October 28, 2026 8:48 am

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सीटीयू बस स्टैंड के समानांतर चंडीगढ़ में बने निजी बसों के अघोषित अड्डे! संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

एसटीए की सेटिंग ने बिगड़ी सीटीयू की सेहत, सीटीयू व चंडीगढ़ प्रशासन को करोड़ो का नुकसान

निजी बसों के कथित अवैध संचालन पर रोक लगाने में विभागों की नाकामी का आरोप, अधिकारियों और बस संचालकों के बीच मिलीभगत की जांच की मांग;

राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक से हस्तक्षेप की अपील

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 16 अक्तूबर। शहर में सरकारी परिवहन व्यवस्था के समानांतर निजी बसों के कथित अघोषित अड्डे संचालित होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) के बस स्टैंड के आसपास और अन्य प्रमुख स्थानों पर निजी बसों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन संबंधित विभाग इन पर प्रभावी रोक लगाने में विफल साबित हो रहे हैं। इस मामले को लेकर परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए चंडीगढ़ के प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल से हस्तक्षेप करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है।
आरोप है कि सेक्टर-43 बस स्टैंड और ट्रिब्यून चौक सहित शहर के कुछ प्रमुख स्थानों पर निजी बसों के ठहराव, यात्रियों को बैठाने और लंबी दूरी की बस सेवाओं के संचालन से सरकारी परिवहन व्यवस्था के समानांतर एक अलग नेटवर्क विकसित हो रहा है। यदि ये गतिविधियां निर्धारित परमिट और परिवहन नियमों के विपरीत संचालित हो रही हैं, तो इससे सीटीयू की बस सेवाओं और राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सीटीयू के बस स्टैंड के समानांतर निजी बसों के अड्डे होने का आरोप

शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए सीटीयू के बस स्टैंड और निर्धारित बस स्टॉप की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद निजी बसों के कथित अघोषित अड्डों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ निजी बस संचालक प्रमुख स्थानों पर यात्रियों को एकत्रित कर उन्हें दूसरे राज्यों के लिए रवाना करते हैं। इससे यह सवाल पैदा होता है कि क्या संबंधित बसों को वहां ठहरने, यात्रियों को बैठाने और निर्धारित मार्गों पर संचालन करने की वैध अनुमति प्राप्त है।
यदि किसी स्थान पर बिना आवश्यक अनुमति के निजी बसों का अड्डा संचालित हो रहा है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है कि वे मौके पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करें। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित स्थानों पर बसों के ठहराव और संचालन के लिए क्या नियम लागू हैं।

संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल

निजी बसों के कथित अवैध संचालन को रोकने में संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि नियमों के विपरीत बसों का संचालन हो रहा है, तो उसकी नियमित जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
मामले में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) सहित परिवहन व्यवस्था से जुड़े विभागों की भूमिका की जांच की मांग उठाई जा रही है। यह पता लगाने की आवश्यकता जताई गई है कि संबंधित बसों के परमिट, निर्धारित मार्ग, ठहराव स्थल और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जा रही है या नहीं।
हालांकि, विभागीय अधिकारियों की लापरवाही अथवा किसी प्रकार की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के माध्यम से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

अधिकारियों और बस संचालकों के बीच मिलीभगत का आरोप, जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि निजी बसों का कथित अवैध संचालन संबंधित अधिकारियों की जानकारी के बिना लंबे समय तक जारी रहना संभव नहीं है। इसी आधार पर अधिकारियों और निजी बस संचालकों के बीच कथित मिलीभगत की जांच कराने की मांग की जा रही है।
इस संबंध में प्रशासन से मांग की जा रही है कि केवल मौके पर खड़ी बसों की जांच तक कार्रवाई सीमित न रखी जाए, बल्कि उनके संचालन की पूरी व्यवस्था की पड़ताल की जाए।
जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि बसों के पास वैध परमिट हैं या नहीं, उन्हें निर्धारित मार्गों पर चलने की अनुमति है या नहीं और क्या यात्रियों को बैठाने के लिए संबंधित स्थानों का इस्तेमाल नियमों के अनुसार किया जा रहा है।
यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी की संलिप्तता, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन में मदद करने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

यूपी और बिहार के लिए चलने वाली बसें भी जांच के दायरे में लाने की मांग
चंडीगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए संचालित होने वाली निजी बसों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ डबल डेकर बसें आवश्यक परमिट के बिना संचालित हो रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित वाहनों के दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकती है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लंबी दूरी की बस सेवाओं के संचालन में परमिट और अन्य वैधानिक शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। प्रशासन को यह जांचना चाहिए कि संबंधित बसें निर्धारित मार्गों पर चल रही हैं या नहीं और उनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।
यदि किसी बस का संचालन नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

