August 28, 2026 10:15 am

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चरित्र और निर्णय तय करते हैं जीवन की दिशा : CJI सूर्य कांत

शिक्षा का सही उपयोग ही सच्ची सफलता, युवाओं से समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह आयोजित, 50 विद्यार्थियों को पदक और 1462 को डिग्रियां प्रदान
चंडीगढ़/महेंद्रगढ़। सूर्य कांत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन की वास्तविक दिशा केवल डिग्री या ज्ञान से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, मूल्यों और सही समय पर लिए गए निर्णयों से तय होती है। शिक्षा व्यक्ति को अवसर प्रदान करती है, लेकिन उसका सही उपयोग ही उसे सच्ची सफलता की ओर ले जाता है।
मुख्य न्यायाधीश शनिवार को Central University of Haryana, महेंद्रगढ़ में आयोजित 12वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। इस भव्य समारोह में विश्वविद्यालय के 1462 विद्यार्थियों को डिग्रियां और 50 प्रतिभाशाली छात्रों को पदक प्रदान किए गए।
समारोह में शील नागू और राजीव आहूजा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा संजय वशिष्ठ, एन. एस. शेखावत, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल चंद्र शेखर, नारनौल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा, महेंद्रगढ़ के उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार और पुलिस अधीक्षक पूजा वशिष्ठ सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
डिग्री ज्ञान का प्रमाण, लेकिन चरित्र जीवन की दिशा तय करता है
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री उस ज्ञान का प्रमाण है जिसे छात्र वर्षों की मेहनत से अर्जित करते हैं, लेकिन जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करते समय व्यक्ति के नैतिक मूल्य, चरित्र और निर्णय क्षमता ही उसके सबसे बड़े मार्गदर्शक बनते हैं।
उन्होंने कहा कि जब औपचारिक शिक्षा का ढांचा समाप्त हो जाता है, तब व्यक्ति का विवेक ही उसे सही और गलत के बीच अंतर समझने में मदद करता है। इसलिए विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, जिम्मेदारी और सामाजिक संवेदनशीलता को भी विकसित करना चाहिए।

शिक्षा के साथ समाज के प्रति भी जिम्मेदारी
सीजेआई ने कहा कि उच्च शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं है, बल्कि इसके साथ समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का निर्माण, प्रयोगशालाओं का संचालन और शिक्षकों का वेतन जनता के कर से प्राप्त संसाधनों से संभव होता है।
देश में ऐसे लाखों लोग हैं जो स्वयं विश्वविद्यालय तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन उनके कर से ही उच्च शिक्षा व्यवस्था संचालित होती है। इसलिए शिक्षित युवाओं का दायित्व है कि वे समाज को मजबूत बनाने में योगदान दें और न्यायपालिका, सिविल सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय प्रशासन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कबड्डी के उदाहरण से दिया जीवन का संदेश
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने हरियाणा के लोकप्रिय खेल कबड्डी का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कबड्डी में रेडर एक ही सांस में विरोधी पाले में जाता है और “कबड्डी-कबड्डी” का उच्चारण करते हुए अपनी सीमाओं के भीतर खेलता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल खेल का नियम नहीं बल्कि अनुशासन, आत्मनियंत्रण और संतुलन का प्रतीक है। जीवन में भी व्यक्ति को बड़े लक्ष्य रखने चाहिए, लेकिन साथ ही यह समझना जरूरी है कि उसकी सीमाएं क्या हैं और कब सही समय पर निर्णय लेकर वापस लौटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महान खिलाड़ी वही होते हैं जो टीमवर्क, अनुशासन और संयम के साथ खेलते हैं, और यही सिद्धांत जीवन में भी सफलता दिलाते हैं।
युवाओं को स्टार्ट-अप और नवाचार की ओर बढ़ने का आह्वान
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद राजीव आहूजा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जिसे विद्यार्थी जीवनभर याद रखते हैं।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे केवल नौकरी तलाशने वाले न बनें, बल्कि स्टार्ट-अप शुरू करके रोजगार देने वाले बनें। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई तकनीकों को अपनाने और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शोध और नवाचार ही देश के विकास की कुंजी हैं और भारत को एक शोध-प्रधान राष्ट्र बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर कुलपति ने रखी रिपोर्ट
विश्वविद्यालय के कुलपति टंकेश्वर कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव का क्षण है कि देश के मुख्य न्यायाधीश जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व विद्यार्थियों के बीच उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति सूर्य कांत का जीवन संघर्ष, मेहनत और ईमानदारी का प्रेरक उदाहरण है।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में लगातार सुधार हुआ है। वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर 44वां स्थान मिला है, जबकि हरियाणा के विश्वविद्यालयों में इसे प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा 3000 से अधिक शोध पत्र स्कोपस और वेब ऑफ साइंस डेटाबेस में प्रकाशित किए गए हैं और संस्थान का एच-इंडेक्स 82 है। वर्ष 2025 में ही विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने 622 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए, जो एक नया रिकॉर्ड है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नए पाठ्यक्रम
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप अपने सभी पाठ्यक्रमों को अपडेट किया है। इसमें अंतरविषयक अध्ययन, कौशल आधारित शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, एसडीजी मैपिंग और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय के 8 संकाय, 35 विभाग और 90 से अधिक पाठ्यक्रमों में 5000 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में नए विभाग और पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है और अगले पांच वर्षों में छात्रों की संख्या 10 हजार से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है।

समारोह में विद्यार्थियों को दी बधाई
कुलपति ने दीक्षांत समारोह में पदक और डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनसे जीवनभर सीखते रहने और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। समारोह का संचालन छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रेनु यादव और उप छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. नीरज कर्ण सिंह ने किया।
समारोह में विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन शर्मा, एडीसी तरुण पावरिया, सभी डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक और जिला प्रशासन के अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Abhishek Goyat
Author: Abhishek Goyat

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