August 28, 2026 10:41 am

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प्रदेश में पेयजल बनता जा रहा है जहर, जनता दूषित पानी पीने को मजबूर: कुमारी सैलजा

-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मिली रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में टीडीएस, फ्लोराइड व नाइट्रेट मानकों से अधिक

-कड़ाके की सर्दी में भी नहीं मिल रहा शुद्ध पानी

चंडीगढ़, 12 जनवरी। सिरसा की सांसद, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने प्रदेश में लगातार प्रदूषित होते पेयजल पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मिली रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के अनेक जिलों, कस्बों और कॉलोनियों में लोग कड़ाके की सर्दी के बावजूद शुद्ध पेयजल से वंचित हैं और मजबूरी में दूषित पानी पीने को विवश हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि कई क्षेत्रों में पानी में टीडीएस, फ्लोराइड, नाइट्रेट और अन्य हानिकारक रासायनिक तत्व तय मानकों से कहीं अधिक पाए जा रहे हैं। अनेक स्थानों पर 600 से 1300 तक टीडीएस वाला पानी सप्लाई किया जा रहा है, जो आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। सार्वजनिक स्थानों, जलघरों और रिहायशी इलाकों में भी पानी पीने योग्य नहीं है, लेकिन संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपनी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।

सांसद ने सिरसा जिले के घग्घर क्षेत्र के गांवों में दूषित पानी की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि घग्घर के किनारे वाले गांवों में भूमिगत पानी भी पीने योग्य नहीं है। घग्घर में कैमिकल युक्त पानी बह रहा है जिससे भूमिगत पानी भी दूषित हो गया है। यह पानी कैंसर का कारण भी बन रहा है। घग्घर में बह रहे कैमिकलयुक्त पानी की समस्या को उन्होंने कई बार उठाया है, लेकिन सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि दूषित पेयजल के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में पेट, हड्डियों, किडनी और त्वचा से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। फ्लोराइड और नाइट्रेट युक्त पानी लंबे समय में गंभीर और स्थायी बीमारियों का कारण बनता है। इसके बावजूद सरकार ने न तो प्रभावी जल शुद्धिकरण की स्थायी व्यवस्था की और न ही प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक स्वच्छ जल आपूर्ति सुनिश्चित की। कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में वर्षों से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हालात आज भी जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी लोग टैंकरों और निजी साधनों से पानी लेने को मजबूर हैं, जिससे आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यह सरकार और प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रदेश के सभी प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाए, जलघरों, ट्यूबवेलों और सार्वजनिक जल स्रोतों की नियमित जांच कराई जाए तथा जहां पानी मानकों पर खरा नहीं उतरता वहां तुरंत वैकल्पिक स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही इस गंभीर समस्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि प्रदेश की जनता को उसका मौलिक अधिकार-स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल-मिल सके।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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