October 31, 2026 11:53 am

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अधिकारी की सादगी ने जीता दिल, सेवानिवृत्त कर्मचारी को खुद गाड़ी चलाकर घर छोड़ने पहुंचे आईएएस सुशील सारवान

33 साल 6 माह की सेवा के बाद चालक यब्बू प्रसाद पांडे हुए सेवानिवृत्त, निदेशक की आत्मीय पहल की अधिकारियों और कर्मचारियों में हो रही सराहना

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 30 अक्टूबर। प्रशासनिक पद और अधिकार से बढ़कर मानवीय संवेदनाएं होती हैं। इसका एक भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक सुशील सारवान, आईएएस ने पेश किया। उन्होंने विभाग में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त चालक यब्बू प्रसाद पांडे को न केवल सम्मानपूर्वक विदाई दी, बल्कि स्वयं गाड़ी चलाकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाया। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की इस आत्मीय पहल ने अधिकारियों और कर्मचारियों का दिल जीत लिया।
यब्बू प्रसाद पांडे हरियाणा सरकार में 28 अप्रैल 1993 को सेवा में शामिल हुए थे। उन्होंने करीब 33 वर्ष 6 माह तक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। 31 अक्टूबर 2026 को उनकी सेवानिवृत्ति निर्धारित है। वर्तमान में वह एचआरडीएफ बोर्ड में चालक के पद पर कार्यरत थे।
कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किया काम
अपने लंबे सेवाकाल के दौरान यब्बू प्रसाद पांडे को प्रदेश के अनेक वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों, मुख्य सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ काम करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा और विभिन्न अधिकारियों के साथ काम करते हुए अनेक अनुभव हासिल किए।

अपने विदाई संदेश में उन्होंने उन सभी वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति आभार जताया, जिनके मार्गदर्शन और सहयोग से उन्हें अपने सेवाकाल में बहुत कुछ सीखने को मिला। इनमें आरके तेजा, आरके वर्मा, आरपी चंद्रा, हरदीप कुमार, अमिलश लिखी, एसके मोगा, अमित झा, अनुराग रस्तोगी, शिव रमन गौड़, उर्वशी गुलाटी, पी. राधाकृष्ण राव, राम निवास, नवराज सिद्धू और सुधीर राजपाल सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।

नौकरी खत्म होगी, लेकिन रिश्ते नहीं : पांडे
अपने भावुक विदाई संदेश में यब्बू प्रसाद पांडे ने कहा कि उनके लिए यह नौकरी केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। यहां काम करते हुए उन्हें अनेक अच्छे अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ जुड़ने, उनसे सीखने और जीवनभर याद रहने वाले अनुभव हासिल करने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि वह अपने सभी वरिष्ठ अधिकारियों और साथियों के सहयोग के लिए हृदय से आभारी हैं। भले ही आज उनकी सरकारी जिम्मेदारियां समाप्त हो रही हैं, लेकिन सहकर्मियों के साथ बने रिश्ते कभी समाप्त नहीं होंगे।

अधिकारी के व्यवहार ने दिया सम्मान का संदेश
इस पूरे घटनाक्रम में निदेशक सुशील सारवान की पहल विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। किसी वरिष्ठ अधिकारी का स्वयं वाहन चलाकर सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसके घर तक छोड़ने जाना सामान्य औपचारिकता से अलग एक ऐसा व्यवहार है, जो कार्यस्थल पर आपसी सम्मान और अपनत्व की भावना को दर्शाता है।
अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उनकी इस पहल की सराहना हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि इस तरह का व्यवहार न केवल लंबे समय तक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को सम्मान का एहसास कराता है, बल्कि विभाग में सकारात्मक कार्यसंस्कृति और आपसी विश्वास को भी मजबूत करता है।
वास्तव में, किसी अधिकारी की पहचान केवल उसके पद, अधिकार और प्रशासनिक फैसलों से नहीं होती, बल्कि इस बात से भी होती है कि वह अपने साथ काम करने वाले कर्मचारियों के प्रति कैसा व्यवहार करता है। सुशील सारवान की इस पहल ने यही संदेश दिया कि सरकारी व्यवस्था में हर कर्मचारी का योगदान महत्वपूर्ण है और सम्मान का अधिकार सभी को है।
विभाग की ओर से यब्बू प्रसाद पांडे की 33 वर्ष 6 माह की समर्पित सेवाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए उनके सेवानिवृत्त जीवन के स्वस्थ, सुखद और मंगलमय होने की कामना की गई।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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