बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
चंडीगढ़, 27 अगस्त। हरियाणा विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने काले कपड़े पहनकर विधानसभा तक मार्च किया। इस दौरान विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और NEET आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों के साथ कथित बर्बरता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने “चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में” जैसे नारे लगाए।
पुलिस ने कांग्रेस विधायकों को विधानसभा की ओर जाने से रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे कई विधायकों को चोटें आईं।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर हो या विधानसभा तक मार्च, देश के प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर पुलिस ने कांग्रेस विधायकों के साथ बल प्रयोग किया।
हुड्डा ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि आरोप जून 2026 की शुरुआत में सामने आए थे और 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को आने के बावजूद एफआईआर 25 जून को दर्ज की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोप सामने आने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई और क्या इससे सबूत प्रभावित होने की आशंका नहीं थी।
नेता प्रतिपक्ष ने एसआईटी की रिपोर्ट में सामने आए कथित सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गिनती प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा गार्ड, फ्रिस्किंग, पॉकेट रहित कपड़े और 180 दिन की CCTV फुटेज जैसी अनिवार्य SOP का पालन नहीं किया गया। उनके मुताबिक CCTV फुटेज केवल 45 दिनों तक रखी गई। कांग्रेस ने पूछा कि इन व्यवस्थाओं में चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ट्रस्ट प्रबंधन पर प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस यह भी जानना चाहती है कि बड़े नामों को क्लीन चिट कैसे दी गई। उनका सवाल था कि क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है और क्या इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच करोड़ों रुपये की चोरी केवल निचले स्तर के कर्मचारी कर सकते हैं।

NEET आंदोलन और पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया
हुड्डा ने जंतर-मंतर पर NEET आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पैलेट गन से घायल हुए एक युवा की एफआईआर दर्ज करने से भी इनकार किया गया था। हुड्डा ने कहा कि राहुल गांधी के विरोध और थाने में धरने के बाद एफआईआर दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि हरियाणा कांग्रेस छात्रों और युवाओं के मुद्दों को सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाती रहेगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को उन्होंने युवाओं और छात्रों के संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने सरकार से आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज का सामना करने वाले विद्यार्थियों से माफी मांगने तथा छात्रों पर कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी।
हुड्डा ने पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में देशभर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए पेपर लीक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया।
उन्होंने दावा किया कि देश में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जबकि हरियाणा में 30 से अधिक पेपर लीक के मामले हुए हैं। इनमें HCS, CET, SI भर्ती, डेंटल सर्जन, पुलिस कांस्टेबल, ग्राम सचिव, क्लर्क, PTI, HTET और अन्य भर्ती परीक्षाओं का उल्लेख किया गया। हुड्डा ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और नौकरियों का एक बड़ा रैकेट सक्रिय है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
कांग्रेस ने विधानसभा सत्र के दौरान इन मुद्दों पर सरकार को घेरने और जवाबदेही तय करने का ऐलान किया है।















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