October 28, 2026 8:29 am

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राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने चंडीगढ़ के पहले हुनर उत्सव का किया उद्घाटन

सुखना झील पर विद्यार्थियों ने हुनर, हस्तकला और उद्यमशीलता का किया प्रदर्शन, 28 अक्टूबर को भी देख सकेंगे प्रदर्शनी

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 27 अक्टूबर। पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने मंगलवार को सुखना झील पर चंडीगढ़ के पहले हुनर उत्सव 2026 – कौशल, संस्कृति, समृद्धि का उद्घाटन किया। स्कूल शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से आयोजित इस उत्सव में विद्यार्थियों ने अपने व्यावसायिक कौशल, रचनात्मक प्रतिभा, हस्तनिर्मित उत्पादों और उद्यमशीलता का प्रदर्शन किया। उत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम में चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। शिक्षा सचिव प्रेरणा पुरी और निदेशक स्कूल शिक्षा नितिश सिंगला सहित अन्य अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

विद्यार्थियों के हुनर को मिला बाजार से जुड़ने का अवसर
उद्घाटन के दौरान प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने विद्यार्थियों की ओर से लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और उनके कार्यों के बारे में जानकारी ली। इन स्टॉलों पर विद्यार्थियों ने अपने हाथों से तैयार किए गए उत्पादों, कलात्मक वस्तुओं और विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
उत्सव की विशेषता यह रही कि विद्यार्थियों को केवल अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का ही अवसर नहीं मिला, बल्कि वे ग्राहकों से संवाद करने, अपने उत्पादों की खूबियां बताने और बाजार की मांग को समझने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों को यह समझने में मदद करती हैं कि किसी कौशल को रोजगार और आय अर्जित करने के अवसर में कैसे बदला जा सकता है।

अलग-अलग स्टॉलों पर दिखी रचनात्मकता
हुनर उत्सव में विद्यार्थियों की रुचि और प्रशिक्षण के अनुरूप अलग-अलग विषयों पर आधारित स्टॉल लगाए गए हैं। प्रत्येक स्टॉल के माध्यम से किसी विशेष कौशल, कला या व्यावसायिक गतिविधि को प्रदर्शित किया जा रहा है।
सुई धागा कला: इस स्टॉल पर फैशन से जुड़ी रचनात्मक वस्तुओं और कपड़ा हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया गया।
सज्जावट: यहां दीये, मोमबत्तियां, तोरण और अन्य सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
रूप निखार: सौंदर्य एवं स्वास्थ्य-संवर्धन से संबंधित व्यावसायिक कौशल को सामने लाया गया।
मेहंदी घर: विद्यार्थियों ने मेहंदी की विभिन्न डिजाइनों और अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इंक एंड ग्लैम: इस स्टॉल पर नेल आर्ट और टैटू कला से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियां प्रदर्शित की गईं।
स्वाद वाटिका: विद्यार्थियों ने विभिन्न व्यंजन तैयार कर पाक-कला में अपनी दक्षता दिखाई।
इन स्टॉलों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने कौशल को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने और संभावित ग्राहकों के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, आगंतुकों को भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता और उनके व्यावहारिक प्रशिक्षण को करीब से देखने का मौका मिल रहा है।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच
उत्सव में समावेशिता और समान अवसरों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ‘हम किसी से कम नहीं’ नामक पहल के माध्यम से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की क्षमताओं, प्रतिभा और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया।
इसके अलावा, ‘उल्लास’ के माध्यम से वयस्क शिक्षा से जुड़ी पहलों को सामने लाया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य यह संदेश देना है कि सीखने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा पहचानने और आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।

खेल-खेल में तार्किक सोच विकसित करने की पहल
हुनर उत्सव में ‘सोचो, समझो, जीतो’ के तहत कौशल आधारित खेलों का भी आयोजन किया गया है। इन खेलों के माध्यम से आगंतुकों और विद्यार्थियों को तार्किक सोच, समस्या का समाधान खोजने तथा निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इस तरह उत्सव को केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसमें सीखने, रचनात्मकता और मानसिक कौशल को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।

कौशल आधारित शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर
हुनर उत्सव चंडीगढ़ प्रशासन की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत स्कूली शिक्षा को व्यावहारिक जीवन और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। कौशल आधारित शिक्षा से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानने, नए काम सीखने तथा भविष्य में स्वरोजगार के विकल्प तलाशने में मदद मिल सकती है।
इस प्रकार के आयोजनों से हस्तकला, कारीगरी और अन्य व्यावसायिक कौशल के प्रति सम्मान बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नवाचार और उद्यमशील सोच विकसित करने का अवसर मिलता है। विद्यार्थियों को कम उम्र से ही उत्पाद तैयार करने, उनकी गुणवत्ता पर ध्यान देने और उन्हें बाजार के अनुरूप प्रस्तुत करने का अनुभव देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

28 अक्टूबर को भी देख सकेंगे हुनर उत्सव
स्कूल शिक्षा विभाग ने शहरवासियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और अन्य आगंतुकों से हुनर उत्सव में पहुंचने की अपील की है। विभाग के अनुसार, 28 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक सुखना झील पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया जा सकेगा।
शहरवासी विभिन्न स्टॉलों पर विद्यार्थियों के हुनर और रचनात्मक कार्यों को देख सकते हैं तथा उनका उत्साहवर्धन कर सकते हैं। यह आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान दिलाने, कौशल आधारित शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करेगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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