August 28, 2026 10:02 am

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सेहत संवारने में नींद का बड़ा योगदान: डॉ विजय गर्ग

हमारी शारीरिक और मानसिक सेहत में नींद का अहम योगदान है। सोते समय शरीर निष्क्रिय होता है, लेकिन मस्तिष्क अपनी सक्रिय यात्रा पर निकल जाता है। इस दौरान स्मृतियां फिर से लिखी जाती हैं, भावनाएं साफ होती हैं और शरीर खुद की मरम्मत करता है। ग्रोथ हार्मोन रिलीज होता है, जिससे मांसपेशियां, हड्डियां और कोशिकाएं रिपेयर होती हैं। इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और डीएनए रिपेयर एंजाइम सक्रिय रहते हैं।
सोने का समय: सिर्फ आराम नहीं, पुनर्निर्माण का समय
सोने का समय हमारे जीवन का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है। औसतन अगर कोई व्यक्ति 75 साल जिए, तो लगभग 25 साल सिर्फ नींद में ही बिता देता है। लेकिन सवाल यह है—क्या इस समय में शरीर और मस्तिष्क सचमुच निष्क्रिय रहते हैं? जवाब बिल्कुल नहीं है। नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर के अनुभवों को छांटता है, स्मृतियों को मजबूत करता है और भावनाओं को संतुलित करता है।
सोते समय दिमाग की सक्रियता
विज्ञान के अनुसार, नींद में मस्तिष्क किसी जागृत अवस्था से भी अधिक सक्रिय होता है। एमआरआई स्कैन दिखाते हैं कि नींद के दौरान मस्तिष्क बिजली की तरह चमकता-बुझता रहता है। यह दिनभर की जानकारियों को पुरानी स्मृतियों से जोड़ता है, भावनाओं को हल्का करता है और मन को तरोताजा बनाता है। नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि मस्तिष्क की सफाई और पुनर्गठन की प्रयोगशाला है।
सपनों की गुप्त प्रयोगशाला
नींद का सबसे जादुई पहलू है—सपनों की दुनिया। सपने हमारे भावनात्मक संतुलन के संरक्षक हैं। ये अव्यक्त भय, अधूरी इच्छाओं और अनकहे अनुभवों को प्रोसेस करने में मदद करते हैं। यही कारण है कि रोने और तनावपूर्ण दिन के बाद नींद लेने पर मन हल्का महसूस करता है।
शरीर की मरम्मत का कारखाना
गहरी नींद में शरीर चुपचाप पुनर्निर्माण करता है। ग्रोथ हार्मोन रिलीज होता है, जिससे मांसपेशियां, हड्डियां और कोशिकाएं खुद को ठीक करती हैं। इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और डीएनए रिपेयर एंजाइम सक्रिय हो जाते हैं। हर रात शरीर का यह नवीनीकरण ठीक उसी तरह होता है जैसे कोई शहर रात में सड़कें, पुल और बिजली की लाइनें सुधारता है ताकि सुबह वह फिर चमक उठे।
स्वस्थ जीवन की गारंटी
नींद सिर्फ चाहत नहीं, बल्कि जीवित रहने की शर्त है। अमेरिका के सैन डियागो में रेंडी गार्डेनर ने 1963–64 में 264 घंटे तक लगातार जागने का प्रयास किया। परिणामस्वरूप वह भ्रमित हो गया, उसकी स्मृति कमजोर हुई और वस्तुएं झूठी लगने लगीं। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष: 72 घंटे तक न सोना मस्तिष्क की सोच, भावनाओं और निर्णय क्षमता पर गहरा असर डालता है, जबकि 10 दिन तक नींद न लेने से स्थायी नुकसान हो सकता है।
इसलिए नींद को हल्के में लेना भूलभुलैया में खो जाने जैसा है। सही समय पर और पर्याप्त नींद ही शरीर और मन को स्वस्थ रखने की गारंटी है।
डॉ विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, मलोट, पंजाब

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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