September 21, 2026 8:04 am

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आज का पंचांग (17 फरवरी 2026) फाल्गुन अमावस्या आज: ध्यान, दान और पितृ पूजा का विशेष संयोग;

वलयाकार सूर्य ग्रहण का प्रभाव, शुभ कार्यों से करें परहेज

चंडीगढ़/नई दिल्ली, 17 फरवरी 2026 (मंगलवार):
आज फाल्गुन महीने की अमावस्या तिथि है, जिसे परंपरागत रूप से अंधकार का दिन कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता काली का विशेष प्रभाव रहता है। यह तिथि आत्मचिंतन, ध्यान, दान-पुण्य, पशुओं को भोजन कराने और पूर्वजों की पूजा (पितृ तर्पण) के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। वहीं, आज वलयाकार सूर्य ग्रहण का भी संयोग बन रहा है, जिसके चलते शुभ कार्यों और नई शुरुआत से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक ज्योतिष के अनुसार, विवाह, गृह प्रवेश या किसी भी प्रकार की नई शुरुआत आज न करें। नई शुरुआत के लिए चंद्रोदय के बाद का समय अधिक अनुकूल माना जाता है।

आज का पंचांग (17 फरवरी 2026)
विक्रम संवत: 2082
मास: फाल्गुन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: अमावस्या
दिन: मंगलवार
योग: परिध
नक्षत्र: धनिष्ठा
करण: चतुष्पाद
चंद्र राशि: मकर
सूर्य राशि: कुंभ
सूर्योदय: सुबह 06:59 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:12 बजे
चंद्रोदय: नहीं
चंद्रास्त: शाम 06:10 बजे
राहुकाल: 15:23 से 16:47
यमगंड: 11:11 से 12:35

यात्रा के लिए श्रेष्ठ नक्षत्र
आज चंद्रमा मकर राशि में धनिष्ठा नक्षत्र में स्थित रहेगा। इस नक्षत्र का विस्तार मकर राशि में 23:20 तक और कुंभ राशि में 06:40 तक माना गया है। धनिष्ठा नक्षत्र के देवता अष्टवसु हैं और इस पर मंगल का शासन माना जाता है। यह नक्षत्र यात्रा, मित्रों से मिलने और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल बताया गया है।

आज के दिन वर्जित समय
राहुकाल: 15:23 से 16:47
यमगंड: 11:11 से 12:35
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन अवधियों में शुभ कार्य, नई शुरुआत, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए। साथ ही गुलिक काल, दुमुहूर्त और वर्ज्यम समय में भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
नोट: ग्रहण काल में जप, ध्यान, दान और पितृ तर्पण जैसे कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं, जबकि मांगलिक कार्य स्थगित रखना ही उत्तम रहता

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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