June 5, 2026 5:31 am

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हरियाणा की 13 नगर परिषदों में CEO नियुक्तियों पर उठे सवाल, कानून उल्लंघन का आरोप

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 3 जून। हरियाणा के जिला मुख्यालयों पर स्थापित 13 नगर परिषदों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पदों पर की गई नियुक्तियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने आरोप लगाया है कि इन नगर परिषदों में ऐसे अधिकारियों को सीईओ नियुक्त किया गया है जो हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 में निर्धारित न्यूनतम रैंक की पात्रता पूरी नहीं करते।
अधिवक्ता हेमंत कुमार ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव तथा शहरी स्थानीय निकाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यह नियुक्तियां कानून की भावना और प्रावधानों के विपरीत हैं।

2022 के संशोधन का हवाला
हेमंत कुमार के अनुसार, हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2022 के तहत अधिनियम में जोड़ी गई धारा 2(5AA) में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि जिला मुख्यालय स्थित प्रत्येक नगर परिषद का मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऐसा अधिकारी होगा जो एक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिश्नर (EAC) अर्थात हरियाणा सिविल सेवा (HCS) अधिकारी से नीचे रैंक का न हो।
उन्होंने कहा कि जब विधानसभा ने कानून में सीईओ पद के लिए न्यूनतम रैंक निर्धारित कर दी है, तब सरकार द्वारा उससे नीचे रैंक के अधिकारियों की नियुक्ति किए जाने पर गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े होते हैं।

इन नगर परिषदों की नियुक्तियां विवाद में
शिकायत के अनुसार वर्तमान में भिवानी, चरखी दादरी, फतेहाबाद, हांसी, झज्जर, जींद, कैथल, नारनौल, नूंह, पलवल, रेवाड़ी, सिरसा और थानेसर (कुरुक्षेत्र) नगर परिषदों में ऐसे अधिकारी सीईओ के रूप में कार्यरत हैं जो कथित तौर पर निर्धारित ईएसी रैंक के नहीं हैं।

प्रशासनिक आदेशों की वैधता पर भी सवाल
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि इन नियुक्तियों को कानून के अनुरूप नहीं माना जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी किए गए प्रशासनिक आदेश, वित्तीय स्वीकृतियां और अन्य निर्णय भी कानूनी चुनौती के दायरे में आ सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी पद के लिए यदि कानून द्वारा विशेष योग्यता या रैंक निर्धारित की गई हो तो उसके विपरीत की गई नियुक्तियां न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकती हैं।

कानून से ऊपर कोई नहीं” : हेमंत कुमार
हेमंत कुमार ने कहा कि जब अधिनियम में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जिला मुख्यालय स्थित नगर परिषद का सीईओ अतिरिक्त सहायक आयुक्त से नीचे रैंक का अधिकारी नहीं हो सकता, तो नियुक्तियां भी उसी अनुरूप होनी चाहिए।
राज्यपाल से लेकर मुख्य सचिव तक भेजी शिकायत
अधिवक्ता ने अपनी शिकायत की प्रतियां हरियाणा के राज्यपाल प्रो. आशिम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक कुमार मीणा, निदेशक शहरी स्थानीय निकाय मुकुल कुमार, कार्मिक विभाग के सचिव पंकज तथा विधि सचिव ऋतु गर्ग को भेजी हैं।
उन्होंने सरकार से सभी जिला मुख्यालय स्थित नगर परिषदों में सीईओ पदों की समीक्षा कर कानून के अनुरूप नियुक्तियां सुनिश्चित करने की मांग की है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक राज्य सरकार या शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी। हालांकि प्रशासनिक और कानूनी हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

 क्या कहता है कानून?
कानून: हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973
धारा: 2(5AA)

संशोधन वर्ष: 2022
सीईओ पद के लिए पात्रता: एक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिश्नर (EAC) या उससे उच्च रैंक का अधिकारी
नियुक्ति प्राधिकारी: हरियाणा सरकार

विवाद में शामिल 13 नगर परिषदें
भिवानी | चरखी दादरी | फतेहाबाद | हांसी | झज्जर | जींद | कैथल | नारनौल | नूंह | पलवल | रेवाड़ी | सिरसा | थानेसर (कुरुक्षेत्र)

 

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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