सीटीयू को आर्थिक नुकसान होने की आशंका

निजी बसों के कथित अवैध संचालन को लेकर सीटीयू को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान का मुद्दा भी उठाया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि यदि निजी बसें नियमों का उल्लंघन करते हुए सरकारी परिवहन सेवाओं के समानांतर यात्रियों को ढोती हैं, तो इसका असर सीटीयू की यात्री संख्या और टिकट से होने वाली आय पर पड़ सकता है।
हालांकि, सीटीयू को वास्तव में कितना आर्थिक नुकसान हुआ है, इसका आकलन करने के लिए आधिकारिक राजस्व आंकड़ों, यात्रियों की संख्या और संबंधित मार्गों के संचालन रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
प्रशासन को इस पहलू की भी समीक्षा करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निजी बसों के संचालन से सरकारी परिवहन व्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।

राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक से हस्तक्षेप की अपील

इस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक से हस्तक्षेप करने की अपील की है। मांग की गई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की जाए और निजी बसों के कथित अवैध संचालन की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
सीटीयू बस स्टैंड के समानांतर कथित रूप से संचालित निजी बस अड्डों की जांच कराई जाए।
सेक्टर-43 बस स्टैंड और ट्रिब्यून चौक सहित प्रमुख स्थानों पर निजी बसों के ठहराव और संचालन की वैधता की जांच हो।
चंडीगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली निजी बसों के परमिट तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाए।
स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए।
अधिकारियों और निजी बस संचालकों के बीच कथित मिलीभगत के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
नियमों का उल्लंघन करने वाले बस संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सीटीयू को संभावित आर्थिक नुकसान का आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
चंडीगढ़ में सरकारी और निजी परिवहन सेवाओं का संचालन निर्धारित नियमों के तहत होना आवश्यक है। किसी भी निजी बस को केवल निजी होने के कारण अवैध नहीं माना जा सकता, लेकिन यदि उसका संचालन परमिट की शर्तों या अन्य लागू नियमों के विरुद्ध हो रहा है, तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे उचित कार्रवाई करें।
ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शहर में निजी बसों के कथित अघोषित अड्डों को लेकर उठ रही शिकायतों पर संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं। यदि शिकायतों में तथ्य हैं, तो जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो आधिकारिक तथ्यों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि चंडीगढ़ के प्रशासक और संबंधित परिवहन विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और निजी बसों के कथित अवैध संचालन तथा अधिकारियों की संभावित मिलीभगत को लेकर उठाए गए सवालों की जांच कब शुरू होती है।

सेक्टर-43 बस स्टैंड और ट्रिब्यून चौक पर निजी बसों की गतिविधियों का मुद्दा

सीटीयू यूनियन ने सेक्टर-43 बस स्टैंड और ट्रिब्यून चौक के आसपास निजी बसों की गतिविधियों पर भी चिंता जताई है। आरोप है कि इन स्थानों पर निजी बसों की आवाजाही और यात्रियों को बैठाने की गतिविधियों के कारण सरकारी परिवहन व्यवस्था के समानांतर निजी परिवहन का नेटवर्क विकसित हो रहा है।

सीटीयू यूनियन नेताओं का कहना है कि सेक्टर-43 बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र पर बसों का संचालन निर्धारित नियमों और परमिट की शर्तों के अनुसार होना चाहिए। यदि कोई निजी बस निर्धारित अनुमति के बिना यात्रियों को बैठाती है या नियमों के विपरीत बस सेवा संचालित करती है, तो संबंधित विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए।
यूनियन का आरोप है कि कुछ स्थानों पर निजी बसों की गतिविधियां इस तरह बढ़ रही हैं कि वे सरकारी परिवहन व्यवस्था के सामने प्रतिस्पर्धी विकल्प बनती जा रही हैं। इससे सीटीयू की बस सेवाओं पर व्यावसायिक दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, किसी स्थान पर निजी बसों की मौजूदगी मात्र से उनका संचालन अवैध साबित नहीं होता। इसके लिए बसों के परमिट, निर्धारित मार्ग, स्टॉपेज और संचालन की शर्तों की जांच करना आवश्यक है।

यूपी और बिहार के लिए डबल डेकर बसों के संचालन पर सवाल

सीटीयू यूनियन ने चंडीगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए चलने वाली निजी डबल डेकर बसों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कुछ बसें बिना आवश्यक परमिट के संचालित हो रही हैं और यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए ले जाया जा रहा है।
यदि जांच में किसी बस का संचालन बिना वैध परमिट या निर्धारित नियमों के उल्लंघन में पाया जाता है, तो संबंधित संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में बस के परमिट, पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
यूनियन का कहना है कि लंबी दूरी की निजी बस सेवाओं पर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। विशेष रूप से उन बसों की जांच की जानी चाहिए जो चंडीगढ़ से दूसरे राज्यों के लिए यात्रियों को लेकर रवाना होती हैं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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