May 23, 2026 7:24 pm

May 23, 2026 7:24 pm

CHANDIGARH NEWS: विदेश भेजने के नाम पर चंडीगढ़ में सबसे बड़ा ठगी नेटवर्क, हर साल करोड़ों की लूट

सेक्टर-17, 34 और 35 बने इमिग्रेशन फ्रॉड के अड्डे, बेरोजगार युवाओं के सपनों का हो रहा सौदा

नया कानून लागू होने के बाद भी नहीं थम रहा वीजा फ्रॉड, पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं सैकड़ों मामले

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़।  आपको गारंटी के साथ “कनाडा भेज देंगे”, “वर्क परमिट पक्का”, “तीन महीने में वीजा”, “यूरोप में नौकरी की गारंटी” — ऐसे लुभावने वादों के जरिए चंडीगढ़ में हजारों बेरोजगार युवक-युवतियों को हर साल ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। ट्राइसिटी में तेजी से फैलते इमिग्रेशन कारोबार ने अब एक संगठित नेटवर्क का रूप ले लिया है, जहां विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही की जा रही है।
चंडीगढ़ के सेक्टर-17, सेक्टर-22, सेक्टर-34 और सेक्टर-35 में बड़ी संख्या में इमिग्रेशन और वीजा कंसल्टेंसी ऑफिस संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई कंपनियों पर पहले भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कारोबार खुलेआम जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर लगातार एफआईआर दर्ज होने के बाद भी ऐसे ऑफिस कैसे चल रहे हैं।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और राजस्थान से बड़ी संख्या में युवा विदेश जाने के सपने लेकर चंडीगढ़ पहुंचते हैं। बेरोजगारी और बेहतर भविष्य की उम्मीद का फायदा उठाकर कथित एजेंट उनसे लाखों रुपये वसूल लेते हैं। कई परिवार अपनी जमीन तक बेच देते हैं, लेकिन बदले में मिलता है सिर्फ धोखा।

“वर्क वीजा” बना करोड़ों की ठगी का हथियार
पिछले कुछ वर्षों में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और यूरोपीय देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी आई है। फर्जी एजेंट सोशल मीडिया, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और बड़े-बड़े होर्डिंग्स के जरिए युवाओं को आकर्षित करते हैं। शुरुआत में कम फीस और जल्दी प्रोसेसिंग का भरोसा दिया जाता है। बाद में मेडिकल, एम्बेसी फीस, फाइल चार्ज, इंटरव्यू फीस और टिकट के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।
जब पीड़ित वीजा की स्थिति पूछते हैं तो उन्हें महीनों तक बहाने बनाकर टाल दिया जाता है। कई मामलों में फर्जी ऑफर लेटर और नकली वीजा तक थमा दिए जाते हैं। जब दबाव बढ़ता है तो ऑफिस बंद कर दिए जाते हैं या संचालक फरार हो जाते हैं।

पुलिस रिकॉर्ड में लगातार बढ़ रहे मामले
चंडीगढ़ पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, हर वर्ष इमिग्रेशन धोखाधड़ी के दर्जनों मामले सामने आ रहे हैं। केवल सेक्टर-17 थाना क्षेत्र में ही पिछले कुछ महीनों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
ताजा मामले में डीके के मालिक इकबाल सिंह संधू और अन्य के खिलाफ एफआईआर नंबर 84 दर्ज की गई है। आरोप है कि वीजा दिलाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 9 लाख 70 हजार रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने धारा 318(4) बीएनएस और आव्रजन अधिनियम की धारा 24 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पटियाला निवासी लवप्रीत कौर की शिकायत पर मेसर्स फिनलैंड इमिग्रेशन, एससीओ नंबर 125-126, सेक्टर-17/सी, चंडीगढ़ के मालिक मनप्रीत सिंह और अन्य के खिलाफ एफआईआर नंबर 85 दर्ज की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपियों ने वीजा दिलाने के बहाने उससे 4 लाख 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी की।
इसी तरह करनाल निवासी मोहन बाला ने सेक्टर-34 स्थित इमिग्रेशन कार्यालय पर 7 लाख 23 हजार रुपये ठगने का आरोप लगाया है। सेक्टर-34 थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
संगरूर निवासी गुरप्रीत सिंह की शिकायत पर अंगद इन्फो ओवरसीज कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड, सेक्टर-35/सी के संचालकों राजदीप और शेली शर्मा के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि वीजा दिलाने के नाम पर 6 लाख 66 हजार रुपये ठगे गए।
इससे पहले भी सेक्टर-17 स्थित कई कंपनियों पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप लग चुके हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कुछ मामलों में एक ही कंपनी के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुई हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं बड़े घोटाले
चंडीगढ़ और पंजाब-हरियाणा क्षेत्र में इमिग्रेशन फ्रॉड कोई नया मामला नहीं है। पिछले वर्षों में कई बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं, जिनमें सैकड़ों परिवारों की जमा पूंजी डूब गई।
कुछ मामलों में युवाओं को फर्जी कॉलेज एडमिशन लेटर देकर विदेश भेजा गया, जहां एयरपोर्ट पर ही उन्हें रोक लिया गया। कई युवाओं को टूरिस्ट वीजा पर भेजकर वर्क परमिट का झांसा दिया गया। कुछ एजेंटों ने नकली जॉब ऑफर लेटर तक तैयार कर दिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने की बढ़ती होड़ ने फर्जी इमिग्रेशन कंपनियों के लिए बड़ा बाजार तैयार कर दिया है। हर साल हजारों छात्र और बेरोजगार युवा विदेश जाने के लिए एजेंटों के संपर्क में आते हैं। इसी का फायदा उठाकर ठगी का यह नेटवर्क लगातार फैल रहा है।

