नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने NEET अंडरग्रेजुएट 2024 के माध्यम से एमबीबीएस में दाखिला पाने वाले एक छात्र को बड़ी राहत देते हुए उसके प्रवेश को बहाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना किसी ठोस और वैध कारण के किसी छात्र से उच्च या व्यावसायिक शिक्षा का अधिकार छीना नहीं जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि भले ही उच्च या व्यावसायिक शिक्षा को संविधान में स्पष्ट रूप से मौलिक अधिकार के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है, लेकिन यह राज्य का दायित्व है कि वह योग्य छात्रों को शिक्षा से वंचित न करे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि बिना किसी पुख्ता आधार के किसी छात्र पर कदाचार का अनुमान लगाना कानूनन गलत है।
बिना ठोस कारण प्रवेश रद्द करना गलत
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता छात्र ने खुली प्रतियोगिता में योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की थी। ऐसे में उसका प्रवेश तभी रद्द किया जा सकता है, जब उसके खिलाफ ठोस, वैध और प्रमाणित कारण मौजूद हों। केवल संदेह या अनुमान के आधार पर प्रवेश रद्द करना पूरी तरह अनुचित है।
MBBS की कक्षाओं में तुरंत शामिल होने का आदेश
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि शिक्षा का अधिकार, विशेषकर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा का अधिकार, अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसकी रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता छात्र को तुरंत एमबीबीएस की कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए, ताकि उसकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
मामले की पृष्ठभूमि
दरअसल, याचिकाकर्ता मेडिकल छात्र का प्रवेश कथित अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर रद्द कर दिया गया था, जिससे उसकी एमबीबीएस की पढ़ाई प्रभावित हुई। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि वह NEET-UG 2024 प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच कर रही है, जिसमें 22 छात्रों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, जिस छात्र का प्रवेश रद्द किया गया था, वह आरोपी नहीं बल्कि केवल एक गवाह है।
हाईकोर्ट के इस फैसले को शिक्षा के अधिकार और योग्य छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।











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