पार्षद सुमन शर्मा के परिवार की सदस्य की गिरफ्तारी पर विवाद
चंडीगढ़/मोहाली: कड़ाके की ठंड के बीच चंडीगढ़ की सियासत अचानक गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुईं वार्ड नंबर-4 की पार्षद सुमन अमित शर्मा की जेठानी कोमल शर्मा की पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक माहौल तीखा हो गया है। यह कार्रवाई ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है, जब 26 जनवरी को चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव होने हैं और सत्ता संतुलन बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है।
सुमन शर्मा का AAP से BJP में जाना हाल के दिनों में नगर निगम की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा था। इसके तुरंत बाद उनके परिवार की सदस्य की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है, जबकि प्रशासन इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया बता रहा है।
सुबह-सुबह गिरफ्तारी, परिवार ने उठाए सवाल
पंजाब पुलिस ने मोहाली के सुहाना थाने में दर्ज एक मामले के आधार पर रविवार सुबह करीब 6 बजे चंडीगढ़ के सुभाष नगर स्थित आवास से कोमल शर्मा को हिरासत में लिया। परिजनों का आरोप है कि गिरफ्तारी के समय घर के अन्य सदस्य सो रहे थे और न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही समुचित नोटिस दिखाया गया।
कोमल शर्मा के पति सोनू शर्मा के अनुसार, वह उस समय मॉर्निंग वॉक पर थे। उन्होंने दावा किया कि पुलिस टीम में वर्दीधारी और सिविल ड्रेस में मौजूद कर्मी शामिल थे, जिन्होंने बिना विस्तृत जानकारी दिए कोमल शर्मा को अपने साथ ले गए। परिवार ने पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया और समय को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासनिक पृष्ठभूमि भी बनी चर्चा का विषय
कोमल शर्मा पूर्व में पंजाब वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड में कार्यरत रह चुकी हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को लेकर मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित न रहकर राजनीतिक विमर्श का विषय बन गया है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे हैं कि यह कार्रवाई महज संयोग है या बदलते राजनीतिक समीकरणों का परिणाम।
भाजपा का तीखा विरोध, थाने में शक्ति प्रदर्शन
गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जेपी मल्होत्रा समेत बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता मनीमाजरा थाने पहुंच गए। भाजपा नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।
भाजपा का आरोप है कि सुमन शर्मा के पार्टी बदलने के बाद उनके परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि “राजनीतिक दबाव में प्रशासनिक कार्रवाई” का सिलसिला नहीं रुका, तो पार्टी सड़कों से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करेगी।
मेयर चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक बेचैनी
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर पद को लेकर कांटे की टक्कर मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एक-एक पार्षद का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे में किसी पार्षद के परिवार से जुड़ी इस तरह की कार्रवाई ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
फिलहाल पंजाब पुलिस मामले में कानूनी प्रक्रिया का हवाला दे रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दखल बता रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चंडीगढ़ की राजनीति आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है। अब सभी की निगाहें जांच की दिशा और 26 जनवरी को होने वाले मेयर चुनाव के नतीजों पर टिकी हैं।













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