जिला उपायुक्त की अनुमति बिना चल रहे कई इमिग्रेशन ऑफिस
सेक्टर-17, 22 और 34 बने फर्जी इमिग्रेशन कारोबार के हॉटस्पॉट, बेरोजगार युवाओं को विदेश भेजने के सपने दिखाकर करोड़ों की ठगी
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़, 22 मई। ट्राइसिटी में विदेश भेजने के नाम पर बेरोजगार युवक व युवतियों से ठगी का गोरखधंधा रुकने का नाम नही ले रहा है। चंडीगढ़ पुलिस ने गुरुवार को आधा दर्जन के करीब एक करोड़ से भी अधिक विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने के केस दर्ज किए। चंडीगढ़ में पिछले दिनों एजेंसियों के लिए नया कानून भी लागू हो चुका है। उसके बाद भी यह तंगी है जाल रुकने का नाम ही नही ले रहा है। पुलिस थाने के पास भी ऑफिस चल रहे है। चंडीगढ़ में ठगी के बर्फ मोहाली में नाम बदलकर ऑफिस खोल लिए जाते है। एजेंटों की चालाकी के सामने पुलिस भी बेबस नजर आ रही है।
विदेश में नौकरी, वर्क वीजा और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर बेरोजगार युवक-युवतियों से करोड़ों रुपये की ठगी का खेल चंडीगढ़ में लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर के लगभग हर बड़े सेक्टर की मार्केट में बड़ी संख्या में इमिग्रेशन और वीजा कंसल्टेंसी ऑफिस खुले हुए हैं, जिनमें से अधिकतर पर जिला उपायुक्त कार्यालय से आवश्यक अनुमति और वैध लाइसेंस न होने के आरोप लग रहे हैं। इसके बावजूद यह कारोबार खुलेआम जारी है और पुलिस व प्रशासन की कार्रवाई सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है।
हालात यह हैं कि नया कानून लागू होने के बाद भी विदेश भेजने के नाम पर ठगी का गोरखधंधा थमने का नाम नहीं ले रहा। सेक्टर-17, सेक्टर-22 और सेक्टर-34 में सबसे ज्यादा इमिग्रेशन ऑफिस संचालित हो रहे हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में युवा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और यूरोपीय देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर पहुंचते हैं।
बेरोजगारी का फायदा उठा रहे एजेंट
जानकारों के अनुसार, बेरोजगारी और विदेश जाने की बढ़ती चाहत का फायदा उठाकर कई एजेंट युवाओं को आकर्षक पैकेज, पक्के वर्क परमिट और जल्दी वीजा का झांसा देते हैं। शुरुआत में फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और एम्बेसी खर्च के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाते हैं। बाद में या तो वीजा नहीं आता या फिर फर्जी दस्तावेज देकर लोगों को गुमराह किया जाता है।
कई मामलों में पीड़ितों को महीनों तक ऑफिसों के चक्कर कटवाए जाते हैं और जब दबाव बढ़ता है तो ऑफिस बंद कर संचालक फरार हो जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में सालाना करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है।
चंडीगढ़ पुलिस में दर्ज हैं सैकड़ों केस
विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चंडीगढ़ पुलिस के विभिन्न थानों में ऐसे सैकड़ों मामले दर्ज हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें सेक्टर-17 स्थित इमिग्रेशन कंपनियों के खिलाफ सामने आई हैं।
हाल ही में दर्ज कई मामलों ने पूरे नेटवर्क की गंभीरता उजागर कर दी है।
लाखों रुपये की ठगी के ताजा मामले
पुलिस थाना सेक्टर-17 में दर्ज मामलों के अनुसार, करनाल निवासी विक्रम सिंह और अन्य लोगों की शिकायत पर नेक्सस ग्लाइड ओवरसीज, सेक्टर-17 के संचालकों के खिलाफ विदेश में वर्क वीजा दिलाने के नाम पर 11.59 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।
इसी प्रकार गुरकमल सिंह निवासी पटियाला की शिकायत पर विश इमिग्रेशन एक्ट, सेक्टर-17 के संचालकों के खिलाफ 14.23 लाख रुपये की ठगी का केस दर्ज हुआ है।
ढाकोली निवासी द्विजेंद्र कुमार ने भी उसी कंपनी पर 23.48 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
जालंधर निवासी परशोत्तम लाल और अन्य लोगों ने नेक्सस ग्लाइड ओवरसीज पर 16.24 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाया है।
सिरसा निवासी धर्मिंदर सिंह की शिकायत पर ट्विस्ट वीजा कंसल्टेंट, सेक्टर-17 के खिलाफ 7.33 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज किया गया।
होशियारपुर निवासी रणवीर सिंह ने नेक्सस ग्लाइड ओवरसीज पर 25.06 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
फतेहाबाद निवासी संतोख सिंह ने भी उसी कंपनी के खिलाफ लगभग 9.94 लाख रुपये ठगने की शिकायत दी है।
वहीं सेक्टर-29 निवासी ओम पाल की शिकायत पर वीजा वाइब्स इमिग्रेशन, सेक्टर-17 के खिलाफ 39.13 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
इन सभी मामलों में पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 61(2) तथा इमिग्रेशन एक्ट की धारा 24 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
लगातार एफआईआर दर्ज होने के बावजूद कई इमिग्रेशन कंपनियां पहले की तरह अपना कारोबार चला रही हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर बिना वैध अनुमति और लाइसेंस के इतने बड़े स्तर पर ऑफिस कैसे संचालित हो रहे हैं। शहर में जगह-जगह बड़े-बड़े विज्ञापन, सोशल मीडिया प्रमोशन और विदेश भेजने के दावे खुलेआम किए जा रहे हैं, लेकिन निगरानी व्यवस्था कमजोर दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने के इच्छुक युवाओं को किसी भी एजेंट या कंपनी को पैसा देने से पहले उसका लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और सरकारी अनुमति जरूर जांचनी चाहिए। केवल लिखित एग्रीमेंट और वैध दस्तावेजों के आधार पर ही भुगतान करना चाहिए।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
विदेश भेजने के नाम पर बढ़ती ठगी अब प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो हजारों परिवारों की मेहनत की कमाई इसी तरह फर्जी एजेंटों के हाथों लुटती रहेगी।













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