May 23, 2026 6:30 pm

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खेल और फिटनेस: युवा-संचालित भारत को आकार देती शक्ति — डॉ. विजय गर्ग

स्टेडियम से कक्षाओं तक

भारत ने वर्तमान दशक में खेलों, विशेषकर महिला खेलों के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। ओलंपिक, राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलताओं ने न केवल राष्ट्रीय गौरव बढ़ाया है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा को भी मजबूती दी है। विभिन्न राज्यों से उभरती प्रतिभाओं ने यह सिद्ध किया है कि भारत खेल और फिटनेस के क्षेत्र में एक सशक्त शक्ति बनकर उभर रहा है।

21वीं सदी में भारत को विश्व स्तर पर खेल, फिटनेस और योग में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। नवाचार और प्रौद्योगिकी के साथ खेलों का समन्वय भारत को एक नई पहचान दे रहा है। राष्ट्रमंडल के सबसे बड़े सदस्य देशों में शामिल भारत को 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का अवसर मिलना इस दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

भारतीय खेल: एक युवा-केंद्रित मॉडल

खेलो इंडिया, फिट इंडिया” का मंत्र माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को केंद्र में रखकर विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, अनुशासित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है। फिट इंडिया अभियान ने युवाओं की दिनचर्या में स्वस्थ जीवनशैली को शामिल किया है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार हुआ है।

खेल और फिटनेस को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का अभिन्न अंग माना गया है। स्टेडियमों से लेकर स्कूल-कॉलेजों की कक्षाओं तक खेलों को शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि कौशल, नेतृत्व और टीम-वर्क जैसे गुणों का विकास हो सके। इसके लिए प्रशिक्षण प्रशिक्षक (टीओटी) कार्यक्रमों के माध्यम से कोचों और प्रशिक्षकों को सशक्त किया जा रहा है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

खेल और फिटनेस में कौशल विकास

खेल और फिटनेस में पुनः प्रशिक्षण और कौशल-विकास के ठोस परिणाम दिखाई दे रहे हैं—आत्म-अनुशासन, आत्मविश्वास, सहानुभूति और करुणा जैसे मानवीय मूल्यों का विकास हो रहा है। विशेष रूप से महिलाओं में मानसिक और शारीरिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है। भारत सरकार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से योग और आत्मरक्षा प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुरूप है।

खेलों में इंटर्नशिप कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र खेल प्रशासन, एंटी-डोपिंग, इवेंट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, खेल मंत्रालय के साथ मिलकर आईटीआई छात्रों को खेल, योग, फिटनेस और आत्मरक्षा में दक्ष बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है—यह एक अनूठी जीवन-कौशल और समुदाय-आधारित पहल है।

एनएसएस और एनसीसी: समुदाय-आधारित शिक्षा की रीढ़

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) भारतीय शिक्षा व्यवस्था के ऐसे सशक्त मंच हैं, जो युवाओं के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एनसीसी को उच्च शिक्षा संस्थानों में विकल्प-आधारित क्रेडिट पाठ्यक्रम के रूप में लागू किया गया है, जबकि एनएसएस सामुदायिक सेवा के माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराता है। ये दोनों पहल मिलकर एक मजबूत प्रतिभा-पूल तैयार करती हैं और युवाओं को खेल, फिटनेस तथा नेतृत्व के लिए प्रेरित करती हैं।

 

खेल और फिटनेस आज केवल मनोरंजन या प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे युवा-संचालित भारत के निर्माण की आधारशिला बन चुके हैं। जब खेलों को शिक्षा, कौशल और समुदाय-आधारित सीख से जोड़ा जाता है, तब एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव होता है। यही मार्ग भारत को वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

— डॉ. विजय गर्ग

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, प्रख्यात शिक्षाविद एवं स्तंभकार

श्री कौर चंद एमएचआर, मलोट (पंजाब)

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