PU और PGIMER की कुर्सियों पर मिले कोड, चोरी और अवैध निर्यात की जांच शुरू
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 24 जून 2026: फ्रांस की राजधानी पेरिस में चंडीगढ़ से संबंधित विरासत फर्नीचर की प्रस्तावित नीलामी की खबर सामने आने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन में हड़कंप मच गया है। 25 जून 2026 को होने वाली इस नीलामी में शामिल दो कुर्सियों के चंडीगढ़ की ऐतिहासिक संस्थाओं से जुड़े होने के संकेत मिलने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को गृह मंत्रालय, नई दिल्ली से मिले एक संदेश के बाद पूरा प्रशासन सक्रिय हो गया। देर रात आनन-फानन में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। यह कार्रवाई पंजाब यूनिवर्सिटी और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च , चंडीगढ़ से संबंधित बताई जा रही दो विरासत कुर्सियों को लेकर की गई है।
इन दोनों कुर्सियों पर विशेष पहचान अंकित है। एक कुर्सी पर “PU Chem/55” लिखा है, जिसे पंजाब यूनिवर्सिटी के केमिस्ट्री विभाग से संबंधित माना जा रहा है, जबकि दूसरी कुर्सी पर “PGI/W/CH-020” अंकित है, जो पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ से जुड़ी होने की संभावना दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय से मांगा गया तत्काल हस्तक्षेप
चंडीगढ़ प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय से तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की है। प्रशासन की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव को भेजे गए पत्र में फ्रांस में प्रस्तावित नीलामी को रोकने, फर्नीचर की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जांच पूरी होने तक इन्हें सुरक्षित रखने का आग्रह किया गया है।
प्रशासन ने आशंका जताई है कि यह विरासत फर्नीचर अपने वैध संरक्षकों की अनुमति के बिना हटाकर विदेश भेजा गया हो सकता है। ऐसे में इसकी उत्पत्ति , स्वामित्व और विदेश तक पहुंचने की प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
ले कोर्बुज़िए की विरासत से जुड़ा मामला
चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा है कि यह फर्नीचर केवल सामान्य वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि शहर की आधुनिक वास्तुकला और इसकी ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा है कि यह फर्नीचर केवल उपयोग की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि शहर की आधुनिक वास्तुकला और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। चंडीगढ़ की परिकल्पना महान वास्तुकार ले कार्बुजिए और उनके सहयोगियों ने की थी।
चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स को “द आर्किटेक्चरल वर्क ऑफ ले कार्बुजिए – एन आउटस्टैंडिंग कंट्रीब्यूशन टू द मॉडर्न मूवमेंट” के तहत यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। ऐसे में चंडीगढ़ से जुड़े मूल फर्नीचर का संरक्षण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय है।
चोरी, अवैध बिक्री और तस्करी की जांच
प्रशासन का कहना है कि विदेशी नीलामी बाजार में चंडीगढ़ की विरासत वस्तुओं का पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। इससे संभावित चोरी, अवैध रूप से हटाने, अनधिकृत बिक्री और सांस्कृतिक संपत्ति के अवैध निर्यात जैसी आशंकाएं पैदा होती हैं।
चंडीगढ़ पुलिस ने 23 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि यह फर्नीचर कब, कैसे और किन परिस्थितियों में चंडीगढ़ से बाहर पहुंचा।
फ्रांस में नीलामी रोकने की तैयारी
चंडीगढ़ प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास और वहां के संबंधित अधिकारियों के साथ मामला उठाए। प्रशासन ने मांग की है कि—
प्रस्तावित नीलामी तत्काल रोकी जाए
फर्नीचर को जांच पूरी होने तक सुरक्षित रखा जाए
स्वामित्व और रिकॉर्ड की पुष्टि की जाए
विरासत फर्नीचर को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाए
भविष्य में चंडीगढ़ की विरासत वस्तुओं की अवैध बिक्री पर रोक लगाई जाए
प्रशासन ने कहा है कि चंडीगढ़ की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी दस्तावेज, रिकॉर्ड और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
चंडीगढ़ की विरासत फर्नीचर नीलामी मामले में दो एफआईआर दर्ज, पंजाब यूनिवर्सिटी और पीजीआईएमईआर की संपत्ति को लेकर जांच शुरू
फ्रांस में चंडीगढ़ से संबंधित विरासत फर्नीचर की प्रस्तावित नीलामी मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पंजाब यूनिवर्सिटी और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च , चंडीगढ़ से जुड़े विरासत फर्नीचर को लेकर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं।
पहला मामला पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के सुरक्षा प्रमुख विक्रम सिंह की शिकायत पर पुलिस स्टेशन सेक्टर-11, चंडीगढ़ में दर्ज किया गया है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर नंबर 80 दर्ज की है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 305(ई) और 61(2) के तहत दर्ज किया गया है।
शिकायत में बताया गया है कि 24 जून 2026 को फ्रांस में “PU” अंकित/चिह्न वाले विरासत फर्नीचर और संबंधित वस्तुओं की नीलामी प्रस्तावित है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन वस्तुओं पर मौजूद चिह्न और पहचान से इनके पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े होने की संभावना दिखाई देती है।
शिकायत में कहा गया है कि ये वस्तुएं ऐतिहासिक और संस्थागत महत्व रखती हैं तथा आशंका है कि इन्हें बिना अनुमति के भारत से बाहर ले जाया गया हो सकता है। पंजाब यूनिवर्सिटी की संपत्ति की कथित चोरी और अनधिकृत हस्तांतरण के मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
वहीं दूसरा मामला पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के निदेशक डॉ. विवेक लाल की शिकायत पर दर्ज किया गया है। यह एफआईआर भी पुलिस स्टेशन सेक्टर-11, चंडीगढ़ में धारा 305(ई) और 61(2) बीएनएस के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की गई है।
पीजीआईएमईआर की शिकायत के अनुसार, फ्रांस में प्रस्तावित नीलामी में शामिल विरासत फर्नीचर और संबंधित वस्तुओं पर “PGI/W/CH-0202” का चिह्न अंकित है, जो पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ से संबंधित होने का संकेत देता है।
शिकायतकर्ता ने कहा कि ये वस्तुएं संस्थान की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा प्रतीत होती हैं और इन्हें भारत से अनधिकृत तरीके से बाहर ले जाया गया है। पीजीआईएमईआर की संपत्ति की चोरी और अवैध रूप से हटाए जाने के संबंध में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित विरासत फर्नीचर कब, कैसे और किन परिस्थितियों में भारत से बाहर पहुंचा तथा इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
फ्रांस में प्रस्तावित नीलामी को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन पहले ही विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग कर चुका है ताकि विरासत फर्नीचर की नीलामी रोकी जा सके और चंडीगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।












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