88 वर्ष की उम्र में भी रोज सड़कों की सफाई कर समाज को दे रहे हैं संदेश
चंडीगढ़: ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ को स्वच्छ रखने की मुहिम में खुद सड़कों पर उतरकर मिसाल कायम करने वाले पंजाब के पूर्व डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू को पद्म श्री सम्मान से नवाजा जाएगा। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान समाज सेवा (Social Work) के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। पूर्व डीआईजी सिद्धू पिछले एक दशक से अधिक समय से हर रोज सुबह शहर की सड़कों और नालियों की सफाई स्वयं करते हैं। उनका कूड़ा उठाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसने देशभर का ध्यान उनकी अनोखी सेवा की ओर खींचा।
कौन हैं इंदरजीत सिंह सिद्धू?
इंदरजीत सिंह सिद्धू मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले की धुरी तहसील के बूगरा गांव के रहने वाले हैं। वे 1964 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और 1996 में पंजाब पुलिस से डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद से सेवानिवृत्त हुए।
अपने सेवा काल में उन्होंने 1986 में अमृतसर में सिटी एसपी के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। 1987 में वे चंडीगढ़ आए और DIG CID के पद पर कार्य किया। रिटायरमेंट के बाद वे अपनी पत्नी देविंदर पाल कौर के साथ चंडीगढ़ सेक्टर-49 स्थित IAS-IPS सोसाइटी में रहने लगे।
2023 में पत्नी के निधन के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। आज 88 वर्ष की उम्र में भी वे रोज सुबह करीब 6 बजे सैनिटेशन कार्ट के साथ निकलते हैं और शहर की सड़कों, गलियों व नालियों से कचरा उठाकर डस्टबिन में डालते हैं।
परिवार और समाज सेवा की सोच
सिद्धू के बेटे अमेरिका में नौकरी करते हैं और वहीं सेटल हैं, जबकि उनकी बेटी और दामाद मोहाली में रहते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले 10–12 वर्षों से वे रोज सैर के दौरान सड़कों पर फैली गंदगी देखकर खुद ही उसे साफ करने लगते थे।
वे हमेशा दस्ताने पहनकर कचरा उठाते हैं और मानते हैं कि पढ़े-लिखे और सक्षम लोगों को अपने शहर को साफ रखने में आगे आना चाहिए। कई बार स्थानीय सफाई कर्मचारियों और लोगों ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी, लेकिन सिद्धू अपने संकल्प पर अडिग रहे।
आनंद महिंद्रा ने किया था वीडियो शेयर
इंदरजीत सिंह सिद्धू का सफाई करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था, जिसे महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने भी साझा किया। आनंद महिंद्रा ने लिखा था कि सिद्धू हर सुबह एक साइकिल ठेले और अटूट कर्तव्य भावना के साथ चंडीगढ़ की गलियों में निकलते हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ की कम रैंकिंग से निराश होने के बजाय सिद्धू ने शिकायत करने के बजाय खुद काम करना चुना। आनंद महिंद्रा ने उन्हें “सड़कों का शांत योद्धा” बताते हुए कहा कि सेवा की कोई उम्र नहीं होती और उद्देश्य कभी सेवानिवृत्त नहीं होता।
पद्म श्री सम्मान के साथ अब इंदरजीत सिंह सिद्धू की यह निस्वार्थ सेवा पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है।











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