चंडीगढ़, 18 जनवरी। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने हरियाणा की सरकारी नौकरियों में हरियाणवी युवाओं के हक और हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की है। उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे बयान न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्कि हरियाणा के युवाओं के भविष्य पर भी सवाल खड़े करते हैं।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि यदि हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के दायरे में आने वाली अधिकांश नौकरियां दूसरे राज्यों के युवाओं को दी जाएंगी, तो हरियाणा के बच्चे आखिर जाएंगे कहां। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के लगभग सभी राज्य अपनी भर्ती प्रक्रियाओं और नियमों के जरिए स्थानीय युवाओं को तरजीह देते हैं, लेकिन हरियाणा इस मामले में अपवाद बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के 28 राज्यों में इकलौता ऐसा राज्य है, जहां HPSC का चेयरमैन बाहर के प्रदेश से लाकर नियुक्त किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पूरे देश में कोई दूसरा ऐसा उदाहरण है, जहां किसी राज्य के पब्लिक सर्विस कमीशन का चेयरमैन उसी राज्य का न होकर किसी अन्य प्रदेश से हो। दीपेन्द्र हुड्डा ने हरियाणा के युवाओं की काबिलियत पर सवाल उठाने वाले HPSC चेयरमैन को तुरंत बर्खास्त करने और तीन करोड़ हरियाणावासियों में से किसी योग्य हरियाणवी को यह जिम्मेदारी सौंपने की मांग की।
सांसद हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सोनीपत में रेल कोच फैक्ट्री और महम–भिवानी–हांसी क्षेत्र में इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट मंजूर कराए गए थे, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिल सकता था। लेकिन भाजपा सरकार की कमजोरी के चलते ये परियोजनाएं दूसरे राज्यों में चली गईं। अब अगर सरकारी नौकरियों में भी बाहरी युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, तो हरियाणा के युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
उन्होंने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां हिंदी के अलावा राज्य की अलग भाषा है, वहां भाषा का पेपर अनिवार्य किया गया है। वहीं हिंदी भाषी राज्यों में भी स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के विशेष प्रावधान हैं। राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में 30 से 40 प्रश्न राजस्थान जीके से अनिवार्य होते हैं, पंजाब में पंजाबी भाषा के साथ 20 प्रतिशत प्रश्न पंजाब जीके से पूछे जाते हैं, जबकि मध्य प्रदेश में राज्य जीके का हिस्सा 33 प्रतिशत तक है। गुजरात में तो 1995 से लागू सरकारी प्रस्ताव के तहत निजी क्षेत्र में भी स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाती है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में HPSC के माध्यम से बड़ी संख्या में बाहरी युवाओं की भर्ती हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या तीन करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में एक भी योग्य हरियाणवी नहीं मिला, जिसे HPSC का चेयरमैन बनाया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत हरियाणावासियों के हक मारे जा रहे हैं और आरक्षण के पात्र वर्गों के साथ भी बड़ा धोखा हो रहा है।
उन्होंने भर्ती आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज में असिस्टेंट इंजीनियर (AE/SDO) भर्ती में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाए गए 214 अभ्यर्थियों में से केवल 29 हरियाणा के थे। इसी तरह सिविल जज, सिंचाई विभाग, एसडीओ इलेक्ट्रिकल और टेक्निकल एजुकेशन विभाग की भर्तियों में भी बाहरी उम्मीदवारों का वर्चस्व रहा।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर (इंग्लिश) की हालिया भर्ती में 613 पदों में से केवल 151 पर चयन हुआ और आरक्षित वर्गों की अधिकांश सीटें खाली छोड़ दी गईं। डीएससी वर्ग के साथ अन्याय करते हुए 60 आरक्षित सीटों में से सिर्फ एक पर चयन किया गया। उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में आज भी हरियाणा के युवा कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है।













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