October 11, 2026 3:40 pm

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वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ की दो पुस्तकों का विमोचन, दो प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित

लघुकविता कुंभ में साहित्यकारों की मौजूदगी में हुआ पुस्तकों का लोकार्पण, साहित्यिक योगदान के लिए मिला लघुकविता रत्न और लघुकविता श्रीमणि सम्मान-2026
बाबूगिरी न्यूज़
पंचकूला। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ की दो आलोचनात्मक पुस्तकों का लघुकविता कुंभ के अवसर पर भव्य विमोचन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में देश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों और विद्वानों की उपस्थिति में डॉ. नीरू मित्तल की पुस्तकों ‘डॉ. मधुकांत का काव्य साहित्य- समीक्षा सन्दर्भ’ तथा ‘समकालीन साहित्य आलोचना- एक दृष्टि’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ को साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दो प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया।
कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं शोध संस्थान, कुरुक्षेत्र तथा हरियाणा प्रादेशिक लघुकविता मंच, सिरसा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और लघुकविता के विकास को समर्पित इस आयोजन में साहित्यकारों ने पुस्तकों के माध्यम से साहित्यिक आलोचना को समृद्ध बनाने के प्रयासों की सराहना की।

प्रतिष्ठित साहित्यकारों की मौजूदगी में पुस्तकों का विमोचन
डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ की पुस्तकों का विमोचन डॉ. मधुकांत, अध्यक्ष, प्रज्ञा साहित्यिक मंच, रोहतक; प्रोफेसर बाबूराम, हिंदी विभागाध्यक्ष, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय; डॉ. अंजना गर्ग, पूर्व अध्यक्ष, लोक प्रशासन विभाग, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक; प्रो. रूप देवगुण, डॉ. जय भगवान सिंगला और प्रेम विज सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों की उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर साहित्यकारों ने डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ की साहित्यिक साधना और आलोचनात्मक लेखन की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य के मूल्यांकन, विश्लेषण और समकालीन रचनात्मक प्रवृत्तियों को समझने में आलोचनात्मक पुस्तकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस प्रकार का लेखन साहित्यकारों की रचनाओं को नए दृष्टिकोण से समझने तथा साहित्यिक विमर्श को आगे बढ़ाने में सहायक होता है।
डॉ. नीरू मित्तल की दोनों पुस्तकों के शीर्षक भी साहित्यिक आलोचना के दो महत्वपूर्ण पक्षों को सामने रखते हैं। पहली पुस्तक डॉ. मधुकांत के काव्य साहित्य के समीक्षा संदर्भों पर केंद्रित है, जबकि दूसरी पुस्तक समकालीन साहित्यिक आलोचना की दृष्टि को प्रस्तुत करती है। इन पुस्तकों के विमोचन को डॉ. नीरू मित्तल की साहित्यिक यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

दो प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजी गईं डॉ. नीरू मित्तल
कार्यक्रम के दौरान डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ को साहित्यिक योगदान के लिए दो महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित किया गया।
हरियाणा प्रादेशिक लघुकविता मंच, सिरसा की ओर से उन्हें लघुकविता के विकास, संवर्धन और सृजन में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ‘लघुकविता रत्न सम्मान-2026’ प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त, हरियाणा प्रादेशिक लघुकविता मंच, फरीदाबाद की ओर से उनके लघुकविता संकलन ‘जज़्बातों की मोमबत्तियाँ’ के भव्य लोकार्पण के अवसर पर उन्हें ‘लघुकविता श्रीमणि सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।
दोनों सम्मानों से सम्मानित होना डॉ. नीरू मित्तल की साहित्य के प्रति निरंतर सक्रियता, रचनात्मक प्रतिबद्धता और लघुकविता के क्षेत्र में उनके योगदान को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। साहित्यकारों ने उनके लेखन और साहित्यिक गतिविधियों को साहित्य जगत के लिए प्रेरणादायक बताया।

बीस पुस्तकें प्रकाशित, तीन भाषाओं में हुआ अनुवाद
डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ की साहित्यिक उपलब्धियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक उनकी बीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी पुस्तकों का मराठी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है। इससे उनकी साहित्यिक रचनाओं को हिंदी भाषी पाठकों से आगे अन्य भाषाओं के पाठकों तक पहुंचने का अवसर मिला है।
उनके साहित्य की अकादमिक स्तर पर भी चर्चा हो रही है। बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में उनके साहित्य पर पीएचडी के लिए शोध कार्य जारी है। यह उपलब्धि उनके लेखन की साहित्यिक महत्ता और अध्ययन की संभावनाओं को रेखांकित करती है।

साहित्यिक आलोचना और लघुकविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ की साहित्यिक यात्रा लेखन, समीक्षा और साहित्यिक विमर्श के विभिन्न पक्षों से जुड़ी रही है। उनकी आलोचनात्मक पुस्तकों का विमोचन और लघुकविता के क्षेत्र में योगदान के लिए मिले दोनों सम्मान उनकी बहुआयामी साहित्यिक सक्रियता को दर्शाते हैं।

लघुकविता कुंभ जैसे आयोजनों का उद्देश्य साहित्यकारों को साझा मंच प्रदान करना, साहित्यिक विचारों का आदान-प्रदान करना तथा नई रचनात्मक संभावनाओं को प्रोत्साहित करना है। इस आयोजन में डॉ. नीरू मित्तल की पुस्तकों का विमोचन और सम्मान समारोह साहित्यिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।
डॉ. नीरू मित्तल ‘नीर’ की दो पुस्तकों का विमोचन और दो प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित होना उनकी साहित्यिक उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने के समान है। उनकी पुस्तकों के विभिन्न भाषाओं में अनुवाद और उनके साहित्य पर चल रहा शोध कार्य उनके लेखन की व्यापकता और अकादमिक महत्व को भी सामने लाता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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