नवाचार, बौद्धिक संपदा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और डीप-टेक स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 6 अक्टूबर 2026। पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के पीयू टेक इनोवेशन फोरम (पीयू-टीआईएफ) ने विश्वविद्यालय में इंडोवेशन सेंटर स्थापित करने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित केंद्र चंडीगढ़ सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, गहन प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
नई दिल्ली स्थित एआईसीटीई मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रोफेसर श्याम रथ और पंजाब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर यजवेंद्र पाल वर्मा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर योगेश सिंह और पीयू-टीआईएफ के निदेशक प्रोफेसर रोहित शर्मा भी मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने पहले, 4 सितंबर को भारत के उपराष्ट्रपति और पंजाब विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति सी.पी. राधाकृष्णन ने तकनीकी नवाचार मंच का उद्घाटन किया था। अब इंडोवेशन सेंटर की स्थापना के माध्यम से इस पहल को संस्थागत और क्षेत्रीय स्तर पर विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
उत्तर-पश्चिमी राज्यों के लिए बनेगा क्षेत्रीय केंद्र
पंजाब विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मीनाक्षी गोयल ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि प्रस्तावित इंडोवेशन सेंटर चंडीगढ़ में एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा और उत्तर-पश्चिमी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों तक अपनी पहुंच बनाएगा। केंद्र का उद्देश्य स्टार्टअप और नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उद्योग 4.0, साइबर सुरक्षा, डीप-टेक और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे उभरते क्षेत्रों में क्षमता निर्माण करना होगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र की स्थापना से क्षेत्र में भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही मजबूत बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तंत्र विकसित करने तथा नवोन्मेषी स्टार्टअप और तकनीक आधारित उद्यमों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
शोध को तकनीक और उत्पादों में बदलने पर जोर
इंडोवेशन सेंटर के माध्यम से जीवन विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें प्रौद्योगिकी विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और लाइसेंसिंग पर विशेष ध्यान रहेगा।
केंद्र छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं की बौद्धिक संपदा के विकास, संरक्षण और व्यावसायीकरण की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में तैयार होने वाले शोध परिणामों को उपयोगी तकनीक, उत्पादों और नए उद्यमों में परिवर्तित करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना है।
बौद्धिक संपदा और उद्यमिता को मिलेगा प्रोत्साहन
केंद्र के प्रमुख उद्देश्यों में बौद्धिक संपदा का सृजन, संरक्षण और व्यावसायीकरण शामिल है। इसके अलावा संस्थानों की नवाचार परिषदों के माध्यम से उद्यमिता विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इंडोवेशन सेंटर क्षेत्र के विभिन्न संस्थानों में प्रभावी बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रकोष्ठों के विकास में भी सहयोग करेगा। इससे शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों को अपने विचारों और शोध को सुरक्षित रखने तथा उन्हें व्यावसायिक रूप देने के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
शिक्षा जगत और उद्योग के बीच बढ़ेगा सहयोग
इस पहल के तहत नवाचार को बढ़ावा देने वाले विभिन्न संस्थानों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। शिक्षा जगत, उद्योग, स्टार्टअप, नवोन्मेषकों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की पहुंच और दृश्यता बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी विकास और शोध के व्यावसायीकरण के लिए नए अवसर तैयार होंगे।
एआईसीटीई और पंजाब विश्वविद्यालय के बीच हुआ यह समझौता दीर्घकालिक सहयोग का आधार तैयार करेगा। इसके माध्यम से क्षेत्र में नवाचार से जुड़ी पहलों के प्रसार, संस्थागत सहयोग और उनके प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।












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