October 28, 2026 9:55 am

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बेटी की मौत के गम में भी पिता ने दिखाया बड़ा दिल, कर्णवीर की किडनियों से दो मरीजों को मिला नया जीवन

20 वर्षीय कर्णवीर कौर विदेश जाकर संवारना चाहती थीं अपना भविष्य, सड़क हादसे में हुई थी मौत;

पिता जगदीप सिंह के अंगदान के फैसले ने दो परिवारों में जगाई उम्मीद

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 25 अक्टूबर। बेटी को खोने का दर्द किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय होता है, लेकिन इस गहरे दुख के बीच भी एक पिता ने ऐसा फैसला लिया, जिसने दो लोगों को जिंदगी की नई उम्मीद दे दी। पंजाब के संगरूर जिले के मुलोवाल गांव की 20 वर्षीय कर्णवीर कौर की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद उनके पिता जगदीप सिंह ने अंगदान की सहमति देकर मानवता की मिसाल पेश की। कर्णवीर की दोनों किडनियों का पीजीआईएमईआर (PGIMER), चंडीगढ़ में प्रत्यारोपण किया गया, जिससे 38 और 32 वर्षीय दो पुरुषों को नया जीवन जीने का अवसर मिला।
कर्णवीर की अपनी जिंदगी में अभी बहुत कुछ बाकी था। उन्होंने 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईईएलटीएस (IELTS) परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और विदेश जाकर अपने सपनों को साकार करने की तैयारी कर रही थीं। परिवार ने बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए कई सपने संजोए थे, लेकिन एक सड़क हादसे ने सब कुछ बदल दिया।

15 अक्टूबर को हुआ हादसा, 21 अक्टूबर को ब्रेन-स्टेम डेड घोषित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कर्णवीर कौर 15 अक्टूबर को सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। हादसे के बाद उन्हें पहले धूरी और लुधियाना के अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया। बाद में उन्हें बेहतर इलाज के लिए पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ लाया गया।
चिकित्सकीय जांच और निर्धारित प्रक्रियाओं के बाद 21 अक्टूबर को उन्हें ब्रेन-स्टेम डेड घोषित कर दिया गया। इस खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए माता-पिता ने उम्मीदें संजोई थीं, वह अब उनके बीच नहीं रही।
ऐसी कठिन परिस्थिति में कर्णवीर के पिता जगदीप सिंह ने अंगदान का फैसला लिया। उनके इस निर्णय से उनकी बेटी की दोनों किडनियों को दो जरूरतमंद मरीजों में प्रत्यारोपित करने का रास्ता खुला। इस तरह कर्णवीर के जाने के बाद भी उनके अंगों के माध्यम से दो लोगों को अपने जीवन में नई शुरुआत की उम्मीद मिली।

‘बेटी को खो दिया, लेकिन उसका उपहार दूसरों को जीने का मौका देगा’
कर्णवीर के पिता जगदीप सिंह ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा बड़ा हो, अपने सपने पूरे करे और जीवन में आगे बढ़े। कर्णवीर ने आईईएलटीएस परीक्षा पास कर ली थी और विदेश जाने की तैयारी कर रही थीं। परिवार ने भी उनके भविष्य को लेकर अनेक सपने देखे थे।
उन्होंने कहा कि बेटी के हमेशा के लिए चले जाने की सच्चाई को स्वीकार करना शब्दों से परे पीड़ा है। इसके बावजूद उन्होंने अंगदान का निर्णय इसलिए लिया, ताकि उनकी बेटी का कोई हिस्सा दूसरों के जीवन में उम्मीद बनकर रह सके।
जगदीप सिंह के अनुसार, यदि उनकी बेटी के अंगों से दो लोगों को नया जीवन मिल सकता है और दो परिवारों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट सकती है, तो इससे बड़ा संतोष कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि कर्णवीर के अंगों से लाभ पाने वाले दोनों मरीज आगे अपना जीवन जी सकेंगे, अपने सपने पूरे कर सकेंगे और भविष्य की ओर आशा के साथ देख पाएंगे।
एक पिता का यह फैसला बताता है कि असहनीय निजी दुख के बीच भी दूसरों के जीवन के लिए उम्मीद का रास्ता बनाया जा सकता है।

