July 13, 2026 1:16 pm

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चंडीगढ़ मेयर चुनाव: AAP–कांग्रेस गठबंधन टूटा, बीजेपी को मिला बड़ा फायदा

चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव से पहले सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने पहले गठबंधन के संकेत दिए थे, लेकिन अब दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है।

कांग्रेस अकेले मैदान में
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने साफ किया कि पार्टी मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—तीनों पदों के लिए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस के इस ऐलान के साथ ही गठबंधन की संभावनाओं पर पूरी तरह विराम लग गया है।

AAP ने भी बनाई अलग रणनीति
वहीं आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस से किसी तरह के गठबंधन से इनकार कर दिया है। पार्टी के पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह ने कहा कि AAP अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और बीजेपी व कांग्रेस—दोनों के खिलाफ आम आदमी की आवाज बुलंद करेगी।

उम्मीदवारों की घोषणा
दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर दिए हैं।

AAP के उम्मीदवार:
मेयर: योगेश ढींगरा
सीनियर डिप्टी मेयर: मुन्नवर खान
डिप्टी मेयर: जसविंदर कौर

कांग्रेस नामांकन

 

कांग्रेस के उम्मीदवार:
मेयर: गुरप्रीत गाबी
सीनियर डिप्टी मेयर: सचिन गलाव
डिप्टी मेयर: निर्मला देवी
AAP को दलबदली का डर, पार्षद होटल में
AAP को अपने पार्षदों की संभावित दलबदली का अंदेशा है। इसी कारण पार्टी ने अपने सभी 11 पार्षदों को रोपड़ के एक होटल में ठहराया है। बताया जा रहा है कि चुनाव तक उन्हें शहर से बाहर रखा जाएगा और नामांकन या मतदान के समय ही उन्हें लाया जाएगा।

क्यों टूटा गठबंधन?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह गठबंधन नामांकन प्रक्रिया से पहले ही कमजोर पड़ गया था। पंजाब विधानसभा चुनाव पर पड़ने वाले संभावित राजनीतिक असर के चलते, दोनों पार्टियों की पंजाब इकाइयों ने गठबंधन पर आपत्ति जताई। माना जा रहा है कि गठबंधन होने की स्थिति में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान जनता के बीच सफाई देना दोनों दलों के लिए मुश्किल हो सकता था।

चुनावी गणित क्या कहता है?
नगर निगम में कुल 35 पार्षद और 1 सांसद मतदान करेंगे। मेयर बनने के लिए 19 वोट जरूरी हैं।
बीजेपी: 18 पार्षद
AAP: 11 पार्षद
कांग्रेस: 6 पार्षद
यदि AAP और कांग्रेस साथ आते तो मुकाबला 18-18 का हो जाता, लेकिन गठबंधन टूटने से बीजेपी के लिए जीत का रास्ता काफी हद तक साफ माना जा रहा है।

मतदान प्रक्रिया में बदलाव संभव
इस बार मेयर चुनाव हाथ उठाकर मतदान के जरिए कराए जाने की संभावना है। पहले यह चुनाव सीक्रेट बैलेट से होता था। हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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