बना लेते हैं। जब इन अवैध कालोनियों में सरकारी बुलडोजर चलता है, तब ये लोग पछताते रहते हैं। सरकार पर गरियाते रहते हैं कि जब ये अवैध कालोनी कट रही थी-बस रही थी, रजिस्ट्री हो रही थी, तब सरकार कहां सोई हुई थी?
बेहतर होगा कि सरकार को इस योजना के नाम के अनुरूप ही इसे दीनदयाल बनाने पर जोर दे। एक तो इसमें रेट की कैप लगाई जाए। सरकार की ओर से अधिकतम रेट फिक्स कर दिया जाए ताकि लोगों का शोषण न हो पाए। बेशक बिल्डर का भी सरकार ध्यान रखे। कोई हर्ज नहीं। उसे कह दिया जाए कि आप 25 या 30 परसेंट प्लाट अपने रेट से बेच लें,जबकि बाकी आप को सरकार की ओर से तय रेट पर ही बेचन होंगे। पहले एचएसवीपी-हुडा के रिहायशी प्लाट के ड्रा हो जाते थे। लोगों को इसमें वाजिब कीमत पर प्लाट मिल जाते थे। अब ये व्यवस्था बंद हो गई। एचएसवीपी ने तो कई बरसों से सेक्टर डवैलप करने ही बंद कर दिए हैं। बिल्डरों के आगे सरकार ने सरैंडर ही कर दिया है। अगर एचएसवीपी के पास कहीं से कुछ प्लाट बचे भी हुए हैं तो उनको नीलामी में बेचा जाने लगा है। इस कारण अब बाजार में अब बुरी तरह से बाजारवाद हावी हो गया है। बिल्डरों का एकछत्र राज हो गया है। सरकार को जनता पर कुछ तो..थोड़ा सा सा..मामूली सा.. रहम करना चाहिए। आम आदमी को राहत देने के लिए जरूर कुछ सोचना चाहिए। जरूर कुछ करना चाहिए। सरकार को ये साबित कर देना चाहिए कि यहां सिर्फ बाते बनाने का ही करोबार नहीं होता,जनता की तकलीफ दूर करने का भी बिजनैस किया जाता है। अफसरों,नेताओं और बिल्डरों के अवैध इस गठजोड़ पर ये लोग तो यही आपस में यही अर्ज कर रहे हैं कि..
नजर लग जाती है,जताया ना कर
इश्क एक राज है,बताया ना कर
लाख समझाया तुझे शक करता है जमाना
जब तू पास से गुजरे तो मुस्कराया ना कर













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