October 11, 2026 8:00 am

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IDFC बैंक घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, चंडीगढ़-ट्राइसिटी में 14 ठिकानों पर छापे

ज्वेलर्स, कारोबारी फर्मों और बिचौलियों के ठिकानों पर तलाशी, कई अहम दस्तावेज कब्जे में लिए

करीब 650 करोड़ रुपये के सरकारी धन के कथित घोटाले की जांच तेज,

6 IAS अधिकारियों समेत तीन दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ सीबीआई दाखिल कर चुकी है आरोपपत्र

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 29 सितंबर। हरियाणा के सरकारी विभागों और चंडीगढ़ के क्रेस्ट से जुड़े करीब 650 करोड़ रुपये के कथित आईडीएफसी बैंक घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। ईडी की अलग-अलग टीमों ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला सहित आसपास के क्षेत्रों में 14 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान कई ज्वेलरी कारोबारियों, व्यापारिक फर्मों और कथित बिचौलियों के परिसरों की तलाशी ली गई तथा जांच से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए।
यह कार्रवाई सरकारी विभागों के बैंक खातों से कथित तौर पर निकाली गई करोड़ों रुपये की रकम के लेनदेन, उसके विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरण और रकम के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने के लिए की गई है। जांच एजेंसी को संदेह है कि सरकारी धन को विभिन्न खातों और व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से कई चरणों में स्थानांतरित कर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ ज्वेलरी कारोबारियों और अन्य व्यावसायिक संस्थाओं के बैंक खातों का कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

छह ज्वेलरी फर्मों और बिचौलिये के ठिकानों पर कार्रवाई

ईडी की मंगलवार को हुई कार्रवाई के दायरे में चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में संचालित कई ज्वेलरी कारोबारियों और फर्मों के नाम सामने आए हैं। इनमें मलिक ज्वेलर्स, केएलजी ज्वेल्स, एमबी गोल्ड ट्रेडर्स, शाम ज्वेलर्स और सुंदर ज्वेलर्स सहित अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा कथित बिचौलिये गौरव कंसल के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।
जांच एजेंसी इन फर्मों के बैंक खातों, कारोबारी लेनदेन, वित्तीय अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि सरकारी खातों से निकाली गई कथित गबन की रकम इन कारोबारियों तक किस माध्यम से पहुंची और उसके बाद उसे किन-किन खातों में स्थानांतरित किया गया।
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि कथित तौर पर सरकारी धन को ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लेनदेन के रूप में दर्शाकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित कारोबारी प्रतिष्ठानों ने वास्तव में सोने-चांदी या अन्य वस्तुओं का कारोबार किया था अथवा उनके खातों का इस्तेमाल केवल धन के हस्तांतरण के लिए किया गया।
हालांकि, छापेमारी के बाद ईडी की ओर से अभी तक सभी परिसरों से बरामद दस्तावेजों, अन्य सामग्री या कार्रवाई के विस्तृत निष्कर्षों का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया गया है। ऐसे में जांच के दौरान सामने आए आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आगे की जांच से होनी बाकी है।

आठ हरियाणा विभागों और क्रेस्ट के खातों से जुड़ा मामला

आईडीएफसी बैंक घोटाले का मामला हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों और चंडीगढ़ के अधीन आने वाले क्रेस्ट (चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी) से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरियाणा के आठ सरकारी विभागों और चंडीगढ़ के क्रेस्ट के बैंक खातों में वित्तीय अनियमितताओं का पता चला था। इस मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित कुछ सरकारी खातों से संबंधित लेनदेन जांच के दायरे में हैं।
शुरुआती जांच में हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के बैंक खातों में कथित गड़बड़ियों का मामला सामने आया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और अन्य सरकारी विभागों के खातों में हुए लेनदेन की भी पड़ताल शुरू की गई। सरकारी धन के कथित गबन और उसके विभिन्न माध्यमों से हस्तांतरण के इस मामले में घोटाले की कुल रकम करीब 650 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जांच एजेंसियों का ध्यान इस बात पर भी है कि सरकारी खातों में जमा धनराशि को किस प्रक्रिया के तहत निकाला गया, संबंधित लेनदेन को किसने अधिकृत किया और बैंक खातों के संचालन में किन अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका रही।

