चंडीगढ़, 12 फरवरी 2026: मुंबई हवाईअड्डे पर कस्टम्स अधिकारियों ने जब्त की गईं 35 किरपान उनके गात्रों सहित सिख समुदाय के प्रतिनिधियों को लौटा दीं। इस कदम का सिख संगठनों ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही हवाईअड्डों की सुरक्षा प्रक्रियाओं और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को भी फिर से उजागर कर दिया है।
ये किरपान अमृतधारी सिख यात्रियों से सुरक्षा जांच के दौरान इसलिए जब्त की गई थीं क्योंकि वे निर्धारित विमानन आकार या वहन मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। किरपान सिख धर्म के पांच ककारों में से एक है और इसे गहन आध्यात्मिक महत्व तथा धार्मिक पहचान का अभिन्न प्रतीक माना जाता है।
महाराष्ट्र स्थित सत श्री अकाल वेलफेयर ट्रस्ट के सचिव सरदार पूरन सिंह बंगा ने कहा कि इन पवित्र वस्तुओं की वापसी का प्रयास उनकी गरिमा और सम्मान की रक्षा के उद्देश्य से किया गया। उन्होंने बताया कि कई बार सुरक्षा जांच के दौरान सिख यात्री अनजाने में किरपान छोड़ देते हैं, जिसके बाद वे लंबे समय तक आधिकारिक अभिरक्षा में बिना दावे के पड़ी रहती हैं। ट्रस्ट ने अब कस्टम्स अधिकारियों के साथ समन्वय कर ऐसी धार्मिक वस्तुओं की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है।
बंगा के अनुसार, सत्यापन के बाद किरपान ट्रस्ट या स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों को सौंपी जाएंगी। जहां संभव होगा, उन्हें संबंधित परिवारों को लौटाया जाएगा, अन्यथा सिख परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाएगा और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि कस्टम्स ने हाल में अन्य धर्मों से जुड़ी वस्तुएं—जैसे कुरान और बाइबिल की प्रतियां तथा जमजम पानी की बोतलें—भी यात्रियों या समुदाय प्रतिनिधियों को लौटाई हैं।

हालांकि, इस सकारात्मक कदम के बावजूद सिख संगठनों की चिंताएं बनी हुई हैं। उनका कहना है कि कई हवाईअड्डों पर सुरक्षा जांच के दौरान अमृतधारी सिखों से ‘कड़ा’ उतारने को कहा जाता है, जो उनकी आस्था का अनिवार्य प्रतीक है। सिख चिंतक एडवोकेट हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि विमानन सुरक्षा नियमों और संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और सुरक्षा कर्मियों की संवेदनशीलता बढ़ाना जरूरी है।
ग्रेवाल के अनुसार, किरपान, खंडा हार और अन्य धार्मिक प्रतीकों को लेकर बार-बार होने वाली रोक-टोक से अमृतधारी सिख यात्रियों को भावनात्मक पीड़ा पहुंचती है। ऐसे मामलों को सिख संगठनों ने केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाया है। समुदाय का मानना है कि सुरक्षा और आस्था—दोनों का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए हवाईअड्डा सुरक्षा प्रक्रियाओं में स्पष्टता और एकरूपता आवश्यक है।











Total Users : 291259
Total views : 493518