August 28, 2026 9:59 am

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सिख आचार संहिता पर बयान का मामला: मुख्यमंत्री भगवंत मान आज15 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय में होंगे पेश

लुधियाना/अमृतसर: श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने सिख आचार संहिता और सिख मर्यादा के विरुद्ध कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को 15 जनवरी को तलब किया है। मुख्यमंत्री को श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।
बताया गया है कि श्री अकाल तख्त साहिब परिसर में केवल सिख मर्यादा का पूर्ण पालन करने वाले सिखों को ही प्रवेश की अनुमति होती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान सिख आचार संहिता का पूर्ण पालन नहीं करते, इसी कारण उन्हें मुख्य परिसर के बजाय सचिवालय में बुलाया गया है।

मुख्यमंत्री ने जताया सम्मान, आदेश मानने की घोषणा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वे श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करेंगे। उन्होंने लिखा—
“श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश मेरे सिर माथे है। मैं मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक साधारण सिख के रूप में नंगे पांव उपस्थित होऊंगा। 15 जनवरी को मैं अमृतसर में माननीय राष्ट्रपति के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहा हूं, लेकिन श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश मेरे लिए सर्वोपरि है।”

पहले भी मुख्यमंत्रियों को किया जा चुका है तलब
यह पहला मौका नहीं है जब पंजाब के किसी मुख्यमंत्री को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा तलब किया गया हो। इससे पहले भी कई मुख्यमंत्रियों को पेश होकर स्पष्टीकरण देना पड़ा है—

1979: तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को तलब किया गया और श्री हरमंदिर साहिब में सेवा की सजा दी गई।
1987: मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को पंथ विरोधी गतिविधियों के आरोप में तलब कर सार्वजनिक क्षमा और सेवा का आदेश दिया गया।
2018: मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को गुटका साहिब पर शपथ लेने के मामले में तलब किया गया।
2026: वर्तमान मुख्यमंत्री भगवंत मान को गोलक और गुरु साहिब की तस्वीरों पर कथित टिप्पणी के चलते तलब किया गया है।

इतिहास में कई बड़े नाम अकाल तख्त के समक्ष हुए पेश
इतिहास गवाह है कि श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि सम्राट और राष्ट्रपति स्तर के लोग भी पेश हो चुके हैं।
महाराजा रणजीत सिंह को नैतिक आचरण के उल्लंघन पर तलब कर दंड दिया गया था।
पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह से 1984 के सिख नरसंहार के दौरान चुप रहने को लेकर लिखित माफी मंगवाई गई थी।
वर्ष 2024 में उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को भी धार्मिक मामलों में चूक पर सेवा और क्षमा याचना का आदेश दिया गया था।

AAP का रुख: विवाद बनाने की जरूरत नहीं
इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि—
“श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है। जत्थेदार साहिब द्वारा बुलाए जाने पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ 15 जनवरी को निर्धारित समय पर उपस्थित होंगे। इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।”
क्या है पूरा विवाद?
कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज का कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा मीडिया के सामने गोलक को लेकर की गई टिप्पणियां सिख पंथ की मर्यादा और आस्था के खिलाफ हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अलग-अलग अवसरों पर गोलक को लेकर बयान दिए, जो सिख नैतिकता पर सीधा प्रहार हैं।
जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे सिख पंथ की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली हैं।

 

 

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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