लंबे समय से जमे कर्मचारियों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक?
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 24 जून। DC ऑफिस चंडीगढ़ की हालिया तबादला सूची को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन की ओर से कर्मचारियों के रोटेशन और तबादले के आदेश तो जारी किए गए, लेकिन आरोप लग रहे हैं कि कई जगहों पर सिर्फ कुर्सियां बदली गई हैं, जबकि व्यवस्था वही पुरानी बनी हुई है। तबादला लिस्ट को देखकर शहर में पूरी चर्चा बनी हुई है। कई कर्मचारियों का तो कमरा भी नही बदल, केवल उसी कमरे में कुर्सी ही बदली है।
शहर के नागरिकों ने चंडीगढ़ ने डीसी ऑफिस की तबादला सूची पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विजिलेंस विभाग की ओर से संवेदनशील सीटों पर लंबे समय से तैनात कर्मचारियों को बदलने के निर्देशों के बावजूद पूरी तरह से प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि कई ब्रांचों में वर्षों से जमे कर्मचारियों का दबदबा बरकरार है।
डीसी ऑफिस की कई ब्रांचों में वर्षों से जमे कर्मचारी
सूत्रों के अनुसार डीसी ऑफिस की कई महत्वपूर्ण ब्रांचों में कर्मचारी लंबे समय से एक ही तरह के काम और सीटों पर तैनात हैं। इनमें आरएलए, तहसील, बिल्डिंग ब्रांच, आरसीएस सहित अन्य शाखाएं शामिल हैं, जहां कई कर्मचारियों की लंबी तैनाती को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

आरएलए में वित्तीय लेनदेन की जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हाथों में?
आरएलए (रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी) को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि यहां पिछले कई वर्षों से कुछ आउटसोर्सिंग कर्मचारी एक ही सीटों पर कार्यरत हैं और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कार्यों में भी उनकी भूमिका बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि आरएलए में नियमित कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है, जबकि अधिकतर कार्य आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के माध्यम से चल रहा है। ऐसे में अकाउंटेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

एक ही कर्मचारी बार-बार उसी सीट पर, जांच का विषय
आरएलए में एक कर्मचारी के बार-बार उसी सीट पर लगाए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संवेदनशील सीटों पर लगातार लंबे समय तक तैनाती व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है और इसकी जांच होनी चाहिए।
तहसील, बिल्डिंग ब्रांच और आरसीएस में भी लंबी तैनाती
डीसी ऑफिस के अलावा तहसील, बिल्डिंग ब्रांच, आरसीएस और अन्य शाखाओं में भी कई कर्मचारी कई-कई वर्षों से जमे हुए बताए जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच को इसकी जानकारी नहीं है या फिर किसी मजबूरी के चलते लंबे समय से बैठे कर्मचारियों को हटाया नहीं जा रहा।
कॉमन काडर कर्मचारियों की लंबी तैनाती पर सवाल
लोगों का कहना है कि डीसी ऑफिस, एसडीएम ऑफिस और एस्टेट ऑफिस में कॉमन काडर के कई कर्मचारी 5 साल से अधिक समय से एक ही जगहों पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि विजिलेंस के निर्देशों के बाद भी अगर सिर्फ कागजी बदलाव किए जाते हैं तो इसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
उन्होंने मांग की कि संवेदनशील सीटों पर तैनात कर्मचारियों की पूरी समीक्षा की जाए और लंबे समय से एक ही सीट संभाल रहे कर्मचारियों का वास्तविक रोटेशन किया जाए।

चंडीगढ़ प्रशासन में बड़ा सवाल: कॉमन काडर कर्मचारी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के नीचे कर रहे नौकरी?
अधिकारियों के पीए पदों पर आउटसोर्सिंग स्टाफ की तैनाती, नियमों की अनदेखी के आरोप
चंडीगढ़ प्रशासन में कर्मचारियों की तैनाती और जिम्मेदारियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कॉमन काडर के नियमित कर्मचारी कई जगहों पर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के अधीन काम करने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ में कई वर्षों से कई आउटसोर्सिंग कर्मचारी विभिन्न अधिकारियों के पास पीए (Personal Assistant) का कार्य संभाल रहे हैं। जबकि नियमानुसार पीए का कार्य मुख्य रूप से स्टेनोग्राफर और सीनियर स्टेनोग्राफर कैडर के कर्मचारियों की जिम्मेदारी मानी जाती है।
दर्जनों अधिकारियों के पास आउटसोर्सिंग कर्मचारी पीए की भूमिका में
सूत्रों का कहना है कि प्रशासन के कई महत्वपूर्ण कार्यालयों में आउटसोर्सिंग कर्मचारी लंबे समय से अधिकारियों के साथ पीए के रूप में काम कर रहे हैं। इससे नियमित कर्मचारियों की भूमिका और कैडर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि कई जगहों पर कॉमन काडर के कर्मचारी ऐसे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के अधीन काम कर रहे हैं, जिनकी नियुक्ति मूल रूप से पीए पद के लिए नहीं हुई थी।
फाइनेंस सेक्रेटरी और विजिलेंस के आदेशों पर सवाल
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि प्रशासन में संवेदनशील सीटों और लंबे समय से एक ही जगह तैनात कर्मचारियों को लेकर समय-समय पर निर्देश जारी होते रहे हैं। इसके बावजूद ऐसी तैनातियां जारी रहने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आरोप है कि फाइनेंस सेक्रेटरी और विजिलेंस विभाग के निर्देशों की भी अनदेखी हो रही है। मांग उठ रही है कि प्रशासन को सभी विभागों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और तैनाती की समीक्षा करनी चाहिए।
पारदर्शिता और नियमों के पालन की मांग
कर्मचारी मामलों से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था में पद और जिम्मेदारी के अनुसार ही काम होना चाहिए। यदि किसी पद की जिम्मेदारी किसी विशेष कैडर के लिए निर्धारित है तो उसका पालन किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि चंडीगढ़ प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या लंबे समय से चली आ रही इस व्यवस्था में बदलाव किया जाता है या नहीं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या आने वाले समय में तबादला नीति को सख्ती से लागू किया जाता है या फिर बदलाव सिर्फ आदेशों तक सीमित रह जाते हैं।













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