September 22, 2026 10:37 am

September 22, 2026 10:37 am

केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर, CPI(M) को झटका

वरिष्ठ नेता और तीन बार की विधायक आयशा पोटी कांग्रेस में शामिल
तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ माकपा (CPI-M) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक एडवोकेट आयशा पोटी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। कोट्टारक्करा विधानसभा सीट से तीन बार जीत दर्ज कर चुकी आयशा पोटी का कांग्रेस में औपचारिक प्रवेश मंगलवार को राजधानी तिरुवनंतपुरम में लोक भवन के सामने आयोजित केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के दिन-रात के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुआ।

कांग्रेस नेतृत्व ने किया स्वागत
विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन और KPCC अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने आयशा पोटी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर उन्हें कांग्रेस का पारंपरिक तिरंगा शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव में कोट्टारक्करा सीट से उन्हें संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) का उम्मीदवार बनाए जाने की पूरी संभावना है।

CPI(M) में उपेक्षा और आंतरिक कलह का आरोप
कांग्रेस में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत में आयशा पोटी ने कहा कि CPI(M) के भीतर उन्हें लगातार कठिनाइयों और उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब वही आंदोलन, जिसे खड़ा करने में आपने योगदान दिया हो, आपको पीड़ा देने लगे तो यह बेहद दुखद होता है। उन्होंने दोहराया कि उनकी प्रतिबद्धता हमेशा कोट्टारक्करा की जनता के प्रति रही है।

PR राजनीति’ पर साधा निशाना
अपनी पूर्व पार्टी की कार्यशैली पर हमला बोलते हुए आयशा पोटी ने कहा कि विधायक रहते हुए उन्होंने कभी दिखावटी पीआर या छवि चमकाने की राजनीति नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें वामपंथी खेमे से ‘वर्ग-गद्दार’ कहा जाता है, तो भी वह आम आदमी के हित में काम करना जारी रखेंगी।

2006 की ऐतिहासिक जीत से बनाई पहचान
आयशा पोटी 2006 में तब सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने कोट्टारक्करा में दिग्गज नेता आर. बालकृष्ण पिल्लई को उनके गढ़ में हराया था। इसके बाद 2011 और 2016 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने जीत दर्ज कर जीत की हैट्रिक लगाई।
विजयन सरकार में बढ़ी दूरी, 2021 में कटा टिकट
पिनाराई विजयन सरकार के दौरान वरिष्ठ होने के बावजूद मंत्री या स्पीकर पद के लिए नजरअंदाज किए जाने से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद गहराते चले गए। 2021 में के.एन. बालगोपाल को मौका देने के लिए उनका टिकट काट दिया गया, जिसके बाद रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए।

2025 से साफ होने लगे थे राजनीतिक संकेत
जुलाई 2025 में ओमन चांडी की स्मृति सभा के दौरान कांग्रेस नेताओं कोडिकुन्निल सुरेश और चांडी ओमन के साथ मंच साझा करने के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। बाद में CPI(M) की सदस्यता का नवीनीकरण न कराने से उनके पार्टी छोड़ने की पुष्टि हो गई।

UDF को मिला मजबूत चेहरा, चुनावी समीकरण बदलने की उम्मीद
कांग्रेस में आयशा पोटी के शामिल होने से UDF को मध्य त्रावणकोर क्षेत्र में एक अनुभवी और प्रभावशाली चेहरा मिला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे कोल्लम जिले में ईसाई और तटस्थ मतदाताओं में बड़ा बदलाव आ सकता है, जो 2026 के विधानसभा चुनाव में UDF के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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