June 5, 2026 3:29 am

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चंडीगढ़ प्रशासन के लिए नासूर बनी सेक्टर-26 अनाज मंडी

एक दशक से बिना स्थायी सचिव के चल रहा सिस्टम

20 साल बाद भी नहीं हो सकी सेक्टर-39 मंडी में शिफ्टिंग, करोड़ों की संपत्ति खंडहर में तब्दील

शराब प्रकरण ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 3 जून। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की सेक्टर-26 स्थित अनाज मंडी आजकल प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है। पिछले लगभग 10 वर्षों से यह मंडी बिना स्थायी मंडी सचिव के संचालित हो रही है। इस दौरान एक दर्जन से अधिक पीसीएस, एचसीएस, दानिक्स तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को मंडी की व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन हालात में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आया।
स्थिति यह है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणियों और प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद मंडी की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। शहर के कारोबारी और सामाजिक संगठन सवाल उठा रहे हैं कि आखिर चंडीगढ़ प्रशासन सेक्टर-26 मंडी की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान क्यों नहीं कर पा रहा है।
20 साल बाद भी नहीं हुई नई मंडी में शिफ्टिंग
सेक्टर-39 में लगभग दो दशक पहले नई अनाज मंडी विकसित की गई थी। करोड़ों रुपये की लागत से वहां शेड, सड़कें, कार्यालय और अन्य आधारभूत ढांचा तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य सेक्टर-26 मंडी को वहां स्थानांतरित करना था ताकि शहर के बीचों-बीच स्थित मंडी से यातायात और अव्यवस्था की समस्या खत्म हो सके।
लेकिन 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी मंडी शिफ्टिंग का सपना पूरा नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि सेक्टर-39 में तैयार की गई सुविधाएं अब खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये का सरकारी निवेश उपेक्षा की भेंट चढ़ चुका है।

सेक्टर 39 मंडी शेड

कोई अधिकारी नहीं लेना चाहता जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार जिस प्रकार चंडीगढ़ नगर निगम में कुछ महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर अनिच्छा दिखाई देती है, उसी प्रकार सेक्टर-26 मंडी की जिम्मेदारी लेने से भी अधिकारी बचते नजर आते हैं। पिछले वर्षों में कई अधिकारी यहां तैनात हुए, लेकिन कोई भी मंडी की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया।
व्यापारियों का आरोप है कि डेपुटेशन पर आने वाले अधिकारियों का ध्यान मंडी प्रशासन की बजाय अन्य महत्वपूर्ण विभागों और प्रतिष्ठित पदों पर अधिक रहता है। परिणामस्वरूप मंडी से जुड़े बुनियादी मुद्दे लगातार लंबित रहते हैं।

युटी व हरियाणा-पंजाब के वरिष्ठ अधिकारी भी नहीं दिला पाए समाधान
चंडीगढ़ केवल एक केंद्र शासित प्रदेश ही नहीं, बल्कि पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी भी है। वर्तमान में हरियाणा कैडर के अधिकारी जिला उपायुक्त, गृह सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं, जबकि पंजाब कैडर के अधिकारी नगर निगम आयुक्त, वित्त सचिव तथा राजभवन समेत विभिन्न अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
इसके बावजूद मंडी शिफ्टिंग और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों पर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है। पिछले एक दशक में लगभग 10 प्रशासक और सलाहकार (एडवाइजर) बदल चुके हैं, लेकिन किसी ने भी सेक्टर-39 मंडी में स्थानांतरण को प्राथमिकता नहीं दी।

खाली पड़ी सेक्टर-39 मंडी बनी असामाजिक तत्वों का अड्डा
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से खाली पड़ी नई मंडी अब शराबियों और नशेड़ियों का अड्डा बनती जा रही है। करोड़ों रुपये से निर्मित सरकारी ढांचा रखरखाव के अभाव में जर्जर हो रहा है।
निवासियों का आरोप है कि यदि समय रहते मंडी को वहां स्थानांतरित कर दिया जाता तो सरकारी संपत्ति का बेहतर उपयोग हो सकता था और शहर के बीच स्थित सेक्टर-26 मंडी की कई समस्याओं का भी समाधान हो जाता।

शराब प्रकरण ने बढ़ाई प्रशासन की किरकिरी
इसी बीच सेक्टर-26 स्थित मार्केट कमेटी कार्यालय में कर्मचारियों के ड्यूटी के दौरान शराब पीने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार 27 मई को मार्केट कमेटी की प्रशासक एवं एसडीएम (ईस्ट) खुशप्रीत कौर ने शिकायत मिलने पर कार्यालय में अचानक छापा मारा था। आरोप है कि छापेमारी के दौरान मंडी सुपरवाइजर गुरमिंदर सिंह, कंडामैन अमित मोर, ऑक्शन रिकॉर्डर कर्मबीर सिंह और क्लर्क बलजिंदर सिंह को कार्यालय समय में शराब का सेवन करते हुए पाया गया।
बताया जाता है कि मौके पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई तथा संबंधित कर्मचारियों का सेक्टर-16 अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी करवाया गया।
हालांकि घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

एसडीएम बोलीं— मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार
इस मामले पर एसडीएम (ईस्ट) एवं मार्केट कमेटी प्रशासक खुशप्रीत कौर का कहना है कि कर्मचारियों का मेडिकल कराया गया था और अस्पताल से रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कारोबारी को धमकी देने का आरोप
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मंडी के कारोबारी सुधीर कुमार ने मार्केट कमेटी के एक कर्मचारी पर जान से मारने की धमकी देने और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया।
शिकायत के अनुसार 28 मई को मार्केट कमेटी के लाइब्रेरी अटेंडेंट जगजीत सिंह ने उन्हें फोन कर कथित रूप से अपशब्द कहे और उन्हें तथा उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। कारोबारी ने इस संबंध में प्रशासक, राज्य कृषि विपणन बोर्ड, एसएसपी कार्यालय तथा अन्य अधिकारियों को शिकायत भेजकर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।

प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
सेक्टर-26 मंडी का मुद्दा अब केवल मंडी प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है। वर्षों से लंबित शिफ्टिंग, करोड़ों रुपये की निष्प्रयोज्य पड़ी सरकारी संपत्ति, अधिकारियों की उदासीनता और अब सरकारी कार्यालय में कथित शराब सेवन जैसे मामलों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सेक्टर-39 मंडी को सक्रिय कर वहां शिफ्टिंग कर दी जाती, तो न केवल सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होता बल्कि सेक्टर-26 मंडी से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का भी समाधान संभव था। अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस बहुचर्चित मंडी विवाद का स्थायी समाधान कब और कैसे निकालता है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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