September 17, 2026 11:16 pm

September 17, 2026 11:16 pm

HARYANA: सरसों खरीद में भारी अव्यवस्था: 90% मंडियों में खरीद ठप, किसानों को मजबूरी में MSP से कम दाम—AAP का सरकार पर तीखा हमला

बाबूगिरी ब्यूरो

चंडीगढ़, 29 मार्च 2026। हरियाणा की मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद के पहले ही दिन अव्यवस्था और लापरवाही के आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “सरसों खरीद का ऐतिहासिक फेलियर” करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नायब सिंह सैनी सरकार किसानों को राहत देने में पूरी तरह नाकाम रही है।
ढांडा ने जारी बयान में कहा कि राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक मंडियों में पहले ही दिन सरकारी खरीद पूरी तरह ठप रही। हजारों किसान सुबह 5 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक अपनी फसल लेकर मंडियों में लाइन में खड़े रहे, लेकिन खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। उन्होंने दावा किया कि प्रदेशभर में करीब 1.2 लाख क्विंटल सरसों की आवक होने के बावजूद सरकारी एजेंसियां 5 प्रतिशत तक खरीद भी नहीं कर पाईं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने खुद 13 लाख मीट्रिक टन सरसों खरीदने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन पहले ही दिन की स्थिति से साफ है कि न तो तैयारी पूरी थी और न ही खरीद को लेकर गंभीरता दिखाई गई। जींद, हिसार, फतेहाबाद, रेवाड़ी और रोहतक सहित कई जिलों में किसानों को घंटों धूप में इंतजार करना पड़ा, जबकि कई जगह किसान बिना फसल बेचे ही वापस लौटने को मजबूर हुए।
ई-खरीद पोर्टल को लेकर भी AAP ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ढांडा के मुताबिक पोर्टल पूरी तरह ध्वस्त रहा—सर्वर क्रैश, डेटा वेरिफिकेशन में गड़बड़ी और सिस्टम अपडेट न होने के कारण हजारों किसानों को गेट पास नहीं मिल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 5000 किसानों को “रिकॉर्ड मैच नहीं” का हवाला देकर वापस भेज दिया गया। “जब खरीद की तारीख पहले से तय थी, तो आईटी सिस्टम तैयार क्यों नहीं था? यह डिजिटल इंडिया नहीं, बल्कि किसानों के साथ डिजिटल धोखा है,” उन्होंने कहा।
मंडियों की व्यवस्थाओं पर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार, कई मंडियों में न बारदाना उपलब्ध था, न तुलाई के कांटे और न ही पर्याप्त मजदूर मौजूद थे। पीने के पानी, शौचालय और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव रहा, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
AAP नेता ने MSP को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 6200 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने के बावजूद किसान 5300 से 5800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच अपनी सरसों निजी व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल MSP का दिखावा कर रही है, जबकि असल में निजी खरीद को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो सरकारी मंडियों को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है।
ढांडा ने कहा कि सरकार घोषणाओं में आगे है, लेकिन जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। किसानों से बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन जब फसल बेचने का समय आया तो व्यवस्थाएं धराशायी हो गईं।
उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में गेहूं की फसल भी मंडियों में पहुंचने लगेगी। यदि सरकार ने तुरंत व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया तो हालात और गंभीर हो जाएंगे और लाखों किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अंत में उन्होंने मांग की कि ई-खरीद पोर्टल को तत्काल दुरुस्त किया जाए, मंडियों में बारदाना, मजदूर और अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं तथा किसानों की फसल की समय पर खरीद की गारंटी दी जाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी किसानों के हक की लड़ाई हर मंच पर मजबूती से उठाती रहेगी और सरकार की नीतियों को जनता के सामने उजागर करती रहेगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

4 1 5 1 6 9
Total Users : 415169
Total views : 665867

शहर चुनें