चंडीगढ़: हरियाणा में 10 जनवरी 2019 से लागू हरियाणा पुलिस (संशोधन) कानून, 2018 के बावजूद आज तक राज्य सुरक्षा आयोग (स्टेट सिक्योरिटी कमीशन) और पुलिस स्थापना कमेटी का गठन नहीं हो पाया है। कानून लागू हुए सात वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसकी अहम धाराओं पर अमल नहीं किया गया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और कानूनी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने हाल ही में हरियाणा के गृह विभाग में एक आरटीआई दायर की थी। आरटीआई के पहले बिंदु में हरियाणा पुलिस कानून, 2007 की धारा 26 के तहत राज्य सुरक्षा आयोग के गठन से संबंधित गजट नोटिफिकेशन और अब तक हुई बैठकों की जानकारी मांगी गई थी। इसके जवाब में गृह विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्य सुरक्षा आयोग के गठन को लेकर कोई भी गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।
हेमंत कुमार ने बताया कि राज्य सुरक्षा आयोग का मुख्य उद्देश्य पुलिस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, प्रदेश में जवाबदेह और प्रभावी पुलिसिंग के लिए दिशा-निर्देश जारी करना तथा पुलिस के संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा करना है। इस आयोग का अध्यक्ष मुख्यमंत्री, उपाध्यक्ष गृह मंत्री होता है। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष, एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज, एडवोकेट जनरल, मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और दो गैर-सरकारी सदस्य (जिसमें एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल होता है) इसके सदस्य होते हैं।
आरटीआई के दूसरे बिंदु में हरियाणा पुलिस कानून की धारा 34 के तहत पुलिस स्थापना कमेटी के गठन और उसकी बैठकों की जानकारी मांगी गई थी। इस पर भी गृह विभाग ने जवाब दिया कि ऐसी किसी कमेटी के गठन को लेकर कोई गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है।

हेमंत कुमार के अनुसार, मौजूदा कानून के तहत पुलिस स्थापना कमेटी के अध्यक्ष राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) होते हैं, जबकि सदस्यों में सीआईडी प्रमुख, पुलिस मुख्यालय का प्रशासनिक प्रमुख और कानून-व्यवस्था का मुखिया शामिल होते हैं। यह कमेटी इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिस कर्मियों के तबादले और तैनाती का निर्णय लेती है, जबकि डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारियों के तबादलों के लिए राज्य सरकार को सिफारिश करती है। कमेटी का गठन न होने के कारण पिछले सात वर्षों में किए गए पुलिस इंस्पेक्टरों के तबादलों और पोस्टिंग पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े हो रहे हैं।
हेमंत ने यह भी बताया कि गृह विभाग ने आरटीआई के जवाब में उन्हें डीजीपी कार्यालय से संपर्क करने को कहा और आरटीआई को वहां ट्रांसफर कर दिया, जबकि कानूनन इन संस्थाओं का गठन गृह विभाग द्वारा किया जाना चाहिए। बाद में डीजीपी कार्यालय के राज्य जन सूचना अधिकारी ने भी यही जवाब दिया कि उनके स्तर से भी इस संबंध में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2006 को प्रकाश सिंह केस में पुलिस सुधारों को लेकर ऐतिहासिक फैसला देते हुए सभी राज्यों को छह निर्देश जारी किए थे, जिनमें राज्य सुरक्षा आयोग और पुलिस स्थापना कमेटी का गठन अनिवार्य रूप से शामिल था। इसके बाद हरियाणा में 2007 में पुलिस कानून बनाया गया और बाद में खट्टर सरकार ने इसमें संशोधन कर राज्य पुलिस बोर्ड की जगह राज्य सुरक्षा आयोग का प्रावधान किया, लेकिन आज तक इसका गठन नहीं हो सका।
हेमंत कुमार का कहना है कि कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद इन महत्वपूर्ण संस्थाओं का गठन न होना राज्य में पुलिस सुधारों की दिशा में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।













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