एक और अधिकारी की समय से पहले ही अपने मूल कैडर हरियाणा लौटने की चर्चा
डेपुटेशन व्यवस्था और प्रशासनिक संस्कृति पर गंभीर सवाल
चंडीगढ़, 12 फरवरी। चंडीगढ़ यूटी प्रशासन में डेपुटेशन पर तैनात हरियाणा के अधिकारियों का मोहभंग अब खुलकर सामने आने लगा है। एक के बाद एक अधिकारी समय से पहले ही चंडीगढ़ छोड़कर अपने मूल कैडर हरियाणा लौटने की इच्छा जता रहे हैं। ताज़ा मामला एक एचसीएस अधिकारी से जुड़ा है, जिन्होंने तय अवधि पूरी होने से पहले ही चंडीगढ़ से वापसी के लिए प्रशासन को लिखित रूप में सूचित कर दिया है। इस घटनाक्रम ने चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली, डेपुटेशन नीति और अधिकारियों के बीच प्रोटोकॉल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि उपरोक्त अधिकारी ने इस बात की पुष्टि नही की है, मगर चर्चा जोरों पर है।
समय से पहले लौटने का नया मामला
सूत्रों के अनुसार, संबंधित एचसीएस अधिकारी ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन को स्पष्ट रूप से अवगत करा दिया है कि वे अब यहां सेवा जारी नहीं रखना चाहते और अपने मूल कैडर हरियाणा में वापसी करना चाहते हैं। आमतौर पर डेपुटेशन पर आए अधिकारियों की अवधि निश्चित होती है, लेकिन तय समय से पहले ही लौटने की इच्छा जताना अपने आप में असामान्य माना जाता है। इससे पहले ही यूटी काडर में हरियाणा की एक पोस्ट व पंजाब के 2 अधिकारियों की पोस्ट खाली चल रही है। जिनके पैनल भी पेंडिंग पड़े है।
प्रशासनिक हलकों में इसे चंडीगढ़ के कार्य वातावरण के प्रति बढ़ते असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पहले भी लौट चुके हैं 7 एचसीएस अधिकारी
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी चंडीगढ़ यूटी में डेपुटेशन पर आए हरियाणा के 7 एचसीएस अधिकारी समय से पहले ही वापसी कर चुके हैं। इनमें—
राजीव प्रसाद (एचसीएस)
शालिनी चेतल
शंभू राठी
सयंम गर्ग
शशि वसुंधरा
ऋचा राठी
सुमित सिहाग
शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों की समयपूर्व वापसी ने यह संकेत दिया है कि समस्या किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि सिस्टम से जुड़ी हुई है।
सीनियर–जूनियर प्रोटोकॉल बना बड़ा मुद्दा
सूत्र बताते हैं कि चंडीगढ़ प्रशासन में कार्यरत कई डेपुटेशन अधिकारियों को सबसे अधिक आपत्ति सीनियरिटी और प्रोटोकॉल को लेकर है। आरोप है कि—
यहां सीनियर और जूनियर अधिकारियों के बीच प्रशासनिक मर्यादाओं का सही पालन नहीं होता
वरिष्ठ अधिकारियों को उनके अनुभव और रैंक के अनुरूप जिम्मेदारी नहीं दी जाती
कई मामलों में सीनियर अधिकारियों को जूनियर अधिकारियों के अधीन कार्य करना पड़ता है
प्रशासनिक सेवा में प्रोटोकॉल और पदानुक्रम (हायरार्की) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस तरह की व्यवस्था अधिकारियों के आत्मसम्मान और कार्यक्षमता दोनों पर असर डालती है।
हरियाणा कैडर में बढ़ती नाराजगी
हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि चंडीगढ़ यूटी में डेपुटेशन को लेकर अब अधिकारियों में उत्साह कम होता जा रहा है। जहां पहले चंडीगढ़ को एक प्रतिष्ठित और सीखने वाला पोस्टिंग माना जाता था, वहीं अब इसे चुनौतीपूर्ण और असहज कार्यस्थल के रूप में देखा जाने लगा है।
कई अधिकारी अनौपचारिक बातचीत में यह कह चुके हैं कि अधिकार और जिम्मेदारी के बीच संतुलन न होने से काम करना कठिन हो जाता है।
यूटी प्रशासन के लिए खतरे की घंटी
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में चंडीगढ़ प्रशासन को योग्य और अनुभवी अधिकारियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। डेपुटेशन से अधिकारियों का दूरी बनाना सीधे तौर पर प्रशासनिक दक्षता और निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।
सुधार की दरकार
विजय बंसल सीनियर एडवोकेट, विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ प्रशासन को इस स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आवश्यक है कि—
डेपुटेशन नीति की समीक्षा की जाए
सीनियरिटी और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो
अधिकारियों को सम्मानजनक कार्य वातावरण मिले
ताकि चंडीगढ़ अपनी पहचान एक आदर्श प्रशासनिक केंद्र के रूप में बनाए रख सके।
यह समाचार प्रशासनिक सूत्रों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।











Total Users : 291262
Total views : 493524