April 6, 2026 11:48 am

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पंचकूला के सकेतड़ी में महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन; पांडव काल से जुड़ा प्राचीन श्री शिव मंदिर बना आस्था का केंद्र

पंचकूला: महाशिवरात्रि का पावन पर्व सनातन धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। यह दिन भगवान शिव की आराधना, तप, साधना और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है। महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसी कड़ी में हरियाणा के पंचकूला जिले के गांव सकेतड़ी में स्थित ऐतिहासिक प्राचीन श्री शिव मंदिर में भी श्रद्धालुओं का सैलाब देखने को मिला।

हजारों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक और रुद्राभिषेक
महाशिवरात्रि पर तड़के सुबह से ही शिव भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लग गईं। भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित कर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

पुलिस, अग्निशमन विभाग और सेवा दल रहे मुस्तैद
मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि हर वर्ष महाशिवरात्रि पर यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस, अग्निशमन विभाग तथा विभिन्न सेवा दलों के सेवक पूरे दिन मुस्तैद रहे।
भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर से लेकर सुखना झील मार्ग तक विशेष इंतजाम किए गए, ताकि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।

नाग-नागिन की प्राचीन गुफा बनी आकर्षण का केंद्र
महाशिवरात्रि के दिन मुख्य मंदिर के साथ स्थित प्राचीन गुफा में भी श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही। मान्यता है कि इस गुफा में नाग देवता के दर्शन होते हैं, जो केवल सौभाग्यशाली भक्तों को ही प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन के बाद सीढ़ियां उतरकर इस गुफा में पहुंचते हैं और नाग देवता के दर्शन की कामना करते हैं।

चार राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु
इस ऐतिहासिक मंदिर में हरियाणा के अलावा चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अरावली की पहाड़ियाँ के बीच स्थित इस मंदिर की धार्मिक मान्यता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
मंदिर प्रशासन द्वारा आसपास खुले मैदान में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही श्रद्धालुओं से छोटे वाहन लाने की अपील की गई, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

पांडव काल से जुड़ा मंदिर का गौरवशाली इतिहास
इस प्राचीन श्री शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता के अनुसार महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन और आशीर्वाद दिया।
कहा जाता है कि यहां पूजा-अर्चना के बाद पांडव कालका होते हुए कुरुक्षेत्र गए, जहां आगे चलकर महाभारत का महासंग्राम हुआ। यह मंदिर लगभग 500 वर्षों से भी अधिक पुराना बताया जाता है।

श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अनुपम संगम
महाशिवरात्रि के अवसर पर सकेतड़ी का यह प्राचीन श्री शिव मंदिर पूरी तरह से हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। आस्था, इतिहास और भक्ति के संगम ने इस पर्व को और भी दिव्य बना दिया, जहां हर श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करता नजर आया।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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