पुणे: 1974 में दर्ज चोरी के मामले में अदालत ने 51 साल बाद राजाराम तुकाराम काले को बरी कर दिया है। इस मामले में तीन आरोपियों पर कलाई घड़ी, 4 रुपये और एक रूमाल चोरी करने का आरोप था।
क्या था मामला: पुणे के बंडगार्डन पुलिस थाने में यह केस दर्ज हुआ था। गुलाब शाहू जाधव और मुकुंद केरबा वाघमारे 1975 में दोषी ठहराए गए थे, जबकि राजाराम काले लंबे समय तक फरार रहे।
अदालत का फैसला: पुणे के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट एनजे चव्हाण ने 26 दिसंबर 2025 को सभी वारंट रद्द करते हुए राजाराम काले को बरी कर दिया। अदालत ने यह फैसला सबूतों की कमी और गवाहों के न आने के आधार पर सुनाया।
कैसे हुआ खुलासा: जस्टिस चव्हाण ने पुराने पेंडिंग मामलों की समीक्षा शुरू की, इसी दौरान यह केस सामने आया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन कोई अदालत में पेश नहीं हुआ। परिणामस्वरूप, 50 साल से अधिक फरारी रहने के बावजूद आरोपी को न्यायालय ने मुक्त कर दिया।













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