बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 2 जून 2026। पंजाब सरकार ने किसानों को कर्ज के जाल से मुक्त करने और खेती को अधिक लाभदायक व आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) प्रणाली में व्यापक सुधारों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार ने 26 साल पुरानी केसीसी व्यवस्था को पूरी तरह बदलते हुए इसे आधुनिक, डिजिटल और किसान-केंद्रित बनाया है, जिससे 13 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसानों को खेती की वास्तविक लागत के अनुरूप ऋण उपलब्ध कराया जाएगा और ब्याज दरों को भी कम किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले किसान अपर्याप्त संस्थागत ऋण के कारण निजी साहूकारों और एनबीएफसी के महंगे कर्ज पर निर्भर रहने को मजबूर थे, लेकिन नई व्यवस्था उन्हें इस आर्थिक बोझ से राहत दिलाएगी।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि नई केसीसी नीति के तहत गेहूं के लिए ऋण सीमा 24,380 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है, जबकि धान के लिए यह सीमा 25,440 रुपये से बढ़ाकर 39,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। उन्होंने बताया कि धान की इस संशोधित सीमा में से 2,000 रुपये प्रति एकड़ विशेष रूप से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए निर्धारित किए गए हैं। पंजाब ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसान एटीएम, यूपीआई और सीबीएस आधारित डिजिटल बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से सीधे धनराशि निकाल सकेंगे। ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से ऋण भुगतान करने वाले किसानों को बैंकों की ओर से विशेष प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों को 21वीं सदी की डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में बड़ा बदलाव है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने गन्ना उत्पादकों को भी बड़ी राहत दी है। बोई गई गन्ने की फसल के लिए ऋण सीमा 44,000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है, जबकि दूसरी फसल के लिए पहली बार 65,000 रुपये प्रति एकड़ का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नई नीति के तहत पहली बार कई उच्च मूल्य वाली और वैकल्पिक फसलों को भी ऋण योजना में शामिल किया गया है। इनमें चिनार, बांस, जामुन, लेमनग्रास, लहसुन, हाइब्रिड टमाटर, ड्रैगन फ्रूट, चिया सीड्स और क्विनोआ जैसी फसलें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसान पारंपरिक गेहूं-धान चक्र से बाहर निकल सकेंगे।
उन्होंने बताया कि अब फसल आधारित ऋण सहायता प्रणाली लागू की गई है। लहसुन उत्पादकों को 1.57 लाख रुपये प्रति एकड़ तक, रबी प्याज उत्पादकों को 92,686 रुपये प्रति एकड़ और हाइब्रिड टमाटर उत्पादकों को 80,981 रुपये प्रति एकड़ तक ऋण मिल सकेगा। पहले सभी फल और सब्जियों के लिए केवल 32,000 रुपये प्रति एकड़ तक का ही ऋण मिलता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र को भी नई नीति में विशेष महत्व दिया गया है। मत्स्य पालन के लिए वित्तपोषण सीमा 2.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 3 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि सफेद झींगा पालन के लिए यह सीमा 4.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसानों को अब छह वर्ष की केसीसी स्वीकृति अवधि मिलेगी और आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार हर वर्ष ऋण सीमा की समीक्षा की जाएगी। साथ ही किसानों को बीज, खाद, पशु चारा, ड्रोन किराए, भूमि समतलीकरण और कस्टम हायरिंग जैसी जरूरतों के लिए भी अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी बैंक को किसानों की जमीन जब्त करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार की किसान समर्थक नीतियों के कारण किसानों की आत्महत्या के मामलों में भी कमी आई है। वर्ष 2017 में जहां किसानों की आत्महत्या के 243 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 84 रह गई।
उन्होंने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में किसानों को लगातार संघर्ष करना पड़ा है, जबकि पंजाब सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई केसीसी व्यवस्था पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था को भविष्य के लिए मजबूत बनाएगी और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।













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