उपभोक्ताओं को अत्यधिक बिल और लंबित औसत बिलिंग के लिए मिलेगा मुआवजा
चंडीगढ़, 14 जनवरी: हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने यूएचबीवीएन से जुड़े मामलों में औसत आधार पर लंबे समय तक बिल न देने और अचानक अत्यधिक बिल थमाने को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया है। आयोग ने उपभोक्ताओं के हक में कार्रवाई करते हुए दोषी अधिकारियों पर जुर्माना और मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
आयोग ने बहादुरगढ़ के एक मामले का हवाला देते हुए बताया कि उपभोक्ता को लंबे समय तक बिल प्राप्त नहीं हुए या माइनस बिल जारी किए गए। इसके बाद लगभग 2.38 लाख रुपये का एकमुश्त बिल थमा दिया गया। शिकायत के बाद सुधार अधूरा और चरणबद्ध रूप से किया गया, जिससे अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली सामने आई।
आयोग ने हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 की धारा 17(1)(ह) के तहत दोषी दो सीए अधिकारियों पर 5,000 रुपये का जुर्माना और प्रत्येक द्वारा उपभोक्ता को 1,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही, गलत संड्री को स्वीकृति देने वाले एसडीओ अधिकारियों के नाम आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
जुलाई 2022 से गलत तरीके से जारी किए गए प्रत्येक बिलिंग चक्र के लिए उपभोक्ता को प्रति बिल 500 रुपये की दर से अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा। प्रारंभ में यह राशि निगम के कोष से दी जाएगी, जिसे बाद में दोषी एजेंसी या अधिकारियों से वसूल किया जा सकेगा।
हिसार जिले के एक अन्य मामले में, मार्च 2020 से फरवरी 2024 तक दो बिजली खातों में औसत आधार पर बिलिंग की गई। जहां पहले लगभग 160 यूनिट का द्विमासिक बिल आता था, वहीं बाद में एक खाते में लगभग 45,000 यूनिट का बिल और दूसरे में 20,000 यूनिट का बिल जारी किया गया। आयोग ने इसे उपभोक्ता पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डालने वाला और गंभीर मानसिक पीड़ा का कारण बताया।
आयोग ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गलत बिल के लिए 500 रुपये प्रति बिल मुआवजा दिया जाए और संबंधित अधिकारियों को सटीक संख्या निर्धारित कर शीघ्र मुआवजा जारी करने का आदेश दिया। साथ ही, दोनों वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों से स्पष्ट नीति बनाने का आग्रह भी किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।











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