September 22, 2026 3:46 pm

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CHANDIGARH NEWS: आवारा पशुओं का आतंक: सड़कों पर खतरा, हादसों में बढ़ोतरी, समाधान कब?

बाबूगिरी ब्यूरो

चंडीगढ़, 28 अप्रैल 2026: सिटी ब्यूटीफुल Chandigarh इन दिनों एक गंभीर शहरी समस्या से जूझ रहा है। शहर की सड़कों पर बढ़ती आवारा व बेसहारा पशुओं की संख्या अब लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। रोजाना हो रहे हादसे, चोटिल होते नागरिक और प्रशासन की सुस्त कार्यवाही ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

सड़कों पर ‘खतरे का झुंड’, रोजाना हो रहे हादसे
शहर के लगभग हर सेक्टर और प्रमुख मार्गों पर हजारों की संख्या में आवारा पशु घूमते नजर आते हैं। खासतौर पर रात के समय यह समस्या और विकराल हो जाती है।
मध्य मार्ग जैसे व्यस्त रास्तों पर काले रंग के सांड वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे दोपहिया वाहन चालक सबसे अधिक हादसों का शिकार हो रहे हैं।
हाल ही में मध्य मार्ग पर एक कार के सामने अचानक गाय आ जाने से चालक को इमरजेंसी ब्रेक लगानी पड़ी, जिसके चलते पीछे आ रही आधा दर्जन गाड़ियां आपस में टकरा गईं। ऐसे हादसे अब आम होते जा रहे हैं।

आवारा पशुओं की लड़ाई में पिस रहे लोग
शहर में सिर्फ पशुओं की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि उनके आपसी संघर्ष भी लोगों के लिए खतरा बन गए हैं। सांडों की लड़ाई के दौरान राहगीर और वाहन चालक बीच में फंसकर घायल हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अब तक सैकड़ों लोग इन घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

समस्या सिर्फ बाहरी इलाकों तक सीमित नहीं है। शहर की पॉश कॉलोनियों में भी आवारा पशु झुंड बनाकर घूम रहे हैं। पार्कों, बाजारों और रिहायशी सड़कों पर इनकी मौजूदगी से लोगों का बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद ढिलाई
हाल ही में Punjab and Haryana High Court ने पंजाब, हरियाणा और यूटी प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि नगर निगम की सड़कों पर एक भी आवारा पशु नहीं होना चाहिए। साथ ही इस संबंध में जवाब भी मांगा गया था।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
गऊशाला और नंदीशाला योजनाएं कागजों में सीमित
नगर निगम द्वारा नई नंदीशाला और आधुनिक गऊशालाएं बनाने के दावे किए गए थे, लेकिन अब तक इन योजनाओं का असर दिखाई नहीं दे रहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद और अधिकारी केवल योजनाओं का प्रचार करते हैं, लेकिन वास्तविक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

लोगों में रोष, समाधान की मांग तेज
चंडीगढ़ निवासी सुरेंद्र शर्मा, जयपाल भगत और यशपाल चौधरी का कहना है कि सरकार को सभी शहरों को “कैटल फ्री” बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
उनका आरोप है कि आवारा पशुओं को पकड़ने और पुनर्वास की व्यवस्था न होने के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है।

क्या है समाधान?
विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या के समाधान के लिए बहुस्तरीय रणनीति जरूरी है:
आवारा पशुओं की पहचान और पंजीकरण
पर्याप्त संख्या में गऊशालाओं का निर्माण
सड़कों से पशुओं को हटाने के लिए विशेष अभियान
पशु मालिकों पर सख्त जुर्माना
नागरिकों की जागरूकता बढ़ाना

निष्कर्ष
चंडीगढ़ जैसे सुनियोजित शहर में आवारा पशुओं की यह स्थिति प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करती है। जब तक ठोस और सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आम नागरिक इसी तरह हादसों और खतरे के बीच जीने को मजबूर रहेंगे।
अब बड़ा सवाल यही है—आखिर कब मिलेगा चंडीगढ़ के लोगों को इस समस्या से स्थायी समाधान?

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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