एक साल में 17 हजार से अधिक बिछड़ों की करवाई घर वापसी, स्टेट क्राइम ब्रांच का विशेष सेल होगा और मजबूत
चंडीगढ़, 22 जनवरी। गुमशुदा लोगों की तलाश को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने की दिशा में हरियाणा पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने हरियाणा पुलिस स्टेट क्राइम ब्रांच में गठित विशेष सेल को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। यह विशेष सेल प्रदेशभर में गुमशुदा बच्चों और अन्य व्यक्तियों का केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगा और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनकी त्वरित पहचान व तलाश सुनिश्चित करेगा।
डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गुमशुदा व्यक्तियों की तस्वीरें उच्च गुणवत्ता की हों, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTU) को और अधिक सक्रिय किया जाए तथा इस मानवीय अभियान में अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने दोहराया कि हरियाणा सरकार इस विषय को लेकर बेहद गंभीर है और गुमशुदा लोगों की घर वापसी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
गौरतलब है कि हरियाणा पुलिस ने बीते एक वर्ष में 17,000 से अधिक बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से मिलवाकर हजारों घरों में फिर से खुशियाँ लौटाई हैं।
मानवीय पुलिसिंग की मिसाल: 17 हजार से अधिक परिवारों को मिला उनका खोया हुआ अपना
हरियाणा पुलिस ने संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय देते हुए बीते एक वर्ष में
13,529 वयस्कों को उनके परिजनों से मिलवाया,
जिनमें 4,130 पुरुष और 9,399 महिलाएं शामिल हैं।
इसके साथ ही,
3,122 नाबालिगों को सुरक्षित उनके माता-पिता तक पहुँचाया गया,
जिनमें 1,113 लड़के और 2,009 लड़कियां शामिल रहीं।
समाज के वंचित वर्ग के लिए सहारा बनते हुए पुलिस ने
184 बच्चों का पुनर्वास कराया, जो भीख मांगने को मजबूर थे,
और 191 बाल मजदूरों को रेस्क्यू कर उन्हें शोषण से मुक्त कराया।
स्टेट क्राइम ब्रांच की सशक्त मुहिम, बच्चों को भीख और बाल श्रम से दिलाई मुक्ति
प्रदेशभर में स्टेट क्राइम ब्रांच के अंतर्गत कार्यरत 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने मानव तस्करी और गुमशुदगी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की।
एक वर्ष में इन यूनिट्स ने—
700 वयस्कों (277 पुरुष, 423 महिलाएं)
538 नाबालिगों (345 लड़के, 193 लड़कियां)
को उनके परिवारों से मिलवाया।
इसके अतिरिक्त,
1,473 बच्चों को भीख मांगने की मजबूरी से बाहर निकाला गया,
और 2,313 बाल मजदूरों को श्रम के शोषण से आज़ाद कराया गया।
‘ऑपरेशन मुस्कान’ बना उम्मीद की किरण, 1798 परिवारों में लौटी खुशियाँ
मार्च माह में चलाए गए ‘ऑपरेशन मुस्कान’ ने मानवीय पुलिसिंग की सशक्त मिसाल पेश की। इस अभियान के तहत—
जिला पुलिस ने 1,079 वयस्कों और 511 नाबालिगों को उनके परिवारों से मिलवाया,
वहीं AHTU ने 117 वयस्कों और 91 नाबालिगों को सुरक्षित घर पहुँचाया।
इस प्रकार कुल 1,798 लोग वर्षों बाद अपने अपनों से फिर मिल सके।
अभियान के दौरान—
437 शेल्टर होम्स की जांच की गई,
563 बच्चों को भीख मांगने से रेस्क्यू किया गया,
और 890 बाल मजदूरों को शोषण से मुक्त कराया गया।
सफलता की कहानी: 25 साल बाद दुर्गा की घर वापसी, महाराष्ट्र से लौटी उम्मीद
यमुनानगर AHTU की संवेदनशीलता और अथक प्रयासों से 25 वर्षों से बिछड़ी दुर्गा देवी आखिरकार अपने परिवार से मिल सकीं। आठ वर्ष की उम्र में महाराष्ट्र से गुम हुई दुर्गा करनाल के बाल भवन में पली-बढ़ीं। बचपन की एक धुंधली याद—दो रेलवे फाटकों के बीच स्थित एक मंदिर—के आधार पर पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से भंडारा जिले में उनके परिवार तक पहुँच बनाई। वीडियो कॉल पर मंदिर पहचानते ही 25 वर्षों का इंतजार खत्म हो गया और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
“सबको मिलवाते हो, मेरा परिवार भी ढूंढ दो” — 22 साल बाद बेटे की माँ से मुलाकात
पंचकूला AHTU की मानवीय पहल से गाजियाबाद के चिल्ड्रन होम में पले अमित को 22 साल बाद उसकी माँ से मिलवाया गया। सात वर्ष की उम्र में गुम हुए अमित के पास केवल कुछ संकेत थे—पिता का नाम जग्गू, माता का नाम नीता और ‘बाला चौक’। इन्हीं संकेतों के आधार पर पुलिस ने वर्षों की दूरी मिटाते हुए माँ-बेटे का पुनर्मिलन कराया।
हरियाणा पुलिस की यह उपलब्धि साबित करती है कि जब तकनीक, संकल्प और संवेदना साथ चलते हैं, तो वर्षों की जुदाई भी सिमट जाती है और टूटे रिश्तों में फिर से जीवन लौट आता है।













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