चंडीगढ़/मनीमाजरा, 23 फरवरी 2026: मनीमाजरा की करीब 3 लाख की आबादी के बावजूद उच्च शिक्षा संस्थानों के अभाव को लेकर अब स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरते हुए क्षेत्र में तत्काल सरकारी डिग्री कॉलेज, आईटीआई और तकनीकी संस्थान स्थापित करने की मांग उठाई है।
“बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सिर्फ नारा क्यों?”
एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 3 लाख की आबादी वाले क्षेत्र में एक भी सरकारी कॉलेज न होना गंभीर लापरवाही है।
उन्होंने कहा, “क्या मनीमाजरा के बच्चों का भविष्य संकरी गलियों तक सीमित रहेगा? ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाला प्रशासन यहां की बेटियों को सुरक्षित और सुलभ उच्च शिक्षा क्यों नहीं दे पा रहा? छात्राओं को कॉलेज के लिए दूर-दराज क्षेत्रों में जाना पड़ता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय है।”
बेटियों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
महिला समाजसेवी कमलेश देवी ने विशेष रूप से छात्राओं की समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की दूरी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई अभिभावक बेटियों को आगे पढ़ाने से हिचकिचाते हैं।
“हर रोज ऐसी बेटियों से मिलती हूं जिनकी पढ़ाई सिर्फ इसलिए रुक गई क्योंकि पास में कॉलेज नहीं है। मनीमाजरा में लड़कियों के लिए सुलभ सरकारी कॉलेज अब जरूरत बन चुका है,”
‘सौतेला व्यवहार’ का आरोप
एसोसिएशन के चेयरमैन सुभाष धीमान ने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में एक भी सरकारी कॉलेज का न होना भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वहीं प्रधान श्याम सुंदर ने इसे प्रशासन का ‘सौतेला व्यवहार’ बताते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
प्रमुख मुद्दे
बेटियों की शिक्षा पर ब्रेक: दूरी और सुरक्षा कारणों से छात्राओं का ड्रॉप-आउट रेट बढ़ रहा है।
तकनीकी शिक्षा का अभाव: क्षेत्र में न आईटीआई है, न पॉलीटेक्निक। युवा हुनरमंद बनने के बजाय असंगठित श्रम की ओर धकेले जा रहे हैं।
आर्थिक बोझ: निजी कॉलेजों की ऊंची फीस और लंबी दूरी का किराया गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी पड़ रहा है।
राजबीर सिंह भारतीय ने स्पष्ट कहा, “हमें अब खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि कॉलेज की नींव के लिए पत्थर और ईंट चाहिए। प्रशासन कागजी कार्रवाई छोड़कर जमीनी स्तर पर काम शुरू करे।”
प्रशासन के नाम मुख्य मांगें
सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना – स्थानीय स्तर पर छात्राओं की सुरक्षा और सुलभ उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए।
आईटीआई व स्किल सेंटर – युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु तकनीकी संस्थानों की शुरुआत।
विशेष बजट प्रावधान – मौजूदा वित्तीय वर्ष में इन संस्थानों के लिए अलग से फंड आवंटन।
आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन ने साफ किया है कि यदि जल्द मांगों पर सकारात्मक घोषणा नहीं हुई, तो क्षेत्र की जनता अपने बच्चों के हक के लिए सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
मनीमाजरा के लोग अब पूछ रहे हैं—3 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा का ‘ताला’ आखिर कब खुलेगा?











Total Users : 291492
Total views : 493858