August 28, 2026 9:34 am

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आखिर सुखना झील को कितना सुखाओगे” — सीजेआई सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

सरकार को पिछली गलतियां न दोहराने की चेतावनी

नई दिल्ली | चंडीगढ़। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने चंडीगढ़ की ऐतिहासिक और प्रसिद्ध सुखना झील को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “आखिर सुखना झील को कितना सुखाओगे”। उन्होंने झील को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार और प्रशासन को पिछली गलतियां दोहराने से आगाह किया तथा त्वरित और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत के चलते सुखना झील को भारी क्षति पहुंची है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो झील का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
बिल्डर माफिया–नौकरशाही की सांठगांठ पर कड़ा रुख
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ 1995 से लंबित जनहित याचिका ‘इन रे: टी.एन. गोदावरमन थिरुमुलपाद’ में दाखिल अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान सुखना झील का मुद्दा सामने आया।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि नौकरशाहों की सांठगांठ से अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिन्हें पंजाब में राजनीतिक संरक्षण भी मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिल्डर माफिया सक्रिय हैं और इसी कारण झील लगातार बर्बादी की ओर बढ़ रही है।
शीर्ष अदालत की चिंता
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि जंगलों और झीलों से जुड़े मामले उच्च न्यायालयों को दरकिनार कर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में क्यों लाए जा रहे हैं—वह भी 1995 की एक लंबित जनहित याचिका में अंतरिम आवेदनों के रूप में।
शीर्ष अदालत की इन टिप्पणियों से यह साफ है कि सुखना झील के संरक्षण को लेकर न्यायपालिका गंभीर है और आने वाले समय में प्रशासन से ठोस जवाबदेही की उम्मीद की जा रही है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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