सेक्टर-17 क्यों बना सबसे बड़ा केंद्र
चंडीगढ़ का सेक्टर-17 लंबे समय से इमिग्रेशन कारोबार का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहां सैकड़ों छोटे-बड़े इमिग्रेशन ऑफिस संचालित हो रहे हैं। बड़े कॉरपोरेट ऑफिस की तरह सजाए गए इन कार्यालयों में युवाओं को विदेश में शानदार भविष्य के सपने दिखाए जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई कंपनियां बिना पर्याप्त लाइसेंस और अनुमति के काम कर रही हैं। कुछ एजेंसियां केवल किराये के ऑफिस लेकर कुछ महीनों तक काम करती हैं और फिर अचानक गायब हो जाती हैं। इसके बावजूद नए नाम से दोबारा कारोबार शुरू हो जाता है।

नया कानून, लेकिन कार्रवाई कमजोर
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इमिग्रेशन धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। नए कानूनों के तहत फर्जी एजेंटों पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आ रहा।
कई पीड़ितों का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कार्रवाई की गति बेहद धीमी रहती है। कई मामलों में जांच वर्षों तक चलती रहती है, जबकि आरोपी आसानी से जमानत पर बाहर आ जाते हैं।

परिवारों पर पड़ रहा गहरा असर
विदेश भेजने के नाम पर होने वाली ठगी केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहती। कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। जमीन बेचने, गहने गिरवी रखने और रिश्तेदारों से उधार लेकर एजेंटों को रकम दी जाती है। जब धोखाधड़ी का पता चलता है तो परिवार मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव का भी सामना करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पंजाब और हरियाणा में विदेश जाने को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। इसी मानसिकता का फायदा उठाकर एजेंट लोगों को जल्दी फैसला लेने के लिए मजबूर करते हैं।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते अवैध और संदिग्ध इमिग्रेशन कंपनियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। किसी भी एजेंट को पैसा देने से पहले उसका लाइसेंस, सरकारी पंजीकरण, ऑफिस रिकॉर्ड और पुराने मामलों की जांच जरूर करनी चाहिए। केवल लिखित अनुबंध और वैध रसीद के आधार पर ही भुगतान करना चाहिए।

विशेषज्ञों की सलाह
विदेश भेजने का दावा करने वाली कंपनी का लाइसेंस जरूर जांचें
सोशल मीडिया विज्ञापनों के झांसे में न आएं
कैश पेमेंट से बचें
सभी दस्तावेजों की कॉपी सुरक्षित रखें
ऑफर लेटर और वीजा की आधिकारिक पुष्टि करें
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें
विदेश जाने का सपना लाखों युवाओं का हो सकता है, लेकिन इसी सपने को ठगी का कारोबार बनाने वाले गिरोह अब चंडीगढ़ में बड़ी चुनौती बन चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर यह गोरखधंधा कब रुकेगा और कब तक बेरोजगार युवाओं की मेहनत की कमाई ऐसे फर्जी एजेंटों के हाथों लुटती रहेगी।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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