September 19, 2026 10:04 pm

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व्हाट्सऐप पर एमडी बनकर कंपनी से ठगे 1.96 करोड़ रुपये, साइबर क्राइम पुलिस ने तीन और आरोपियों को दबोचा

बॉस स्कैम में कंपनी के अकाउंट ऑफिसर को भेजा था व्हाट्सऐप मैसेज, एमडी की फोटो और नाम का किया इस्तेमाल; ठगी की रकम मंगवाने के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 19 सितंबर। चंडीगढ़ पुलिस की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने संगठित साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 1.96 करोड़ रुपये के व्हाट्सऐप इम्पर्सोनेशन ‘बॉस स्कैम’ मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपियों ने एक कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) की पहचान का इस्तेमाल कर कंपनी के अकाउंट ऑफिसर को व्हाट्सऐप के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिलवाए।
यह मामला एफआईआर नंबर 60, दिनांक 17 अप्रैल 2026 से संबंधित है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 319(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज किया था

एमडी बनकर अकाउंट ऑफिसर को भेजा व्हाट्सऐप मैसेज
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता, जो चंडीगढ़ के शिवालिक एन्क्लेव का निवासी है, ने अपनी कंपनी के साथ हुई 1,96,00,000 रुपये की साइबर ठगी की शिकायत दी थी।
जांच में सामने आया कि साइबर ठगों ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर का नाम और प्रोफाइल फोटो इस्तेमाल कर उसके अकाउंट ऑफिसर से व्हाट्सऐप पर संपर्क किया। आरोपी ने खुद को कंपनी का एमडी बताते हुए अकाउंट ऑफिसर को एक बैंक खाते में 1.96 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। अकाउंट ऑफिसर ने व्हाट्सऐप पर मिले निर्देशों को वास्तविक समझकर रकम निर्धारित बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी।
पुलिस के मुताबिक यह खाता नोएडा, उत्तर प्रदेश में संचालित किया जा रहा था।

बैंक खातों के जरिए रकम निकालने का आरोप
जांच के दौरान पुलिस ने अंकित कुमार, उज्जवल त्यागी और नितेश को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार इन आरोपियों की भूमिका कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए बैंक खातों की व्यवस्था कराने और रकम को आगे ठगों तक पहुंचाने से जुड़ी है।
अंकित कुमार पर आरोप है कि उसने उज्जवल और नितेश के माध्यम से अपना बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया। इस खाते में कथित तौर पर ठगी की रकम में से 3.50 लाख रुपये प्राप्त हुए। पुलिस के मुताबिक अंकित ने चेक के जरिए पूरी रकम निकालकर कमीशन के बदले ठगों को सौंप दी।
उज्जवल त्यागी पर आरोप है कि उसने नितेश के माध्यम से अंकित का बैंक खाता ठगों तक पहुंचाने में मदद की। पुलिस का कहना है कि उज्जवल ने इससे पहले भी एक अन्य साइबर ठगी के मामले में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। वह मामला किसी अन्य राज्य की शिकायत से संबंधित बताया गया है। पुलिस के अनुसार उस मामले में भी रकम निकालकर कमीशन के बदले ठगों को देने का आरोप है।
नितेश पर आरोप है कि उसने उज्जवल के माध्यम से अंकित का बैंक खाता हासिल कर उसे साइबर ठगों को उपलब्ध कराया। साथ ही उसने अंकित और साइबर ठगों के बीच संचार में समन्वय किया। पुलिस के मुताबिक नितेश ने इससे पहले भी एक अन्य साइबर अपराध से संबंधित मामले में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था और कथित तौर पर रकम निकालकर ठगों को दी थी।

पहले भी दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार इस मामले की जांच के दौरान 17 अगस्त 2026 को दिनेश भाटी उर्फ अरविंद चौधरी और कुलदीप उर्फ बंटू सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था। दोनों की गिरफ्तारी कथित तौर पर उस लाभार्थी खाते/कंपनी से जुड़े मामले में की गई थी, जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी की रकम के लेन-देन में हुआ था।
इस तरह मामले में अब तक की जांच में कई आरोपियों की भूमिका सामने आ चुकी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

तीन मोबाइल, सिम और बैंक दस्तावेज बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कार्रवाई के दौरान:
3 मोबाइल फोन
3 सिम कार्ड
1 चेक बुक
1 पासबुक
1 डेबिट कार्ड
बरामद किए हैं।
पुलिस ने उज्जवल त्यागी और नितेश के मोबाइल फोन की जांच भी की है। जांच के दौरान व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। इन साक्ष्यों की जांच कर आरोपियों की भूमिका और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

1.96 करोड़ की पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही पुलिस
साइबर क्राइम पुलिस अब 1.96 करोड़ रुपये की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाने में जुटी है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि रकम किन-किन बैंक खातों में गई, अंतिम लाभार्थी कौन थे और ठगी की रकम को निकालने या आगे ट्रांसफर करने में कितने लोग शामिल थे।
पुलिस बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों के बीच हुई बातचीत की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य साइबर ठगी मामलों से भी आरोपियों के संभावित संबंधों की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर की कार्रवाई
आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी इनपुट और जांच के आधार पर साइबर क्राइम थाना चंडीगढ़ की टीम गठित की गई। टीम में एएसआई धर्मिंदर सिंह, जांच अधिकारी तथा साइबर क्राइम थाना चंडीगढ़ के अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
कार्रवाई एसएचओ/साइबर क्राइम थाना के नेतृत्व में राजेश कुमार शर्मा, आईपीएस, एसएसपी/साइबर के पर्यवेक्षण तथा पाटिल स्वागात राजकुमार, DANIPS, डीएसपी/साइबर क्राइम के मार्गदर्शन में की गई।
पुलिस के अनुसार सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है।

कंपनियों और लोगों को पुलिस की एडवाइजरी
साइबर क्राइम थाना चंडीगढ़ ने नागरिकों और कारोबारी संस्थानों से व्हाट्सऐप इम्पर्सोनेशन और बॉस स्कैम से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि व्हाट्सऐप पर किसी अधिकारी या कंपनी के वरिष्ठ पदाधिकारी के नाम और फोटो से आने वाले वित्तीय निर्देशों पर बिना सत्यापन के कार्रवाई न करें।

पुलिस की प्रमुख सलाह:
व्हाट्सऐप या ईमेल से मिले बड़े भुगतान के निर्देशों को संबंधित व्यक्ति से सीधे फोन करके सत्यापित करें।
केवल व्हाट्सऐप प्रोफाइल फोटो और नाम देखकर किसी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा न करें।
मैसेजिंग ऐप पर मिले निर्देश के आधार पर तुरंत रकम ट्रांसफर न करें।
किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, सीवीवी, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
साइबर वित्तीय ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज कराएं।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी की स्थिति में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, रकम को ट्रेस या फ्रीज कराने की संभावना उतनी ही बेहतर हो सकती है। मामले में आगे की जांच के आधार पर अन्य आरोपियों और ठगी के नेटवर्क से जुड़े खातों का पता लगाया जा रहा है।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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