पीजीआई निदेशक ने परिवार के साहस को किया नमन
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कर्णवीर के परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि व्यक्तिगत दुख की अत्यंत कठिन घड़ी में अंगदान का निर्णय लेना असाधारण साहस और मानवीय संवेदनशीलता का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि कर्णवीर के परिवार के इस फैसले से दो मरीजों को जीवन का नया अवसर मिला है। युवा बेटी को खोने की क्षति की भरपाई कोई नहीं कर सकता, लेकिन उसके अंगों से जिन लोगों के जीवन को नई उम्मीद मिली है, उनके माध्यम से उसकी विरासत जीवित रहेगी।
प्रो. विवेक लाल ने आशा जताई कि यह घटना अधिक से अधिक परिवारों को अंगदान के महत्व पर विचार करने और इस विषय में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।

किडनी प्रत्यारोपण से मरीजों को मिल सकती है बेहतर जीवन गुणवत्ता
पीजीआईएमईआर के नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एच.एस. कोहली ने कहा कि गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रत्यारोपण बेहतर जीवन गुणवत्ता और अधिक स्वतंत्रता का अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि, उपयुक्त दाता अंगों की उपलब्धता अक्सर बड़ी चुनौती बनी रहती है।
उन्होंने कर्णवीर के परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि परिवार के इस निर्णय से दो मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण संभव हो सका और उन्हें भविष्य के लिए नई उम्मीद मिली।
वहीं, रीनल ट्रांसप्लांटेशन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष शर्मा ने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए दाता अंगों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन, विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होता है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत दाता परिवार की उदारता से होती है।
उन्होंने कहा कि अपनी युवा बेटी को खोने के असहनीय दुख के बावजूद जगदीप सिंह ने दो मरीजों को अपना जीवन फिर से संवारने का अवसर देने का निर्णय लिया। इसके लिए पूरा चिकित्सा समुदाय परिवार का आभारी है।

अंगदान की प्रक्रिया में संवेदनशीलता और समन्वय जरूरी
पीजीआईएमईआर के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ. नवदीप बंसल ने कहा कि अंगदान की प्रक्रिया में संवेदनशील परामर्श, समय पर समन्वय और दाता परिवार के साथ चिकित्सा टीमों का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। ऐसे कठिन समय में परिवार को सहारा देने के लिए करुणा और सहानुभूति की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि गहरे दुख के बीच जगदीप सिंह के फैसले से दो मरीजों को जीवनरक्षक अंग मिल सके। यह उदाहरण दिखाता है कि किसी एक परिवार का निर्णय कई लोगों के जीवन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।
ROTTO नॉर्थ के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया ने भी कर्णवीर की कहानी को अंगदान की जीवन बचाने वाली क्षमता का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि परिवारों को अंगदान के विषय में खुलकर चर्चा करनी चाहिए और इसके प्रति जागरूकता बढ़ानी चाहिए, ताकि प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अधिक से अधिक मरीजों को जीवन का दूसरा अवसर मिल सके।

अधूरे रह गए कर्णवीर के सपने, लेकिन दूसरों को मिला भविष्य
कर्णवीर कौर विदेश जाकर अपने भविष्य को संवारना चाहती थीं। आईईएलटीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने अपने सपनों की दिशा में कदम बढ़ा दिए थे, लेकिन सड़क हादसे ने उनकी जीवन यात्रा को असमय समाप्त कर दिया।
उनके परिवार के लिए यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती। फिर भी उनके पिता के अंगदान के फैसले ने इस दुख के बीच उम्मीद की एक किरण जगाई है। कर्णवीर की किडनियों से दो मरीजों को नया जीवन जीने का अवसर मिला है। उनके अंगदान ने यह संदेश दिया है कि अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी दूसरे परिवार के लिए जीवन और भविष्य की संभावना भी है।
कर्णवीर अब अपने सपने पूरे करने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके पिता के साहसिक निर्णय ने दो अन्य लोगों के सपनों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। बेटी को खोने के गम में डूबे एक पिता का यह फैसला मानवता, करुणा और निःस्वार्थ सेवा की ऐसी मिसाल है, जो लंबे समय तक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करती रहेगी।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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