विवादित टिप्पणी पर गरमाई हरियाणा की सियासत, 7 दिन में माफी की मांग; नहीं तो सुप्रीम कोर्ट तक जाने की चेतावनी
बाबूगिरी ब्यूरो
पंचकूला, 25 अप्रेल। हरियाणा की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। पंचकूला से विधायक चौधरी चंद्रमोहन और भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा के बीच जुबानी जंग ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। हाल ही में दिए गए एक बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा का एक बयान सार्वजनिक हुआ, जिसमें उन्होंने कुछ नेताओं पर “बदमाशी करके चुनाव जीतने” का आरोप लगाया। इस दौरान उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल और वर्तमान विधायक चंद्रमोहन का नाम लेते हुए इशारा किया। उनके इस बयान को विपक्षी नेताओं ने अपमानजनक और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया, जिसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया।
इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक चंद्रमोहन ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “अगर कोई सूर्य देव की तरफ देखकर थूकता है, तो थूक उसी के मुंह पर गिरता है। जिसको जितनी अक्ल होती है, वह उतनी ही बात करता है।” उनके इस बयान को भी राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा मिल रही है और इसे सीधे तौर पर सांसद रेखा शर्मा पर निशाना माना जा रहा है।
विवाद के बढ़ने के बीच चंद्रमोहन ने कानूनी कदम उठाते हुए सांसद रेखा शर्मा को लीगल नोटिस भेजने की बात कही है। उन्होंने मांग की है कि 7 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर माफी नहीं मांगी गई, तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद हरियाणा की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर विपक्ष इस बयान को लेकर भाजपा पर निशाना साध रहा है, वहीं भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में अक्सर देखने को मिलते हैं, लेकिन जब मामला व्यक्तिगत आरोपों और कानूनी नोटिस तक पहुंच जाता है, तो इसका असर व्यापक राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सांसद रेखा शर्मा इस नोटिस का जवाब देते हुए माफी मांगती हैं या फिर यह विवाद कानूनी लड़ाई में तब्दील होकर उच्चतम न्यायालय तक पहुंचता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा हरियाणा की राजनीति की दिशा और दशा को प्रभावित कर सकता है।











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