May 4, 2026 6:16 pm

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हरियाणा में वंचित अनुसूचित जाति (डीएससी) के लिए शहरी निकाय वार्डों में अलग आरक्षण की मांग तेज

प्रदेश सरकार और भाजपा नेतृत्व को एडवोकेट हेमंत कुमार ने लिखा पत्र

सरकारी शिक्षण संस्थानों व नौकरियों में डीएससी को आरक्षण, लेकिन नगर निकायों में अब तक लंबित

चंडीगढ़। हरियाणा में वंचित अनुसूचित जाति (डीएससी) वर्ग के लिए शहरी निकायों के वार्डों में अलग से आरक्षण देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं कानूनी विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने इस मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सार्वजनिक अपील की है।
हेमंत कुमार ने कहा है कि जब प्रदेश सरकार ने पहले सरकारी शैक्षणिक संस्थानों और फिर सरकारी नौकरियों में डीएससी वर्ग को अलग से आरक्षण देने का प्रावधान किया है, तो म्युनिसिपल और पंचायती राज संस्थाओं में भी डीएससी वर्ग को राजनीतिक आरक्षण मिलना चाहिए।

मार्च-अप्रैल में होने हैं शहरी निकाय चुनाव
गौरतलब है कि मार्च-अप्रैल में हरियाणा की तीन नगर निगमों—अंबाला, पंचकूला और सोनीपत—रेवाड़ी नगर परिषद तथा तीन नगरपालिका समितियों—उकलाना (हिसार), सांपला (रोहतक) और धारूहेड़ा (रेवाड़ी) के आम चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही कुछ शहरी निकायों में रिक्त वार्डों पर उपचुनाव भी होने हैं।
इन सभी सात नगर निकायों के लिए परिसीमन, वार्डबंदी और अनुसूचित जाति (एससी), एससी (महिला), पिछड़ा वर्ग (बीसी-ए/बी), बीसी (महिला) और महिला (ओपन) वर्ग के लिए आरक्षण से जुड़ी चुनाव-पूर्व प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 22 जनवरी को हुए ड्रा में अंबाला नगर निगम में मेयर पद बीसी-बी (महिला), रेवाड़ी नगर परिषद में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति और उकलाना नगरपालिका समिति में प्रधान पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित तय किया गया।

बीसी-ए और बीसी-बी की तरह डीएससी को भी मिले अलग आरक्षण
एडवोकेट हेमंत कुमार ने अपने पत्र में कहा कि वर्ष 2023 में हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 और हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में संशोधन कर पिछड़ा वर्ग (बीसी-ए) को अलग से आरक्षण दिया गया। इसके बाद 2024 में पुनः संशोधन कर बीसी-बी वर्ग को भी अलग आरक्षण का प्रावधान किया गया। इसी तर्ज पर अब अनुसूचित जाति वर्ग के भीतर भी वर्गीकरण कर वंचित अनुसूचित जाति (डीएससी) और अन्य अनुसूचित जाति (ओएससी) के लिए अलग-अलग आरक्षण किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में विधानसभा द्वारा पारित हरियाणा नगर निकाय कानून, 2025—जो शीघ्र लागू होकर पुराने कानूनों का स्थान लेगा—में इस संबंध में उपयुक्त संशोधन किया जा सकता है।

शिक्षा और नौकरियों में पहले से लागू है डीएससी आरक्षण
हेमंत कुमार ने बताया कि मार्च 2020 में हरियाणा अनुसूचित जाति (सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण) अधिनियम, 2020 पारित हुआ था, जिसके तहत एससी वर्ग के कुल 20 प्रतिशत आरक्षण में से 50 प्रतिशत डीएससी वर्ग के लिए निर्धारित किया गया। इसी तरह नवंबर 2024 में जारी सरकारी सर्कुलर के अनुसार हरियाणा सरकार की नौकरियों में भी एससी आरक्षण का आधा हिस्सा डीएससी वर्ग के लिए सुनिश्चित किया गया है।
अब एससी जाति प्रमाण पत्रों में भी स्पष्ट रूप से डीएससी और ओएससी का उल्लेख किया जा रहा है। हाल ही में जारी हरियाणा पुलिस कांस्टेबल भर्ती विज्ञापन में भी डीएससी और ओएससी के लिए अलग-अलग आरक्षण प्रावधान लागू है।
अध्यादेश लाकर तत्काल किया जा सकता है प्रावधान
एडवोकेट हेमंत कुमार ने मांग की है कि आगामी शहरी निकाय चुनावों से पहले डीएससी वर्ग के लिए वार्ड स्तर पर अलग आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए राज्यपाल से अध्यादेश जारी कर मौजूदा हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973, हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 और नए हरियाणा नगर निकाय कानून, 2025 में आवश्यक प्रावधान किए जा सकते हैं, जिन्हें बाद में विधानसभा के बजट सत्र में विधेयक के रूप में पारित कराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब सरकार शिक्षा और नौकरियों में डीएससी वर्ग को उनका हक दे सकती है, तो स्थानीय निकायों में भी उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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