June 21, 2026 5:56 pm

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CHANDIGARH NEWS: चंडीगढ़ के सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार और भर्ती घोटाले कि शिकायत पहुंची MHA व सहकारी मंत्रालय दिल्ली दरबार

विभाग में विभाग पर भ्रष्टाचार और भर्ती घोटाला के गंभीर आरोप!

एमएचए व केंद्रीय सहकारी मंत्रालय में अमित शाह के  दिल्ली दरबार मे पहुंचा मामला

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को भेजा विस्तृत प्रतिनिधित्व, सीबीआई-ईडी जांच और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

एनओसी मामले में विजिलेंस या सीबीआई के जांच की मांग

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 15 जून। चंडीगढ़ सहकारिता विभाग पर भ्रष्टाचार और भर्ती घोटालों के गंभीर आरोप का मामला चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा सुनवाई नही करने पर एमएचए व केंद्रीय सहकारी मंत्रालय में अमित शाह के  दिल्ली दरबार मे पहुंच गया है। प्रशासन पर शिकायतों के बाद भी मामला दबाए जाने का आरोप है।
चंडीगढ़ प्रशासन के सहकारिता विभाग (Registrar Cooperative Societies) में कथित भ्रष्टाचार, अवैध भर्तियों, बैंकिंग अनियमितताओं और हाउसिंग सोसायटियों के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोपों ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। इन आरोपों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिकायतकर्ता नवजोत लेहल ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत वैधानिक प्रतिनिधित्व (Statutory Representation) भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रतिनिधित्व में आरोप लगाया गया है कि सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली में वर्षों से चली आ रही पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया है, जिसके चलते विभाग में कथित भ्रष्टाचार का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो गया है। शिकायतकर्ता ने कई अधिकारियों के खिलाफ जांच, स्थानांतरण और विभागीय कार्रवाई की मांग करते हुए मामले को राष्ट्रीय स्तर का सार्वजनिक हित का विषय बताया है।

आरसीएस कार्यालय में प्रशासनिक नियंत्रण के दुरुपयोग का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि पहले चंडीगढ़ में रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटी (RCS) का अतिरिक्त कार्यभार उपायुक्त (DC) के पास होता था, जिससे विभागीय कार्यों पर वरिष्ठ स्तर की निगरानी बनी रहती थी। लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी एडीसी-कम-आरसीएस को सौंपे जाने के बाद विभाग में नियंत्रण और जवाबदेही कमजोर पड़ गई।
प्रतिनिधित्व में आरोप लगाया गया है कि इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने संपत्ति मामलों, एनओसी जारी करने और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को बढ़ावा दिया। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इससे सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है और आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।

एनओसी रैकेट’ चलाने का आरोप, संपत्ति मामलों में कथित भ्रष्टाचार

प्रतिनिधित्व में आरोप लगाया गया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा संपत्ति हस्तांतरण और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की जा रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि विवादित और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर भी एनओसी जारी की गईं तथा इसके लिए कथित रूप से संपत्ति कारोबारियों और विभागीय कर्मचारियों के बीच गठजोड़ काम कर रहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पूर्व अधिकारियों द्वारा जिन कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, उन्हें बाद में फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी गईं, जिससे कथित भ्रष्टाचार का नेटवर्क और मजबूत हो गया।

इंस्पेक्टर ग्रेड-2 भर्ती घोटाले का आरोप

प्रतिनिधित्व का सबसे गंभीर हिस्सा वर्ष 2021 से 2023 के बीच हुई इंस्पेक्टर ग्रेड-2 की भर्ती से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिन आठ पदों पर नियुक्तियां की गईं, वे लंबे समय तक खाली रहने के कारण वित्त मंत्रालय के नियमों के अनुसार स्वतः समाप्त माने जाते थे।
इसके बावजूद कथित रूप से बिना आवश्यक स्वीकृतियों के इन पदों पर भर्ती कर दी गई। शिकायत में कहा गया है कि यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों की अवहेलना का उदाहरण है। शिकायतकर्ता ने इन नियुक्तियों को निरस्त करने और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

विजिलेंस जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप

प्रतिनिधित्व में दावा किया गया है कि भर्ती घोटाले की जांच विजिलेंस विभाग द्वारा की जा रही है, लेकिन महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने में कथित रूप से सहयोग नहीं किया जा रहा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे जांच प्रभावित हो रही है और दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

वरिष्ठ ऑडिटर की नियुक्ति पर भी उठे सवाल

शिकायत में वरिष्ठ ऑडिटर की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान आयु सीमा से संबंधित नियमों में कथित रूप से बदलाव किया गया, जिससे एक विशेष उम्मीदवार को लाभ पहुंचाया जा सके।
शिकायतकर्ता ने इसे पद के दुरुपयोग और प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन का मामला बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।

सरकारी आवास के आवंटन और नवीनीकरण में अनियमितताओं का आरोप

प्रतिनिधित्व में आरोप लगाया गया है कि एक अधिकारी को नियमों से हटकर सरकारी आवास आवंटित किया गया तथा बाद में उसके नवीनीकरण और निर्माण कार्यों पर सरकारी धन का अनुचित उपयोग किया गया।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की वित्तीय जांच कराने तथा खर्च की गई राशि की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के संचालन पर सवाल

प्रतिनिधित्व में चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (CSCB) की कार्यप्रणाली और निदेशक मंडल के गठन पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैंक के कुछ पदाधिकारी अन्य सहकारी संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं, जो आरबीआई और नाबार्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है। शिकायत में कहा गया है कि ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित चुनावों और नियुक्तियों की वैधता की समीक्षा की जानी चाहिए।

जमाकर्ताओं के धन के दुरुपयोग का आरोप

प्रतिनिधित्व में बैंक से जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बैंक के संचालन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, जिससे जमाकर्ताओं के हित प्रभावित हुए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि इन मामलों की जांच पहले से विभिन्न विजिलेंस जांचों के दायरे में है और इन्हें केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाना चाहिए।

7,800 फ्लैटों के रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की मांग

शिकायत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सेक्टर-48, 49, 50 और 51 की 114 हाउस बिल्डिंग कोऑपरेटिव सोसायटियों से संबंधित है, जिनमें लगभग 7,800 फ्लैट शामिल हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संपत्तियों के स्वामित्व परिवर्तन का पूरा इतिहास रिकॉर्ड में सुरक्षित नहीं रखा जा रहा। इससे स्टांप ड्यूटी और अन्य सरकारी राजस्व की वसूली प्रभावित हो सकती है।
प्रतिनिधित्व में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के माध्यम से सभी फ्लैटों के मूल आवंटन से लेकर वर्तमान मालिक तक की पूरी स्वामित्व श्रृंखला (कुर्सीनामा) का डिजिटाइजेशन करने की मांग की गई है।

सीबीआई, ईडी और सीएजी जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सहकारिता विभाग और बैंक से जुड़े मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी जाए।
इसके अलावा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा विभागीय कार्यों और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

हालांकि प्रतिनिधित्व में लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक चंडीगढ़ प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्य मांगें
एडीसी-कम-आरसीएस को पद से हटाया जाए।
आरसीएस का कार्यभार पुनः उपायुक्त (DC) को सौंपा जाए।
कथित भर्ती घोटाले की निष्पक्ष जांच हो।
विजिलेंस मामलों को सीबीआई और ईडी को सौंपा जाए।
7,800 फ्लैटों के रिकॉर्ड का पूर्ण डिजिटाइजेशन किया जाए।
सहकारिता विभाग और बैंकिंग मामलों का सीएजी ऑडिट कराया जाए।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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