October 12, 2026 1:18 pm

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PUNJAB: पंजाब पुलिस ने वल्टोहा सरपंच हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई, दो शूटरों सहित सात गिरफ्तार

DGP गौरव यादव ने संगठित अपराध के विरुद्ध मुख्यमंत्री भगवंत मान की ज़ीरो टॉलरेंस नीति दोहराई

चंडीगढ़, 12 जनवरी: पंजाब पुलिस ने वल्टोहा के पूर्व सरपंच झरमल सिंह की हत्या की गुत्थी को महज़ कुछ ही दिनों में सुलझाते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने इस हत्याकांड में शामिल प्रभ दासूवाल गैंग के दो शूटरों सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने इस कार्रवाई को संगठित अपराध के विरुद्ध निर्णायक कदम बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया। डीजीपी ने कहा कि “पंजाब में सक्रिय अपराधी नर्क में भी नहीं छिप सकेंगे। हिंसक गतिविधियों में शामिल हर व्यक्ति को देश में या देश से बाहर किसी भी कोने से पकड़कर कानून के कटघरे में लाया जाएगा।”
डीजीपी गौरव यादव ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (काउंटर इंटेलिजेंस) अमित प्रसाद, पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय) डॉ. सुखचैन सिंह गिल और पुलिस आयुक्त अमृतसर गुरप्रीत सिंह भुल्लर की मौजूदगी में बताया कि जांच में इस हत्या का मास्टरमाइंड गैंगस्टर प्रभ दासूवाल सामने आया है। पुरानी रंजिश के चलते इस हत्या को पूरी तरह योजनाबद्ध और लक्षित तरीके से अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुखराज सिंह उर्फ गूंगा (20) निवासी ठक्करपुरा, तरनतारन; करमजीत सिंह (23) निवासी गांव पसनावाल, गुरदासपुर; जोबनप्रीत सिंह (19) निवासी गांव भाई लद्धू, तरनतारन; हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी (27) निवासी गांव बहादर नगर, तरनतारन; जोबनप्रीत सिंह (20), कुलविंदर सिंह उर्फ किंदा (20) और अरमानदीप सिंह (18)—तीनों निवासी गांव कलसियां कलां, तरनतारन—के रूप में हुई है।
डीजीपी ने बताया कि शूटर सुखराज सिंह उर्फ गूंगा का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसके खिलाफ चोरी व आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं। वह पहले भी सरपंच राजविंदर सिंह उर्फ राज की हत्या में शामिल रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि प्रभ दासूवाल की मृतक पूर्व सरपंच से पुरानी दुश्मनी थी और उसने पहले भी उस पर गोलीबारी करवाई थी।
डीजीपी ने बताया कि इस केस को प्राथमिकता पर लेते हुए कई विशेष टीमों का गठन किया गया। तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर दोनों शूटरों—सुखराज सिंह उर्फ गूंगा और करमजीत सिंह—को रायपुर (छत्तीसगढ़) से गिरफ्तार किया गया। आरोपी पुलिस से बचने के लिए महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पंजाब और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में ठिकाने बदलते रहे और फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि एसएसओसी मोहाली की मदद से दो अन्य आरोपियों को मोहाली से गिरफ्तार किया गया, जबकि हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी को वल्टोहा और कुलविंदर सिंह उर्फ किंदा व अरमानदीप सिंह को तरनतारन के भिखीविंड क्षेत्र से पकड़ा गया। जांच में खुलासा हुआ कि इन पांचों ने शूटरों को रसद, पनाह, हथियार और मोटरसाइकिल उपलब्ध कराकर साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।
डीजीपी ने कहा कि गोली चलाने वाले और लॉजिस्टिक सहायता देने वाले आरोपी एक-दूसरे को नहीं जानते थे और सभी प्रभ दासूवाल के निर्देशों पर स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे, जिससे इस साजिश की संगठित प्रकृति उजागर होती है।
अपराध के विरुद्ध आगे की रणनीति का उल्लेख करते हुए डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि नशा विरोधी मुहिम की सफलता के बाद अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार विदेशों में बैठे अपराधियों की प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करते हुए संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू करने जा रही है।
उन्होंने दोहराया कि सीमावर्ती राज्य से संगठित अपराध का खात्मा सरकार और पंजाब पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है और हिंसक गतिविधियों में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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