बैंक खातों से निकली रकम को कई स्तरों पर किया गया स्थानांतरित
ईडी की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कथित धनशोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग है। एजेंसी को संदेह है कि सरकारी खातों से निकाली गई रकम को सीधे किसी एक खाते में रखने के बजाय विभिन्न व्यक्तियों, कंपनियों और कारोबारी संस्थाओं के बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजा गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस तरह के लेनदेन को वित्तीय जांच की भाषा में लेयरिंग कहा जाता है। इसमें कथित अवैध तरीके से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों, व्यावसायिक संस्थाओं और लेनदेन के माध्यम से घुमाया जाता है, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और उसके अंतिम लाभार्थी की पहचान करना मुश्किल हो जाए।
इस मामले में ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी फर्मों के बैंक खातों की जांच इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि एजेंसी को संदेह है कि कुछ लेनदेन को वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों के रूप में दर्शाया गया। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित फर्मों के खातों में आई रकम के बदले वास्तव में कोई वस्तु या सेवा उपलब्ध कराई गई थी या नहीं।
इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित तौर पर सरकारी धन को अलग-अलग खातों में भेजने के बाद उसका इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने, व्यावसायिक गतिविधियों में लगाने या अन्य वित्तीय लेनदेन के लिए तो नहीं किया गया।

आईएएस अधिकारियों तक रकम पहुंचने के आरोपों की भी जांच

इस घोटाले में हरियाणा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कथित गबन की रकम को विभिन्न कारोबारी संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित किए जाने और उसके बाद कुछ अधिकारियों तक पहुंचने के आरोप लगाए गए हैं।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले में पहले ही कई अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। हाल ही में हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों समेत आरोपियों के खिलाफ तीसरा आरोपपत्र दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में तीन दर्जन से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं।
सीबीआई की जांच में सरकारी खातों से हुए संदिग्ध लेनदेन, बैंकिंग प्रक्रिया, धनराशि के हस्तांतरण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की गई है। वहीं, ईडी की जांच मुख्य रूप से कथित अपराध से अर्जित धन की पहचान करने, उसके लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने और उससे बनाई गई संपत्तियों का पता लगाने पर केंद्रित है।
हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होना किसी आरोपी का दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

हरियाणा पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई जांच
ईडी की यह जांच हरियाणा पुलिस की फरवरी 2026 में दर्ज एफआईआर पर आधारित है। इस एफआईआर में विकास एवं पंचायत विभाग के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खातों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था।
प्रारंभिक जांच में सरकारी खातों में जमा धनराशि और बैंक खातों से किए गए लेनदेन के बीच कई विसंगतियां सामने आने के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ाया गया। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के तहत जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ने के साथ चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में कुछ ज्वेलरी कारोबारियों, निजी कंपनियों और कथित बिचौलियों के नाम भी सामने आए। जांच एजेंसियां अब इन कारोबारियों और संबंधित व्यक्तियों के वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को सरकारी खातों से निकाली गई रकम के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

211 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच

इस मामले में ईडी अब तक करीब 211 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच या जब्त कर चुकी है। संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई कथित अपराध से अर्जित धन की पहचान और उसे आगे हस्तांतरित या बेचे जाने से रोकने के उद्देश्य से की जाती है।

ईडी की जांच का एक प्रमुख उद्देश्य

कथित घोटाले से अर्जित धन और उससे बनाई गई संपत्तियों का पता लगाना है। इसके लिए बैंक खातों, वित्तीय अभिलेखों, संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित कारोबारी संस्थाओं के लेनदेन की जांच की जा रही है।
मंगलवार को चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में की गई छापेमारी को इसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है। एजेंसी की कार्रवाई से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित धनशोधन में किन व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका रही और सरकारी धन के अंतिम लाभार्थी कौन थे।

छापेमारी के बाद आगे की जांच पर नजर

ईडी की मंगलवार को हुई कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसी द्वारा कब्जे में लिए गए दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों की पड़ताल की जाएगी। संबंधित व्यक्तियों और कारोबारियों के बैंक खातों में हुए लेनदेन का मिलान सरकारी विभागों के खातों से किया जा सकता है। इसके आधार पर संदिग्ध लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने और जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ किए जाने की संभावना है।

फिलहाल ईडी ने 14 स्थानों पर की गई छापेमारी के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कार्रवाई के दौरान कितनी रकम या अन्य सामग्री बरामद हुई और कितने लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
करीब 650 करोड़ रुपये के इस कथित बैंक घोटाले में सीबीआई की जांच, आरोपपत्रों और ईडी की धनशोधन संबंधी कार्रवाई के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी खातों से निकली रकम के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना है। जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई से इस मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं, निजी कारोबारियों की भूमिका और अधिकारियों से जुड़े आरोपों के संबंध में और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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