होटल प्रबंधन की पढ़ाई स्विट्जरलैंड से वर्ष 1995 में पूर्ण करने के बाद मेरे मन में एक ही विचार था कि अपने देश और समाज के लिए कुछ ऐसा करूं, जिससे जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सके। इसी भावना के साथ वर्ष 2010 में मैंने “मां का आशीर्वाद” नाम से एक सामाजिक संगठन की शुरुआत की। यह संस्था आज भी गैर-पंजीकृत है, क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि समाज सेवा के लिए संस्था का पंजीकरण नहीं, बल्कि सेवा का समर्पण और निस्वार्थ भावना आवश्यक है।
शुरुआती वर्षों में आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता के कारण मैंने विभिन्न कंपनियों में कार्य किया, लेकिन साथ ही अपनी संस्था के माध्यम से सामाजिक सेवा का कार्य भी निरंतर जारी रखा। मैं स्वयं ही संस्था का अध्यक्ष, कार्यकर्ता, योजनाकार और निर्णयकर्ता हूं। मानव सेवा के इस मिशन में मैं चौबीसों घंटे तत्पर रहता हूं, क्योंकि रक्त की आवश्यकता समय देखकर नहीं आती।
प्रारंभ में “मां का आशीर्वाद” केवल रक्तदान शिविरों के आयोजन और जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराने तक सीमित था। परंतु लगातार सेवा, समर्पण और लोगों के विश्वास के कारण कुछ ही वर्षों में संस्था ने एक विशेष पहचान बना ली। स्थिति यह हो गई कि भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के विभिन्न देशों से भी रक्त की आवश्यकता होने पर लोग मुझसे संपर्क करने लगे।
मानव सेवा के इस सफर में मैं रेड क्रॉस सोसायटी, ह्यूमन सोशल फाउंडेशन (ब्लड ग्रुप), ऑल इंडिया एनजीओ एसोसिएशन, एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन तथा मदर टेरेसा फाउंडेशन सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आजीवन सदस्य बना।
वर्ष 2019 के बाद संस्था को व्यापक जनसमर्थन और सहयोग मिलने लगा, जिससे सेवा कार्यों का विस्तार हुआ। वर्ष 2021 में “मां का आशीर्वाद” को प्रतिष्ठित कॉनराड एन. हिल्टन ह्यूमैनिटेरियन पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया तथा मुझे पद्मश्री सम्मान हेतु नामांकन प्राप्त हुआ। यह मेरे लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज सेवा के प्रति लोगों के विश्वास का सम्मान था।
वर्ष 2022 मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। मुझे पीटा इंडिया (PETA India) द्वारा “वॉलंटियर ऑफ द ईयर” सम्मान से नवाजा गया। साथ ही वर्ल्ड किंग्स (वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यूनियन) द्वारा विशेष सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया तथा विश्व के शीर्ष 100 रिकॉर्ड धारकों में मेरा चयन हुआ।
आज समाज में मैं अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा हूं। इनमें मां का आशीर्वाद के अध्यक्ष, मदर टेरेसा फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष, भारत मानवाधिकार मिशन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, हरियाणा राज्य सलाहकार, इंडिया रीडिफाइंड के उपाध्यक्ष, इंटरनेशनल टीचर्स एसोसिएशन के एंबेसडर, ग्लोबल पीस एंबेसडर, कोविड-19 कम्युनिटी इम्युनिटी ग्लोबल डायरेक्टर, मानवता एवं शांति दूत, अंगदान हरियाणा राज्य सलाहकार, एंटी करप्शन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के एंबेसडर, सोशल केयर एडवोकेट, वर्ल्ड गुडविल सदस्य, एनजीओ वर्ल्ड एंबेसडर, पॉजिटिव चेंज एंबेसडर, विजन एंबेसडर, वेलनेस ग्रीन एंबेसडर तथा भारतीय स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर जैसी अनेक भूमिकाएं शामिल हैं।
मैं वर्ल्ड पार्किंसन संगठन का सक्रिय सदस्य भी हूं और उनके लिए जागरूकता एवं धन संग्रह अभियानों में भाग लेता हूं। इस संगठन ने मुझे कनाडा और कोलकाता में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया, जहां मैंने अपने जीवन अनुभव साझा किए। मेरा विषय था— “पार्किंसन जैसी चुनौतीपूर्ण बीमारी के बावजूद सकारात्मक सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भावना के बल पर असाधारण उपलब्धियां कैसे प्राप्त की जा सकती हैं।”
मेरा जीवन-दर्शन अत्यंत सरल है—
“देश और समाज के लिए अच्छा कार्य करते रहिए, उसे सिद्ध करने में समय व्यर्थ मत कीजिए। आपके कर्म स्वयं आपकी पहचान बन जाएंगे।”
मानवता की सेवा ही मेरे जीवन का उद्देश्य है और जब तक जीवन है, यह यात्रा निरंतर चलती रहेगी।
— डॉ. आशीष चौपड़ा













Total Users : 416383
Total views : 667451