August 27, 2026 10:35 pm

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फिर गूंजेगी बीन, लुप्त होती लोक परंपरा को मिलेगा मंच

2 सितंबर को राज्य स्तरीय बीन वादन प्रतियोगिता, विजेता दल को 75 हजार रुपये का प्रथम पुरस्कार

8 से 10 कलाकारों की होगी, टीम कम से कम तीन से चार बीन वादक जरूरी

हरियाणवी लोक परिधान में देनी होगी प्रस्तुति
रमेश गोयत
पंचकूला, 27 अगस्त: कभी हरियाणा की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की पहचान रही बीन की धुन अब धीरे-धीरे गुम होती जा रही है। बदलते दौर में इस पारंपरिक वाद्य और इससे जुड़े कलाकारों को फिर से मंच देने की पहल शुरू की गई है। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से दो सितंबर को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय बीन वादन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। पहल का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि हरियाणा की लोक संगीत परंपरा की इस पुरानी कड़ी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
प्रतियोगिता सुबह 10 बजे मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर (हरियाणा कला परिषद) कुरुक्षेत्र में होगी। इसमें प्रदेश के बीन वादक दल अपनी प्रस्तुति देंगे। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग का मानना है कि ऐसे आयोजनों से बीन वादन से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और लोक संगीत की इस परंपरा को संरक्षण एवं प्रोत्साहन मिल सकेंगा।
बीन हरियाणा की पारंपरिक लोक धुनों में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण वाद्य रहा है। ग्रामीण अंचल में लोक कलाकारों और पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ इसकी धुन लंबे समय तक लोगों के सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रही। लेकिन आधुनिक मनोरंजन के साधनों और बदलती सांस्कृतिक प्राथमिकताओं के बीच बीन वादन से जुड़े कलाकारों और नई पीढ़ी के बीच यह परंपरा सीमित होती गई है। ऐसे में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता को इस विरासत को दोबारा लोगों के बीच लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
*पुरस्कारों के जरिए कलाकारों को प्रोत्साहन*
बीन वादन प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दलों को प्रथम पुरस्कार 75,000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 60,000 रुपये और तृतीय पुरस्कार 50,000 रुपये दिया जाएगा। इसके अलावा पांच सांत्वना पुरस्कार भी होंगे, जिनमें प्रत्येक विजेता दल को 10,000 रुपये मिलेंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कलाकार का हरियाणा का मूल निवासी होना अनिवार्य है। प्रतिभागियों को आधार कार्ड साथ लाना होगा। प्रत्येक दल में आठ से 10 कलाकार होंगे, जिनमें कम से कम तीन से चार बीन वादक शामिल होना जरूरी है। प्रस्तुति हरियाणवी लोक परिधान में देनी होगी। प्रतियोगिता में शामिल होने वाले दलों को किसी प्रकार का यात्रा भत्ता या दैनिक भता नहीं दिया जाएगा। आयोजन के जरिए उम्मीद है कि बीन की धुन केवल मंच पर नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक स्मृति में भी फिर से मजबूत जगह बनाएगी।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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