August 28, 2026 10:22 am

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कड़ी सुरक्षा के बीच कश्मीर में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह, बख्शी स्टेडियम में हुआ मुख्य आयोजन

श्रीनगर: कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जम्मू-कश्मीर में 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। मुख्य समारोह श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में आयोजित हुआ, जबकि प्रदेश के अन्य कस्बों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी कार्यक्रम हुए।
मुख्य समारोह में उप मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और मार्च-पास्ट की सलामी ली। गणतंत्र दिवस के मद्देनज़र बख्शी स्टेडियम और उसके आसपास मल्टी-टियर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ आने-जाने वाले सभी रास्तों पर कड़ी निगरानी रखी गई।
प्रशासन की ओर से आम लोगों के लिए समारोह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। अपने संबोधन में डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर के लोगों को लंबे समय तक दर्द और जख्म दिए हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि उनके बलिदान और मजबूत इरादों के चलते आतंकवाद के बावजूद कश्मीर में शांति कायम है।
उन्होंने कहा,
“पाकिस्तान ने बार-बार जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने और विकास व पर्यटन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने उसके हर नापाक मंसूबे को नाकाम किया।”
डिप्टी सीएम ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली चुनी हुई सरकार के शपथ लेने के बाद शुरू किए गए विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी और देशभर के लोगों से कश्मीर आने की अपील की। यह अपील पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पर्यटकों की संख्या में आई कमी के मद्देनज़र की गई। उल्लेखनीय है कि पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए हमले में 25 बाहरी पर्यटकों और एक स्थानीय ऑपरेटर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
समारोह से पहले सुरिंदर चौधरी ने लाल चौक स्थित प्रताप पार्क में बने बलिदान स्तंभ पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इस बलिदान स्तंभ का शिलान्यास केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 24 जून 2023 को किया था।
पत्रकारों से बातचीत में डिप्टी सीएम ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा,
“उमर अब्दुल्ला की सरकार को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद और सुप्रीम कोर्ट में किए गए अपने वादे के अनुसार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करेंगे।”
उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला द्वारा देखे गए जम्मू-कश्मीर राज्य के स्वरूप को फिर से बहाल किया जाना चाहिए।
प्रदेश के सभी कस्बों, नगरपालिकाओं, सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, राजस्व कार्यालयों, ब्लॉकों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किए गए, जहां संबंधित संस्थानों के प्रमुखों ने ध्वजारोहण किया।
इस बीच, श्रीनगर के लाल चौक पर भी कुछ बाहरी लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, जहां एक बैंड द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर आमंत्रित अतिथियों में शामिल रहीं।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि गणतंत्र दिवस सिर्फ परेड और भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“15 अगस्त 1947 ने हमें आज़ादी दी, लेकिन 26 जनवरी 1950 ने हमें उस आज़ादी को सम्मान के साथ जीने का संवैधानिक अधिकार दिया—जिसमें बोलने और धर्म की आज़ादी, और सबसे बढ़कर वोट देने की ताकत शामिल है। हमारे संविधान ने इन मूल्यों की रक्षा के लिए मजबूत संस्थाएं बनाई थीं, लेकिन आज इनमें से कई संस्थाओं का इस्तेमाल भारत के विचार को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।”

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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